Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश द्वारा पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearances) दिए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सवाल करते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने वनशक्ति रिव्यू जजमेंट फैसले में पूर्वव्यापी कार्यकारी आदेशों पर केंद्र के ऑफिस मेमोरेंडम को मंजूरी दे दी है, तो रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सवाल करते हुए कहा, “यह याचिका किसलिए दायर की गई है? आप भली-भांति जानते हैं कि तीन न्यायाधीशों की पीठ इस पर अपना मत दे चुकी है।”
पिछले साल नवंबर के महीने में न्यायालय की तीन जजों की बेंच ने मई 2025 में दिए गए उस पूर्व निर्णय को रद्द कर दिया था जिसमें केंद्र सरकार को पूर्वव्यापी कार्यकारी अधिसूचनाएं जारी करने से रोक दिया गया था। वकील ने उत्तर दिया कि याचिका 2017 और 2021 के कार्यकारी अधिसूचनाओं को चुनौती दे रही है।
अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका कैसे स्वीकार्य है- सुप्रीम कोर्ट
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने पूछा कि न्यायालय के किसी फैसले के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका कैसे स्वीकार्य है। वकील ने उत्तर दिया कि याचिकाकर्ता जनवरी 2026 में जारी ऑफिस मेमोरेंडम को भी चुनौती दे रहा है। जब पीठ ने पूछा कि जनवरी 2026 का ऑफिस मेमोरेंडम क्यों जारी किया गया था, तो वकील ने उत्तर दिया कि यह वनशक्ति मामले में समीक्षा निर्णय को लागू करने के लिए था।
भारी जुर्माने के लिए तैयार रहें- सीजेआई सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील से पूछा, “यह रिट याचिका सुनवाई योग्य कैसे है? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में अधिसूचना जारी की है। इसे चुनौती देकर आप अप्रत्यक्ष रूप से फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। यह कैसे संभव है।” याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वे पूर्वव्यापी ईसी की प्रथा को रोकने के लिए कोर्ट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन पीठ ने फिर सवाल उठाया कि किसी फैसले को रिट याचिका में कैसे चुनौती दी जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी देते हुए कहा, “क्या आपने इसे मीडिया में प्रचार के लिए दायर किया है? भारी जुर्माने के लिए तैयार रहें।” इसके बाद वकील ने नवंबर के फैसले की समीक्षा करने की स्वतंत्रता के साथ रिट याचिका वापस लेने का विकल्प चुना। पूजा-अर्चना को लेकर विवाद: दरगाह कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, जानें पूरा मामला
