झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो से लापता 18 साल की लड़की के मामले में 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। शनिवार को इस मामले में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब उसके कंकाल के अवशेष बरामद हुए। जिसके बाद हाई कोर्ट ने यह एक्शन लिया। इससे पहले कोर्ट ने इस केस में पुलिस की लापरवाही को लेकर सवाल खड़े किए थे। जिसमें एफआईआर में देरी, परिवार को परेशान करना शामिल है।

लड़की पिछले साल 21 जुलाई से लापता थी। उसकी मां ने उसी दिन पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन एफआईआर 10 दिनों से ज्यादा की देरी के बाद 4 अगस्त को दर्ज की गई। परिवार ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने शुरू में शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय उन्हें किसी भी संदिग्ध का नाम लेने से रोका।

जिसके बाद मामला झारखंड हाई कोर्ट तक पहुंचा। हाई कोर्ट ने 9 अप्रैल को अपने बंदी प्रत्यक्षीकरण आदेश में बोकारो पुलिस के आचरण का संज्ञान लिया। कोर्ट ने पाया कि लड़की का पता लगाने सही से कोशिश नहीं की गई। साथ ही इस आरोप पर चिंता व्यक्त की कि इसके बजाय परिवार के सदस्यों को परेशान किया जा रहा था। न्यायालय ने पुलिस के इस रवैये को “अवमाननापूर्ण” और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप बताया।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि पीड़िता के एक रिश्तेदार को, जो आरोपी नहीं था। उसको पुलिस स्टेशन क्यों बुलाया गया और कथित तौर पर उसके साथ मारपीट क्यों की गई। अदालत ने चेतावनी दी कि याचिकाकर्ता के परिवार को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचने पर बोकारो के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। इसके बाद अदालत ने झारखंड के डीजीपी तदाशा मिश्रा को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

इन घटनाक्रमों के बीच, डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस की एक नई टीम ने जांच फिर से शुरू की। बोकारो एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार, मुख्य आरोपी दिनेश महतो के आचरण से संदेह पैदा हुआ और उसे हिरासत में ले लिया गया। पीड़िता के परिवार ने लड़की के साथ कथित पूर्व संबंध के कारण उसका नाम लिया था।

सिंह ने कहा कि पूछताछ के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि लड़की की हत्या उसी दिन कर दी गई थी, जिस दिन वह पिछले साल जुलाई में लापता हुई थी। उसके खुलासे के आधार पर, हमने स्थानीय कॉलेज के पीछे एक वन क्षेत्र से कंकाल के अवशेष, कपड़े, बाल और संदिग्ध हत्या का हथियार बरामद किया।

एसपी ने कहा कि हालांकि आरोपियों से पहले पूछताछ की गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस सत्यापन नहीं हुआ था। जिसके बाद मामले की कई बार समीक्षा करने के बावजूद, हाल ही में नए सुराग सामने आने तक कोई सफलता हासिल नहीं हुई थी।

उन्होंने कहा कि हमने स्थानीय पुलिस स्टेशन में तैनात सभी कर्मियों को निलंबित कर दिया है। जहां कुल 28 पुलिसकर्मी थे। जिनमें कांस्टेबल से लेकर प्रभारी अधिकारी तक शामिल हैं। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि जांच में पता चला कि पिछली जांच में निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया, जिससे मामला कमजोर हुआ और आरोपियों को लाभ पहुंचाने के प्रयासों का संदेह पैदा हुआ।

‘हमारे जीवन का कोई मूल्य नहीं है’

पीड़िता के परिवार के लिए, बरामदगी ने राहत के साथ-साथ आक्रोश भी पैदा किया है। मृत लड़की की मां ने बताया कि आरोपी को पहले भी पकड़ा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इसीलिए हमें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा।

आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी बेटी बिल्कुल निर्दोष थी और इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी। वह सिर्फ 18 साल की थी। इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ने की हमारी कोई उम्मीद नहीं है। हम इसका एक बहुत छोटा हिस्सा हैं। हालांकि, हम लड़ते रहेंगे और हार नहीं मानेंगे। हमने अब इस व्यवस्था और ताकतवर लोगों की सच्चाई देख ली है। उनके लिए हमारी जिंदगी की कोई कीमत नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनके परिवार को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी को ढूंढने के बजाय, वे हमें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? हमारे रिश्तेदारों को एक-एक करके उठाया गया और धमकाया गया। उन्होंने आगे कहा कि अब परिवार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करेगा।

हाई कोर्ट ने भी इन बिंदुओं को उठाया। जिसमें पीड़ित के रिश्तेदारों से जबरदस्ती, धमकियों और झूठे बयान निकलवाने के प्रयासों के उदाहरणों का उल्लेख किया गया था। इसमें उन आरोपों का भी संज्ञान लिया गया कि पुलिस रिश्तेदारों पर उनके द्वारा बताए गए बयान देने के लिए दबाव डाल रही थी और यदि वे बात नहीं मानते तो “झूठी एफआईआर दर्ज कराने” की धमकी दे रही थी। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होनी है।

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