तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 5 अगस्त के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। हाई कोर्ट ने उनकी आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली याचिका खारिज कर दी थी। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के संबंध में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने से जुड़े आपराधिक मामले में बनर्जी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की शर्त के रूप में उच्च न्यायालय द्वारा विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट के 20 जुलाई के उस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। जिसमें उन्हें यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और इसके बजाय उन्हें राज्य द्वारा संचालित एसएसकेएम अस्पताल और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईपीजीएमई एंड आर) में इलाज कराने के लिए कहा गया था।
तीन अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट से मामले का शीघ्र निपटारा करने का अनुरोध किया। पांच अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने विदेश में उपचार की आवश्यकता का आकलन करने के लिए गठित चिकित्सा बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट ने कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी बोर्ड के समक्ष पेश होते तो बोर्ड की चिकित्सीय राय से अदालत यह निर्धारित कर सकती थी कि क्या उन्हें विदेश में उपचार की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि वह चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं है और इस स्तर पर महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या बनर्जी को उपचार की जरूरत है, न कि यह कि ऐसा उपचार कहां दिया जाना है। उच्च न्यायालय ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि बनर्जी को उस डॉक्टर या चिकित्सा संस्थान को चुनने का पूर्ण अधिकार है जहां उन्हें इलाज कराना चाहिए, यह देखते हुए कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे लंबित हैं और जांच जारी है।
अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने बताया कि वह अमेरिका में उसी विशेषज्ञ से अपना इलाज करवाना चाहते हैं। जिन्होंने पहले उनका ऑपरेशन किया था। उन्होंने यह भी बताया कि बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल में इलाज कराने के इच्छुक नहीं हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि विदेश में इलाज की आवश्यकता वाली कोई चिकित्सीय आपात स्थिति नहीं थी और बनर्जी को विदेश यात्रा की अनुमति देने से उनके खिलाफ चल रहे मामलों की जांच प्रभावित हो सकती है।
14 साल जेल में कटे, फिर पलटा फैसला: MP हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दो बेगुनाहों को किया बरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 14 साल जेल में बिताने वाले दो लोगों को राहत दी है और एक हत्या के मामले में उनकी दोषसिद्धि को पलट दिया है। हाईकोर्ट की इस फैसले की वजह निचली अदालत का एक फैसला था, जो कि उसने एक अन्य मामले की फॉरेंसिंक रिपोर्ट पर भरोसा किया था। पढ़ें पूरी खबर।
