दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने बहस करते हुए अरविंद केजरीवाल के अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग को हटाया जाए।
Bar & Bench की एक रिपोर्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के एक अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिना अनुमति रिकॉर्डिंग की इजाजत नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट के ऑनलाइन सुनवाई से संबंधित नियम है कि अदालत की कार्यवाही के वीडियो को रिकॉर्ड करके पब्लिश नहीं किया जा सकता।
अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों ने इस तरह के वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ऑनलाइन पोस्ट किया है, उनके खिलाफ ‘सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर’ कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी इस तरह के मामलों में कदम उठा चुका है। अरविंद केजरीवाल का वीडियो भी उन वीडियो में शामिल है जिनका हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अधिकारी ने कहा, ”हमने जरूरी कदम उठाए हैं। केजरीवाल का वीडियो उनमें से एक है। पहले भी हमने इस तरह की कार्रवाई की है और हमारे संज्ञान में ऐसे जो भी मामले आते हैं, हम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस बारे में एक्शन लेने के लिए कहते हैं।”
केजरीवाल ने रखीं 10 दलीलें
केजरीवाल 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट में खुद पेश हुए थे और उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने के लिए दी गई अपनी एप्लिकेशन पर जिरह की थी। केजरीवाल ने करीब 1 घंटे तक अपनी दलीलें रखीं और सुनवाई खत्म होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर आप प्रमुख की जिरह करती हुईं कई वीडियो वायरल हो गईं।
केजरीवाल के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए केजरीवाल की एप्लिकेशन के खिलाफ तर्क रखे।
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग करने की अपनी याचिका को मजबूत करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में एक नया हलफनामा दायर किया है। इस मामले में केजरीवाल खुद आरोपी हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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आबकारी नीति मामला साल 2022 में सामने आया जब सीबीआई ने एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इसमें आरोप लगाया गया कि दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 में हेरफेर कर शराब कारोबार में एकाधिकार (मोनोपोलाइजेशन) और कार्टेलाइजेशन को बढ़ावा दिया गया।
CBI का यह मामला 20 जुलाई 2022 को वी.के. सक्सेना की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेताओं को नीति में कथित हेरफेर के चलते शराब निर्माताओं से किकबैक (रिश्वत) प्राप्त हुई।
अक्टूबर 2023: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब नीति मामले में तत्कालीन दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पहला समन जारी किया।
2 नवंबर 2023: केजरीवाल ने ईडी के पहले समन को नजरअंदाज किया और मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक राजनीतिक रैली में हिस्सा लिया।
दिसंबर 2023: अरविंद केजरीवाल ने ईडी के दूसरे समन पर भी पेशी नहीं दी और उसे ‘अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ करार दिया।
जनवरी 2024: अरविद केजरीवाल ने ईडी के तीसरे समन पर भी पेश नहीं हुए और आरोप लगाया कि यह केंद्र सरकार की साजिश का हिस्सा है।
18 जनवरी 2024: ईडी ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश देते हुए चौथा समन जारी किया।
2 फरवरी 2024: अरविंद केजरीवाल ने ईडी के पांचवें और बाद में जारी छठे समन पर भी पेशी नहीं दी। इस दौरान उनकी कानूनी टीम ने समन की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनन चुनौती देने की बात कही।
16 मार्च 2024: एक सेशन कोर्ट ने समन का पालन ना करने को लेकर ईडी द्वारा दायर दो शिकायतों में अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी।
21 मार्च 2024: अरविंद केजरीवाल ने ईडी के समनों को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन अदालत ने उन्हें किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने से इनकार कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
