उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में भानियावाला गांव में दफनाने के अधिकार और कब्रिस्तान तक पहुंच की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि दफनाने की जगह को लेकर दो समुदायों के बीच का यह विवाद जनहित याचिका के तहत नहीं आता। ऐसे मामलों को आमतौर पर सिविल अदालत में सुलझाया जाना चाहिए।
जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता ने यह भी माना कि मामला दो समुदायों- देवबंदी और बरेलवी के बीच का आपसी विवाद है। आरोप था कि देवबंदी समुदाय के लोग बरेलवी समुदाय को कब्रिस्तान इस्तेमाल करने से रोक रहे हैं। इस वजह से कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस तरह के विवाद का समाधान सही कानूनी प्रक्रिया (दीवानी मुकदमे) के जरिए किया जाना चाहिए।
22 अप्रैल के आदेश में अदालत ने कहा कि एक मुस्लिम समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के खिलाफ दफनाने के अधिकार को लेकर किया गया दावा जनहित याचिका के तहत नहीं सुना जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता और उस समुदाय के लोग अपने अधिकार साबित करने के लिए दीवानी अदालत में मामला दर्ज कर सकते हैं या कानून के अन्य सही तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अदालत ने फैसला सुनाया कि विभिन्न मुस्लिम समुदायों के सदस्यों के बीच दफन अधिकारों को लेकर विवाद को जनहित याचिका के रूप में नहीं माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और बरेलवी समुदाय उचित दीवानी कार्यवाही या किसी अन्य उपयुक्त कानूनी तरीके से दफनाने के अधिकार का दावा करने के लिए स्वतंत्र हैं।
यह जनहित याचिका मोहम्मद शहजाद द्वारा दायर की गई थी। जिसमें बरेलवी मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के लिए भानियावाला गांव के एक कब्रिस्तान में दफनाने के अधिकार की मांग की गई थी। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि देवबंदी समुदाय के सदस्य कब्रिस्तान का उपयोग कर रहे थे और बरेलवी समुदाय के सदस्यों को कब्रिस्तान का उपयोग दफनाने के लिए करने की अनुमति देने से इनकार कर रहे थे।
शहजाद का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता पीयूष गर्ग ने तर्क दिया कि देवबंदी समुदाय बरेलवी समुदाय को कब्रिस्तान का उपयोग करने की अनुमति नहीं दे रहा है, जबकि गांव में बरेलवी समुदाय की आबादी देवबंदी समुदाय की तुलना में ज्यादा है।
दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली पुलिस को एक बार फिर से झटका लगा है। क्योंकि हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों मामले में कांग्रेस पार्षद इशरत जहां को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। पढ़ें पूरी खबर।
