दिल्ली सरकार की लक्ष्मी योजना को डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसमें दिल्ली की पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया गया था। लेकिन योजना के लॉन्च होने के कुछ ही हफ़्तों बाद स्कीम से जुड़ी एक शर्त ने इसे दिल्ली हाई कोर्ट के सवालों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। योजना के तहत किसी महिला को लाभार्थी बनने के लिए उसे अपने लोकल सांसद या विधायक से मंजूरी लेना होगा।

एक हफ़्ते से भी कम समय में दूसरी बार दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार पर यह बताने के लिए दबाव डाला कि किसी वेलफेयर स्कीम तक एक्सेस के लिए चुने हुए प्रतिनिधि का समर्थन क्यों जरूरी होना चाहिए। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा, “मान लीजिए आप किसी सांसद या विधायक को नहीं जानते? अगर एक भी व्यक्ति शर्त की वजह से छूट जाता है, तो यह स्कीम मनमानी है।” कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इस नियम के ज़रिए वह क्या मकसद हासिल करना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि लोगों की पहचान करने के हज़ारों तरीके हैं।

हाई कोर्ट ने सरकार से वजह बताने को कहा?

कोर्ट ने 19 अगस्त को सरकार से वजह बताने को कहा था, लेकिन उम्मीद थी कि वह सोमवार को इसका कारण बताएगी। इसके बजाय बेंच ने उसे 10 दिनों के अंदर एक छोटा हलफनामा फाइल करने का निर्देश दिया, जिसमें बताया गया हो कि इस क्लॉज को जोड़कर वे क्या मकसद हासिल करना चाहते हैं। सरकार को अब अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। सरकार ने कहा कि वह इस क्लॉज के लिए अपनी वजह कोर्ट के सामने रखेगी, जिसमें दिल्ली सरकार की कैबिनेट की वजह और दूसरे राज्यों में अपनाई जाने वाली प्रैक्टिस शामिल हैं।

ASG चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया, “कोर्ट हमसे सहमत नहीं हो सकता है, लेकिन हमें यह कहने का हक है कि कैबिनेट ने इसे कैसे देखा है और दूसरे राज्यों में क्या स्थिति है। कुछ ऐसा है जिसे हम रिकॉर्ड में रखना चाहते हैं, हम वह करेंगे।”

कांग्रेस पार्षद ने दायर की थी याचिका

हाई कोर्ट कांग्रेस के पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त और आया नगर वार्ड के मौजूदा कांग्रेस पार्षद वेदपाल चौधरी की ओर से फाइल की गई एक PIL पर विचार कर रही थी। याचिका में उस शर्त को हटाने की मांग की गई थी जिसके तहत संभावित लाभार्थी को किसी सांसद या विधायक से मंजूरी लेनी होती है।

1 अगस्त को शुरू हुई लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि इस योजना के तहत पात्र माने जाने के लिए, एक शर्त यह है कि आवेदन को प्रोसेस करने के लिए लोकल सांसद या विधायक से मंज़ूरी जरूरी है।

क्या है पात्रता?

पात्रता के लिए दूसरी शर्तों में दिल्ली में दस साल तक लगातार रहना या डोमिसाइल होना ज़रूरी है। साथ ही जिन महिलाओं के तीन से ज़्यादा बच्चे ज़िंदा हैं, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही क्रिमिनल रिकॉर्ड के आधार पर डिसक्वालिफ़ाई किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कच्ची कॉलोनियों में रहने वाली महिलाओं के लिए, ऐसे ऑफिस अक्सर काफ़ी दूर होते हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ठीक से जुड़े नहीं होते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है, “इसलिए इस जरूरत में बार-बार समय और पैसा खर्च होता है। घर और रोज़ी-रोटी की ज़िम्मेदारियों में रुकावट आती है और उन महिलाओं के लिए काफ़ी शारीरिक और लॉजिस्टिक मुश्किलें होती हैं, जो इस स्कीम के मकसद से इसके सबसे कमज़ोर लाभार्थियों में से हैं।”

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 मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के लिए तीन बच्चों की सीमा का बचाव करते हुए कहा कि महिलाएं केवल बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं हैं। विधानसभा को संबोधित करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “अगर लोग अपना परिवार बढ़ाना चाहते हैं, तो वे रेखा गुप्ता या (आरएसएस प्रमुख) मोहन भगवत के कहने पर रुकने वाले नहीं हैं। परिवार अपनी परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार योजना बनाते हैं। लेकिन कोई भी महिला सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं है। उसका स्वास्थ्य हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”