दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और कई अन्य पूर्व आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक आवेदन दायर (Recusal Application) किया है। आवेदन में कहा गया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग ( Recusal) कर लें। अरविंद केजरीवाल मंगलवार को पेश होकर खुद बहस करेंगे।
आम आदमी पार्टी की कानूनी टीम के अनुसार, अरविंद केजरीवाल के मंगलवार को अदालत में पेश होने और स्वयं अपने तर्क प्रस्तुत करने की उम्मीद है। दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका से संबंधित कार्यवाही में केजरीवाल और सिसोदिया को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह से अधिक का अतिरिक्त समय दिया गया है। हाई कोर्ट ने उन्हें 22 अप्रैल, 2026 तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।
ईडी की याचिका में सीबीआई-ईडी विशेष अदालत द्वारा जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है जिन्हें उसने “अनावश्यक” बताया है। अपने आवेदन में ईडी ने तर्क दिया कि निचली अदालत की टिप्पणियां सीबीआई मामले से अप्रासंगिक थीं और एजेंसी की बात सुने बिना की गई थीं। ईडी ने आगे कहा कि ये टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं और इससे उसकी विश्वसनीयता को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
हाई कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि नोटिस का जवाब न देने पर प्रतिवादियों के अधिकारों में कटौती की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित है।
इससे पहले, सीबीआई-ईडी की विशेष अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को बरी कर दिया था। इस फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसके अलावा, केजरीवाल और सिसोदिया ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ से मामले को किसी अन्य न्यायालय में ट्रांसफर करने की मांग की थी।
रिक्यूजल एप्लिकेशन (Recusal Application) क्या है?
रिक्यूजल एप्लिकेशन उस आवेदन को कहते हैं कि जब किसी मामले को लेकर जज से अनुरोध किया जाता है कि वह किसी केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लें। ऐसा तब होता है, जह किसी पक्ष को लगता है कि जज निष्पक्ष सुनवाई नहीं करेंगे या कर पाएंगे या जज का मामले से कोई व्यक्तिगत, पेशेवर या पहले का जुड़ाव है या किसी कारण से पक्षपात की आशंका है। तब वे अदालत में Recusal Application दाखिल करते हैं।
‘देश की संस्थाओं का कमजोर होना संविधान के लिए खतरा’, बोलीं सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने शनिवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल लेक्चर में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर बात की। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव कराने वाले लोग उन्हीं लोगों पर निर्भर होने लगें जो चुनाव लड़ते हैं, तो ऐसी स्थिति में चुनाव निष्पक्ष नहीं रह पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर।
