इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एफआईआर में हिंदी फिल्म के डायलॉग के लिए पुलिस को फटकार लगाई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में दर्ज एफआईआर में पुलिस द्वारा बार-बार एक ही पैटर्न का इस्तेमाल करने पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने एफआईआर को बेतुका और जमीनी हकीकत से मेल न खाने वाला बताया।
हाई कोर्ट ने बहराइच जिले में दर्ज की गई उन एफआईआर में से एक का हवाला दिया गया है जो एक कथित पुलिस मुठभेड़ के बाद गोहत्या में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के बाद दर्ज की गई थी। इसमें हिंदी फिल्मों में लोकप्रिय रूप से इस्तेमाल होने वाले संवादों का उल्लेख है जैसे ‘तुम लोग पुलिस से घिरे हो।’ एफआईआर में मुठभेड़ के दौरान हुई एक कथित बातचीत का भी जिक्र है जिसमें आरोपी कहता है ‘उजाला होने वाला है (भोर होने वाली है)’ जबकि एफआईआर में मुठभेड़ का समय सुबह 10.45 बजे बताया गया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अधिकारियों के इशारे पर कानून के दुरुपयोग की ओर किया इशारा
एफआईआर में स्पष्ट विसंगति और अधिकारियों के इशारे पर कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए, न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने 16 फरवरी के अपने आदेश में कहा, “अब समय आ गया है कि अदालतें हस्तक्षेप करें और अधिकारियों द्वारा दर्ज की जा रही मनगढ़ंत और बढ़ा चढ़ा कर लिखी गईं एफआईआर पर रोक लगाएं, जिसका यह मामला एक स्पष्ट उदाहरण है।”
पीठ ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और ऐसा करने में विफल रहने पर अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत बहराइच मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक अकबर अली द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने राहत की मांग की थी। जरवाल रोड पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 325, 109(1) और यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत अपराधों के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
FIR में फिल्मी डायलॉग का इस्तेमाल
अपने आदेश में, अदालत ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने का समय दोपहर 2.24 बजे बताया गया है और पुलिस टीम द्वारा कथित तौर पर आरोपी का सामना करने का समय उसी दिन सुबह 10.45 बजे बताया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि एक मुखबिर ने टीम को कथित तौर पर गाय की हत्या के बारे में सूचना दी थी और बताया था कि इसमें शामिल लोग मांस को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया में थे।
अदालत ने गौर किया कि एफआईआर के अनुसार, जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो उन्होंने कुछ आवाजें सुनीं जिनमें कहा जा रहा था, “उजाला होने वाला है।” अदालत ने एफआईआर का हवाला देते हुए कहा, “पुलिस दल ने कथित तौर पर चिल्लाकर कहा,’तुम पुलिस से घिरे हो,आत्मसमर्पण कर दो ।’
अदालत ने पुलिस को दिया यह निर्देश
अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की, “हम यह क्यों कह रहे हैं कि पूरी एफआईआर किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, इसका कारण यह है कि एफआईआर 22.01.2026 को दोपहर 2:24 बजे दर्ज की गई थी जबकि घटना उसी दिन सुबह 10:45 बजे की बताई जा रही है। एफआईआर में यह भी लिखा है कि गिरफ्तार किए गए लोग कह रहे हैं कि उजाला होने वाला है। ऐसे में यह समझ से परे है कि सुबह 10:45 बजे तक भोर क्यों नहीं हुई?” हाईकोर्ट ने आगे कहा, “एफआईआर में यह स्पष्ट विसंगति अधिकारियों के इशारे पर कानून के घोर दुरुपयोग को दर्शाती है, जिससे एफआईआर को रद्द किया जा सकता है।”
इसके बाद पीठ ने फिल्मी संवादों के प्रयोग की ओर इशारा किया। पीठ ने टिप्पणी की, “हम यह भी ध्यान दे सकते हैं कि एफआईआर में फिल्मों का एक लोकप्रिय संवाद प्रयुक्त किया गया है, जैसे तुम लोग पुलिस से घिरे हो, आत्मसमर्पण कर दो।” मामले को गंभीरता से लेते हुए पीठ ने टिप्पणी की, “इस अदालत ने बार-बार यह बताया है कि एफआईआर में इस्तेमाल की गई भाषा जमीनी हकीकत को प्रतिबिंबित नहीं करती बल्कि सुनी-सुनाई बातों पर आधारित, मनगढ़ंत और फिल्मी स्क्रिप्ट से काफी हद तक उधार ली गई प्रतीत होती है।”
न्यायालय ने निर्देश दिया, “एफआईआर में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत और प्रथम दृष्टया बेतुके हैं जैसा कि ऊपर विस्तार से बताया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए, न्यायालय जिला बहराइच के पुलिस अधीक्षक को एफआईआर के संक्षिप्त अध्ययन से स्पष्ट होने वाली उपरोक्त विसंगतियों का जवाब देते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देता है। यह हलफनामा दो सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए।”
नहीं बदल सकते सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम, हाई कोर्ट में DMRC ने दी यह दलील
यह भी पढ़ें: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनबोर्ड को देवनागरी लिपि में ‘सर्वोच न्यायालय’ में बदलने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
