दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव द्वारा दायर व्यक्तित्व अधिकार संरक्षण याचिका पर सुनवाई टाल दी है। बाबा रामदेव ने अपने पर्सनालिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) से जुड़ी एक याचिका दायर की थी। अब मंगलवार (17 फरवरी 2026) को सोशल मीडिया कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि बाबा रामदेव की याचिका में पैरोडी, व्यंग्य, राजनीतिक टिप्पणियों, खबरों और फैक्ट-चेक पोस्ट हटाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तरफ से पेश हुए वकीलों ने कहा कि इस तरह के आदेश जारी करने से नागरिकों के ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के अधिकार का हनन होगा। जिस कॉन्टेन्ट को हटाने की मांग की गई है, उनमें रामदेव के हाथी पर सवारी करते हुए वीडियो, एक एलोपैथिक डॉक्टर के सामने इलाज के लिए लेटे हुए दिखाने वाली पोस्ट और पेट्रोल की कीमतों का जिक्र करने वाला कॉन्टेन्ट शामिल है। सोशल मीडिया कंपनियों ने कहा कि इस तरह की अभिव्यक्तियां कानून के तहत संरक्षित हैं।

Meta और X की आपत्तियां

‘एक्स’ (X) की ओर से पेश वकील ने कहा कि रामदेव ने X प्लेटफॉर्म पर 16 यूआरएल का हवाला दिया है जिनमें से 14 पहले ही हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन यूजर्स को रामदेव ने फ्लैग किया है, उनमें एक ऐसा यूजर भी शामिल है जिसने अपना नाम बदलकर ‘Karl Marx’ कर लिया है।

वकील ने व्यंग्य भरे अंदाज में कहा, “जब तक कार्ल मार्क्स खुद व्यक्तित्व अधिकारों के लिए याचिका दाखिल नहीं करते, मुझे लगता है कि वादी (रामदेव) संतुष्ट हैं।”

वहीं मेटा की पेश से अधिवक्ता वरुण पाठक पेश हुए और उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक (गंभीर रूप से गलत) कॉन्टेन्ट को हटाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन व्यक्तित्व अधिकारों के तहत न्यूज़ रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगाई जा सकती। पाठक ने आगे कहा, “आपत्तिजनक सामग्री हटाने में हमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन अगर कोई न्यूज़ चैनल वादी (बाबा रामदेव) के खिलाफ गलत रिपोर्टिंग करता है तो क्या इससे उसे व्यक्तित्व अधिकार का दावा मिल जाता है?”

जस्टिस ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि याचिका में डायनेमिक इंजंक्शन की कोई मांग नहीं की गई है और अदालत भी इस पर विचार नहीं कर रही है। रामदेव की तरफ से अदालत में एडवोकेट राजीव नायर पेश हुए और उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों की तरफ से रखी गई दलीलों की खिलाफत की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है लेकिन इस मामले में मध्यस्थ कंपनियां मानहानिकारक और अपमानजनक सामग्री हटाने पर आपत्ति जता रही हैं।

कुछ समय तक सुनवाई करने के बाद जस्टिस सिंह ने कहा कि सामग्री हटाने के मुद्दे पर रामदेव के वकील और सोशल मीडिया मध्यस्थों के बीच मतभेद है। इसलिए अदालत ने रामदेव को निर्देश दिया कि वे हटाए जाने वाले कॉन्टेन्ट की लिस्ट दें और सोशल मीडिया कंपनियां उस पर अपनी आपत्तियां दाखिल करें। मैं इन सभी को देखूंगी और फिर फैसला लूंगी।’

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि बाबा रामदेव ने अपनी आवाज, छवि, व्यक्तित्व, बोलने की एक विशेष शैली और उनसे खास तौर पर जुड़ी अन्य पहचान की सुरक्षा के लिए व्यक्तित्व अधिकार संबंधी मुकदमा दायर किया है।

उन्होंने ‘रामदेव’, ‘स्वामी रामदेव’, ‘बाबा रामदेव’, ‘योग गुरु रामदेव’, ‘योग गुरु स्वामी रामदेव’ समेत अपने नाम के अन्य संक्षिप्त रूपों, उपनामों या उपाधियों के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि उनके नाम, व्यक्तित्व और छवि को असाधारण प्रतिष्ठा और विश्वास हासिल है। कई संस्थाएं डीपफेक, फॉल्स एंडोर्समें) और बिना अनुमति व्यावसायिक संबद्धताओं के जरिए गलत इस्तेमाल कर रही हैं।