Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाने वाले कैदियों को फांसी देने के बजाय कोई दूसरा तरीका अपनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में कहा गया था कि फांसी देना सजा-ए-मौत देने का एक दर्दनाक तरीका है।
हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अगर केंद्र सरकार मौत की सजा के तरीके की व्यापक समीक्षा करना चाहती है और इसके लिए कोई वैकल्पिक तरीका खोजना चाहती है, तो यह फैसला उसके रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, “हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि दीना मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को सीआरपीसी की धारा 354/बीएनएसएस की धारा 393(5) (फांसी द्वारा मृत्युदंड से संबंधित प्रावधान) की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार के लिए एक बड़ी पीठ को भेजने का कोई मामला बनता है।”
भविष्य में संवैधानिक समीक्षा का रास्ता खुला- सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने कहा, “आगे बढ़ने से पहले, हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि इस रिट याचिका को खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में संवैधानिक समीक्षा का रास्ता बंद हो गया है। अगर ऐसे ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या अनुभव-आधारित सबूत सामने आते हैं जिनसे यह साबित हो कि ‘दीना’ मामले में फैसले का जो तथ्यात्मक और वैज्ञानिक आधार था, वह बाद की घटनाओं के कारण काफी हद तक बदल गया है, तो समीक्षा हो सकती है।”
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के संविधान की व्याख्या एक गतिशील प्रक्रिया है और इसे संवैधानिक सिद्धांतों के विकास और वैज्ञानिक ज्ञान में हुई प्रगति, दोनों के प्रति संवेदनशील बने रहना चाहिए।
कोर्ट ने कहा, “हम यह भी मानते हैं कि इस फैसले में कही गई किसी भी बात से केंद्र सरकार को रोका नहीं जाएगा, अगर वह उचित समझे, तो मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके की व्यापक समीक्षा कर सकती है। इसके लिए वह कानून, फोरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोसाइंस, क्रिमिनोलॉजी और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक समिति बना सकती है।”
किसने दायर की थी याचिका?
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा की ओर से जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें मौत की सजा पाए कैदी को फांसी देकर मारने की मौजूदा प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की गई थी, क्योंकि इसमें लंबे समय तक दर्द और तकलीफ होती है। इसमें गुजारिश की गई थी कि सजा देने के तरीके को बदलकर गोली मारने, बिजली का झटका देने या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाया जाए, जिनसे कैदी की मौत कुछ ही मिनटों में हो सके।
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