मुरादाबाद धर्मांतरण केस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समूह के एक मुस्लिम लड़की को निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत की मंजूरी दे दी है। मुरादाबाद में कुछ मुस्लिम लड़कियों के एक समूह पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी एक हिंदू दोस्त को मुस्लिम धर्म अपनाने व कोचिंग से लौटने के दौरान बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया था।

हिंदू लड़की के भाई की शिकायत पर मुरादाबाद पुलिस ने पांचों मुस्लिम लड़कियों पर मामला दर्ज किया गया। पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया था कि दिसंबर 2025 में कोचिंग से लौटने के दौरान यह घटना घटी थी।

कोर्ट ने एक लड़की को दी जमानत

न्यायाधीश अवनीश सक्सेना की बेंच ने कहा, पीड़िता के बयान में कहीं भी नहीं कहा गया कि मामले में आरोपी मलिश्का फातमा की संलिप्तता रही है। कोर्ट ने चार मई को जमानत देने का आदेश पारित किया।

कोर्ट ने आदेश में कहा कि आवेदक मालिश्का फातमा जो उपरोक्त मामले में शामिल हैं, इस आदेश की तारीख से तीन दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट या जांच अधिकारी के सामने पेश होंगी और संबंधित कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 25,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने पर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा।

कोर्ट ने गौर किया कि आरोपी पर पहले से कोई भी आपराधिक मामला नहीं है।

सीसीटीवी वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने पकड़ा तूल

मामले में आरोप है कि पांच लड़कियों ने अपने समूह की एक हिंदू लड़की को जबरन धर्मांतरण की कोशिश की, इस मामले ने एक सीसीटीवी वीडियो वायरल होने के बाद तेजी से तूल पकड़ा था। वीडियो में दिख रहा था कि लाल टॉप और काली जींस पहने एक लड़की को बुर्का पहनाया जा रहा, जिसे देख बाकी सभी लड़कियां हंस रही हैं।

भाई ने पुलिस में की थी शिकायत

पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन को आरोपी लड़कियों द्वारा बुर्का पहनने और आरोपियों के धर्म इस्लाम को मानने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

पीड़िता को नॉनवेज खिलाने की कोशिश

पुलिस को दिए अपने बयान में पीड़िता ने कहा था कि कोचिंग क्लास के बाद वह आरोपी मुस्लिम छात्रों के साथ बाहर गई, जिन्होंने बाद में उसे पूरे दिन बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया और उसे नॉनवेज खाने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की। आगे पीड़िता ने यह भी बताया कि जब उसने मांस खाने से इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने उसे ग्रेवी खाने का सुझाव दिया।

इससे पहले दो लड़कियों की याचिका हो चुकी खारिज

इससे पहले आरोपी मुस्लिम छात्रों में से तीन ने अपने खिलाफ दायर धर्मांतरण विरोधी मामले को रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट के एक बेंच में दायर किया था। उन्होंने दावा किया था कि उन पर लगाए गए आरोप झूठे थे।

साथ ही आरोपियों ने कोर्ट को बताया था कि शिकायतकर्ता (पीड़िता का भाई) एक मुस्लिम लड़की को परेशान कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जब लड़की ने शिकायत की, तो उसने धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत जवाबी कार्रवाई करते हुए यह मामला दर्ज कराया। हालांकि तीन छात्रों में से एक ने अंततः अपनी याचिका वापस ले ली।

हालांकि हाई कोर्ट ने आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की बेंच ने अपने आदेश में यह भी कहा कि युवाओं के बीच जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप विशेष रूप से चिंताजनक हैं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े मामले में महिला के खिलाफ सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की। अदालत ने वैवाहिक कानून में एक अहम सिद्धांत को दोहराते हुए कहा है कि भरण-पोषण ऐसा सहारा नहीं है, जिससे किसी सक्षम जीवनसाथी को काम न करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कोर्ट ने एक उच्च शिक्षित डॉक्टर पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) की मांग खारिज कर दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जो जीवनसाथी कमाने में सक्षम है, वह खुद काम न करके दूसरे पर आर्थिक बोझ नहीं डाल सकता। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें