उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। यह मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में दर्ज है।
गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही में लगातार अनुपस्थित रहने और कथित तौर पर फरार रहने के मामले में चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश भी दिया है।
यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 305 के तहत दर्ज किया गया था।
2018 में मारपीट से जुड़ा मामला
चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। आजाद के खिलाफ दर्ज केसों में ज्यादातर पश्चिमी यूपी में हुए अपराध से संबंधित हैं। जिस केस में कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती धारा में गिरफ्तारी का आदेश दिया है। वह 2018 में साहिबाबाद इलाके में एक युवक से मारपीट से जुड़ा है।

चंद्रशेखर आजाद ने 8 साल पहले शादी समारोह में एक युवक को थप्पड़ मारा था। इसके बाद बार-बार समन मिलने के बाद एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। चंद्रशेखर गुरुवार को भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है।
पीड़ित के वकील भजनलाल गौतम ने केस के बारे में मीडिया को बताया कि गाजियाबाद के नूरपुर गांव के रहने वाले मेरे मुवक्किल धर्मेंद्र साल 2018 में साहिबाबाद स्थित वृंदावन गार्डन में एक शादी समारोह में गए थे। चंद्रशेखर भी अपने समर्थकों के साथ इसमें शामिल होने आए थे। चंद्रशेखर के साथ हथियारबंद लोग देखकर मेरे मुवक्किल ने पूछा कि इतने हथियार लेकर क्यों लाए हैं?
इसके जवाब में चंद्रशेखर आजाद ने कहा था दिखाई नहीं दे रहा है कि राइफल हैं। इसके बाद चंद्रशेखर, उनके साथी गुलजार सिद्दीकी और पंकज जाटव समेत करीब 15 लोगों ने धर्मेंद्र से मारपीट की थी। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
चंद्रशेखर आजाद ने यूपी पुलिस पर उठाए सवाल
वहीं, एक अन्य मामले में बुलंदशहर में घर में घुसकर छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे बेहतर होगा कि यूपी पुलिस को ही भंग कर दिया जाए। कोर्ट की इस टिप्पणी पर आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा सोचिए एससी एसटी एक्ट मामलों में पुलिस कैसे काम करती होगी।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए यूपी पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा- बुलंदशहर ज़िले में छेड़छाड़ के एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी इतनी ज़्यादा थी कि कोर्ट ने कार्यवाही के दौरान यह तक कह दिया, “क्या हमें उत्तर प्रदेश पुलिस को पूरी तरह से भंग कर देना चाहिए?” जब आरोपी को घटना स्थल पर ही रंगे हाथों पकड़ा गया था, तो FIR में उसे ‘अज्ञात’ क्यों बताया गया? सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की जांच और उनके रवैये पर गंभीर सवाल उठाए।
चंद्रशेखर ने आगे कहा कि ज़रा सोचिए, जब यही पुलिस SC-ST एक्ट के तहत मामलों की जांच करती है, तो पीड़ितों का क्या हाल होता होगा? खराब जांच, सबूत इकट्ठा करने में लापरवाही और कमज़ोर पैरवी का फ़ायदा आरोपी को मिलता है, जबकि पीड़ित न्याय की तलाश में भटकते रहते हैं। ऐसी लापरवाही उन लोगों को भी बाद में मौका देती है जो इन मामलों को ‘झूठा’ बताकर खारिज कर देते हैं।
मायावती ने पहली बार सीधे तौर पर किया चंद्रशेखर का जिक्र, BJP का नाम लेकर लगाया ये आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट पर बीजेपी ने ईवीएम में धांधली की साजिश रचकर आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी को जिताने में मदद की। बसपा प्रमुख के अनुसार, यह पूरा कदम बसपा के कैडर वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने और दलित राजनीति को कमजोर करने के उद्देश्य से उठाया गया था। पढ़ें पूरी खबर।
