गुजरात के गांधीनगर में एक स्कूल टीचर को अपने छात्र को थप्पड़ मारना भारी पड़ गया। गुजरात की एक कोर्ट ने उसे तीन साल से अधिक की सजा सुना दी।

गांधीनगर की एक स्कूल शिक्षिका ने कक्षा 9 की छात्रा को होमवर्क पूरा न करने पर थप्पड़ मारा था, कोर्ट ने उसे इस मामले में तीन साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है। दरअसल टीचर ने थप्पड़ इतनी तेज मारा था कि छात्रा के बाएं कान का पर्दा फट गया और उसकी सुनने की क्षमता प्रभावित हो गई।

कोर्ट ने महिला टीचर को पाया दोषी

मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हिमांशु चौधरी ने 30 जनवरी को दिए अपने फैसले में महिला टीचर को दोषी ठहराया और कहा कि उनकी इस क्रूरता से 14 वर्षीय बच्ची को गंभीर चोट लगी, इससे उसे (नाबालिग छात्रा) अब सुनाई कम पड़ रहा और उसे लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा।

कब हुई थी ये घटना?

कोर्ट ने यह बात भी नोट की कि घटना के साढ़े चार साल बाद भी पीड़िता को लगी चोट के लिए दवा का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रॉसिक्यूशन पक्ष के मुताबिक, यह घटना 1 जनवरी 2020 को गांधीनगर स्थित निजी संस्थान बा श्री वसंतकुंवरबा स्कूल में हुई थी।

50 हजार का लगाया जुर्माना भी

कोर्ट ने शिक्षिका पारुलबेन पटेल को बीएनएस की धारा 325 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत बच्चे पर हमला करने और जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी पाया और उन्हें तीन साल तीन महीने की कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाए।

क्यों मारा था थप्पड़?

आरोपी महिला टीचर ने छात्रा के होमवर्क न करने पर गुस्सा होकर उसके बाएं कान पर तीन बार थप्पड़ मारा। फलस्वरूप, छात्रा के बाएं कान का पर्दा फट गया, जिससे उसे गंभीर चोट आई। इसके बाद लड़की के परिवार की शिकायत के आधार पर सेक्टर-21 पुलिस ने घटना के दो दिन बाद टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

टीचर ने बचाव में क्या कहा?

अपने बचाव में टीचर ने कोर्ट के समक्ष कहा कि छात्रा होमवर्क नहीं कर रही थी और अपनी मनमानी कर रही थी। उसने दावा किया कि जब उसके माता-पिता को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया। कोर्ट ने चिकित्सा गवाहों की गवाही और इलाज करने वाले डॉक्टर के सामने बताई गई जानकारी को ध्यान में रखा, जिससे आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई।

हालांकि सुनवाई के दौरान टीचर के वकील ने सजा में नरमी बरतने की अपील की, क्योंकि वह कैंसर से पीड़ित थीं। कोर्ट ने पाया कि इस अपराध में शिक्षिका द्वारा अपने अधिकार का दुरुपयोग, एक नाबालिग बच्ची को गंभीर शारीरिक चोट और लंबे समय से मेडिकल परिस्थिति शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा, “ये कारक सजा में नरमी बरतने वाली परिस्थितियों से कहीं अधिक अहम हैं। प्रोबेशन देने से बचाव के उपाय और बाल संरक्षण का उद्देश्य फेल हो जाएगा। इसके अलावा, कैंसर की बीमारी के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया है।” आगे पढ़िए दिल्ली दंगा: AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को बड़ा झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

(इनपुट- पीटीआई)