दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को यूट्यूबर और टिप्पणीकार अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। भारती के खिलाफ चंद्रशेखर आजाद से जुड़ी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश पारित किया। अदालत के विस्तृत आदेश को बाद में उपलब्ध कराया जाना है।

दिल्ली पुलिस ने कहा- गिरफ्तारी की आशंका क्यों?

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अजीत भारती की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि केवल FIR दर्ज होने के आधार पर यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि आरोपी को अनिवार्य रूप से गिरफ्तार किया जाएगा।

पुलिस ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी (IO) ने अभी तक अजीत भारती को कोई नोटिस तक जारी नहीं किया है। पुलिस के मुताबिक FIR में लगाए गए सभी आरोपों में अधिकतम सजा सात वर्ष तक की है। भारती की ओर से पेश अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने अदालत से दिल्ली पुलिस के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया।

किस मामले में दर्ज हुई FIR?

अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में 23 अगस्त को FIR दर्ज की गई थी। मामले में SC/ST एक्ट के अलावा आईटी एक्ट की धारा 67 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196(1)(c) और 351(3) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध की ओर से दर्ज कराई गई थी।

शिकायत में भारती के सोशल मीडिया हैंडल पर प्रकाशित एक वीडियो का हवाला दिया गया है। वीडियो का शीर्षक ‘SB79: रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन नौटंकी एंड मोर | साप्ताहिक बकैती’ बताया गया है।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि वीडियो में अजीत भारती ने जातिसूचक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसके अलावा चंद्रशेखर आजाद, जिन्हें शिकायत में ‘रावण’ के नाम से संदर्भित किया गया है, और डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर यौन रूप से अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।

अजीत भारती की ओर से क्या दलील दी गई?

अजीत भारती की ओर से उनके वकील जय अनंत देहाद्राई ने अदालत में उनके बयानों का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि भारती की टिप्पणियां किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की गई थीं, बल्कि एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के जवाब में प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई थीं।

वकील के मुताबिक, एक व्यक्ति ने भारती की विवाहित बहन को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उसे चंद्रशेखर आजाद से शादी करने की बात कही थी। इसी टिप्पणी को भारती की ओर से ‘गंभीर उकसावे’ (grave provocation) के रूप में पेश किया गया।

देहाद्राई ने कहा कि भारती ने किसी जाति या समुदाय के खिलाफ गाली नहीं दी और उनकी टिप्पणियां कथित तौर पर उस व्यक्ति तक सीमित थीं जिसने उनकी बहन को लेकर टिप्पणी की थी।

आंबेडकर पर टिप्पणी को लेकर भी सफाई

भारती की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर लगाए गए आरोपों से भी इनकार किया गया। उनके वकील ने कहा कि भारती ने बाबासाहेब आंबेडकर का उल्लेख सम्मान के साथ किया था और उनकी आपत्ति उन लोगों की कथित टिप्पणियों को लेकर थी जिन्हें वे आपत्तिजनक मानते हैं। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष कई न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए यह तर्क भी दिया कि मामले में SC/ST एक्ट के तहत अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होते।

अभी गिरफ्तारी की स्थिति क्या है?

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि केवल FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि अजीत भारती को गिरफ्तार किया ही जाएगा। पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अधिकारी की ओर से अभी तक भारती को नोटिस जारी नहीं किया गया है। हालांकि, अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले में आगे की स्थिति अदालत के विस्तृत आदेश और जांच की प्रगति पर निर्भर करेगी।

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