Aligarh Murder Case: प्रेम प्रसंग के चक्कर में अपने ही पति की हत्या कराने वाली एक महिला और उसके प्रेमी को अदालत ने उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में सबसे दिल दहला देने वाला मोड़ तब आया जब अदालत के भीतर मृतक की 6 साल की मासूम बेटी और 15 साल के बेटे ने अपनी ही सगी मां के खिलाफ गवाही दी।

सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश ने 6 साल की मासूम बच्ची से पूछा कि वह क्या चाहती है, तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े और उसने कहा, “ऐसी मां को तो फांसी मिलनी चाहिए।” मासूम बच्ची के इन शब्दों को सुनकर अदालत में मौजूद सभी लोगों का दिल पसीज गया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह वारदात 10 जुलाई 2025 को अलीगढ़ के बरला कस्बे के ‘मुहल्ला कोठी’ में घटी थी। मृतक सुरेश दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था और घटना से कुछ दिन पहले ही गांव लौटा था। सुरेश की पत्नी बीना का उसके ही गांव के रहने वाले मनोज नाम के युवक के साथ काफी समय से अवैध संबंध चल रहा था।

घटना वाले दिन सुरेश अपने भाई विजय सिंह के साथ घर के बाहर बैठा था। इसी दौरान बीना के इशारे पर मनोज तमंचा लेकर वहां पहुंचा। बीना ने चिल्लाकर मनोज से कहा, “देख क्या रहा है, मार गोली, आज इसे जिंदा मत छोड़ना।” इसके बाद मनोज ने सुरेश के सीने में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पहले दी थीं नींद की गोलियां

पुलिस जांच में सामने आया कि बीना अपने पति को रास्ते से हटाने की साजिश काफी समय से रच रही थी। वह पहले अपने पति को नींद की गोलियां देकर गला दबाकर मारना चाहती थी, लेकिन बच्चे पास में सो रहे थे, इसलिए उसकी यह योजना नाकाम हो गई। इसके बाद उसने अगले ही दिन झाड़ू-पोंछा करने के बहाने पति को बाहर भेजा और बच्चों को स्कूल भेजकर प्रेमी मनोज को फोन करके बुला लिया।

15 साल के बेटे ने खोली मां की पोल

अदालत में मृतक के 15 साल के बेटे नीतेश की गवाही सबसे अहम साबित हुई। नीतेश ने जज के सामने बताया कि उसने कई बार मनोज को अपनी मां के साथ घर में देखा था। जब उसने यह बात अपने पिता को बताई, तो घर में विवाद हुआ था। नीतेश ने साफ-साफ बताया कि उसकी मां के कहने पर ही मनोज ने उसके पिता पर गोली चलाई थी।

6 महीने में पूरा हुआ ट्रायल, कोर्ट ने दी उम्रकैद

सरकारी अधिवक्ता जेपी राजपूत ने बताया कि पुलिस जांच के बाद मामला अदालत में चला और महज 6 महीने के भीतर ही ट्रायल पूरा कर लिया गया। कुल 8 गवाहों के बयानों और बच्चों की गवाही के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश तोष कुमार शर्मा की अदालत ने आरोपी महिला बीना और उसके प्रेमी मनोज को दोषी ठहराया। कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 35-35 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

अफवाह ने ले ली मृतक के भाई की जान

मामले में एक और दुखद मोड़ तब आया जब रिपोर्ट दर्ज कराने वाले मृतक के भाई विजय सिंह को किसी ने यह गलत सूचना दे दी कि बीना और मनोज को जमानत मिल गई है और वे जेल से बाहर आ रहे हैं।

इस बात का विजय सिंह को इतना गहरा सदमा लगा कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। हालांकि, मृत्यु से पहले वे अदालत में अपनी गवाही पूरी दर्ज करा चुके थे।

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