इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में बस्ती के पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह को आपराधिक अवमानना को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। क्योंकि सिंह ने एक जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया था, जिसने एक एसीजेएम कोर्ट से आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने टिप्पणी की कि एसपी का निलंबन आदेश प्रथम दृष्टया बस्ती के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय की अवमानना ​​है। मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी के आवेदन के आधार पर मूल रूप से वारंट जारी किया था।

बता दें, रत्नेश कुमार उर्फ ​​राजू शुक्ला द्वारा एक आपराधिक रिट याचिका दायर की गई थी। 11 दिसंबर, 2025 को हाई कोर्ट को सूचित किया गया कि मामले के जांच अधिकारी को एसपी द्वारा उस समय निलंबित कर दिया गया था जब उन्होंने अभियुक्तों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एनबीडब्ल्यू की मांग की थी।

इसके बाद हाई कोर्ट ने एसपी को एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि हलफनामा में उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाए जिनके तहत उन्होंने जांच अधिकारी को निलंबित किया था, और यह भी स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान में मामले की जांच कौन कर रहा है।

2 अप्रैल को अदालत ने एसपी द्वारा दायर व्यक्तिगत हलफनामे को पूरी तरह से असंतोषजनक पाया। याचिकाकर्ता की ओर से दायर एक पूरक हलफनामे से पता चला कि जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था, यह कहते हुए कि उसने सबूत जुटाए बिना गैर-जमानती वारंट प्राप्त कर लिया था।

हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक के तर्क पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने स्पष्ट किया कि गैर-जमानती वारंट न्यायालय द्वारा मामले की डायरी का अध्ययन करने के बाद जारी किया जाता है, न कि जांच अधिकारी के मात्र निराधार कथन या निराधार दावे के आधार पर। पीठ ने टिप्पणी की, “वारंट जारी करना न्यायालय का विवेक है, न कि पुलिस अधीक्षक की राय।”

इसके बाद हाई कोर्ट ने एसपी को एक सप्ताह के भीतर एक और व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अधिकारी से यह स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि उन्होंने यह टिप्पणी क्यों की कि ” जांच अधिकारी ने सबूत जुटाए बिना गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया, जबकि वारंट न्यायालय द्वारा अपने विवेक के अनुसार जारी किया गया था”।

न्यायालय ने आगे कहा कि यदि एसपी द्वारा जांच अधिकारी को निलंबित करने के आधार के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, तो न्यायालय उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।

जज पर जज के घर से गहने चुराने का आरोप, कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका

पंजाब के पटियाला जिले की एक कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बिक्रमदीप सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। बिक्रमदीप सिंह पर चोरी और घर में जबरन घुसने का आरोप है। पढ़ें पूरी खबर।