इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके में ग्राम सभा की जमीन पर बनी कथित मस्जिद से जुड़े मामले में दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए 36 हजार रुपये के जुर्माने को रद्द करते हुए थोड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने शाहबान और अन्य की याचिका पर 25 मार्च को यह फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ताओं ने जिला प्रशासन द्वारा जारी बेदखली आदेश और जुर्माने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहे कि विवादित भूमि पर उनका कोई अधिकार, स्वामित्व या हित है। रिकॉर्ड के अनुसार, यह भूमि ‘खलिहान’ के रूप में दर्ज है, जो ग्राम सभा की संपत्ति है।

नियमों का पालन हुआ: कोर्ट

अदालत ने पाया कि राजस्व अधिकारियों द्वारा मामले में उचित जांच की गई थी और अतिक्रमण से संबंधित सभी आवश्यक विवरण नोटिस में दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं को जवाब देने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। ऐसे में तहसीलदार द्वारा बेदखली का आदेश पारित किया गया, जिसे नियम 66 और 67 (यूपी राजस्व संहिता) के तहत सही माना गया।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को मस्जिद के निर्माण या कब्जे से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इसलिए 36 हजार रुपये का जुर्माना टिक नहीं सकता और इसे रद्द कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

लखनऊ प्रशासन ने ग्राम सभा की जमीन पर मस्जिद बनाए जाने के आरोप में कार्रवाई शुरू की थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि मस्जिद करीब 60 साल पुरानी है और उन्होंने इसका निर्माण नहीं किया है। तहसीलदार ने आपत्तियां खारिज करते हुए कहा कि जमीन ग्राम सभा की है और याचिकाकर्ताओं का उस पर कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद बेदखली और जुर्माने का आदेश जारी किया गया।

बाद में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) ने भी तहसीलदार के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बेदखली आदेश को बरकरार रखा, लेकिन जुर्माने को निरस्त कर दिया।

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