इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट के पास स्थित लगभग वकीलों के 72 अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने वकीलों को यह चेतावनी भी दी कि यदि वे लखनऊ नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने में बाधा डालते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि विध्वंस की कार्रवाई रविवार को की जानी चाहिए ताकि न्यायिक कार्य में कोई बाधा या व्यवधान न आए। पीठ ने कहा कि अतिक्रमण की तारीख उन अतिक्रमणकारियों को बता दी जाए ताकि वे इस अभियान में सहयोग कर सकें। यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि अतिक्रमण की तारीख को कोई अतिक्रमणकारी या उनके सहयोगी किसी अवैध उपकरण का प्रयोग करते हैं या किसी अवैध गतिविधि में शामिल होते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध चैंबरों से काम कर रहे वकीलों को पहले उन्हें खाली करने या कब्जे का वैध दावा करने का एक और अवसर दिया जा सकता है। अदालत ने सभी 72 अतिक्रमणकारियों को एक सप्ताह के भीतर लिखित में नया नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
मई में भी गिराए गए थे वकीलों के अवैध चैंबर
मई में लखनऊ के कैसरबाग इलाके में अवैध चैंबरों को गिराए जाने से रोकने के लिए जिला अदालत के वकीलों और उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मियों के बीच झड़प हुई थी। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश पर की जा रही है।
अप्रैल में पारित एक आदेश में न्यायालय ने टिप्पणी की कि लखनऊ में जिला और सत्र न्यायालय के पास सार्वजनिक रास्ते पर अवैध अतिक्रमण के कारण लोग परेशान हो रहे हैं।
4 अगस्त को लखनऊ नगर निगम ने अदालत को बताया कि इलाके में 100 से ज्यादा अवैध चैंबरों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है। इसमें आगे कहा गया है कि शुरू में केवल 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया था और उनमें से अधिकांश वकील हैं, जिन्होंने संबंधित क्षेत्र में चैंबर या दुकानें बना रखी हैं। हालांकि, नगरपालिका के वकील ने कहा कि 72 कक्षों या दुकानों में से केवल 14 को ही ध्वस्त किया गया है।
अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि उन 14 कक्षों पर भी दोबारा अतिक्रमण कर लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस सहयोग आवश्यक है। अनुरोध पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि लखनऊ के पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों के संबंध में समन्वय करेंगे कि कोई कानून और व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की नहीं दी इजाजत
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी को बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जानी की अनुमति नहीं दी है। इसी के साथ कोर्ट ने बनर्जी की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया। पढ़ें पूरी खबर।
