कर्नाटक की एक अदालत ने SBI के पूर्व चीफ मैनेजर को एक मृत ग्राहक के खाते और बैंक के पैसे से 61.57 लाख रुपये निकालने के मामले में दोषी ठहराया है। मैसूरु की अदालत ने चामुंडिपुरम शाखा के पूर्व चीफ मैनेजर अनिरुद्ध वसंतराव कुलकर्णी को एक साल की जेल की सजा सुनाई। फर्स्ट एडिशनल सीनियर सिविल जज और चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने यह फैसला सुनाया।

अभियोजन के मुताबिक, 13 मई 2009 से 23 दिसंबर 2011 के बीच कुलकर्णी ने बैंक में अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कृष्णा अय्यर के खाते से पैसे निकाले। कृष्णा अय्यर की 7 अप्रैल 2005 को ही मौत हो चुकी थी यानी खाते से पैसे निकाले जाने से कई साल पहले।

पुलिस ने अदालत को बताया कि कुलकर्णी ने अय्यर के खाते से 40.53 लाख रुपये और बैंक के एक आंतरिक खाते से 21.04 लाख रुपये निकाले। इस तरह कुल 61.57 लाख रुपये अपने और अपने बेटे नंदन कुलकर्णी के खातों में ट्रांसफर किए गए।

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2011 में SBI के विजिलेंस विभाग को एक गुमनाम पत्र मिला। इसमें मैसूरु की चामुंडिपुरम शाखा में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। इसके बाद बैंक के स्टेट विजिलेंस प्रमुख ने मामले की जांच की और रिपोर्ट सौंपी।

मामला तब और सामने आया जब कृष्णा अय्यर के कानूनी वारिस कोर्ट के आदेश के बाद उनके खाते से करीब 40 लाख रुपये निकालने बैंक पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि खाते में मौजूद रकम पहले ही निकाल ली गई थी।

इसके बाद पुलिस ने 2012 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया और बाद में जमानत मिल गई। बताया गया कि मामला सामने आने के बाद उन्होंने बैंक को करीब 62 लाख रुपये वापस कर दिए थे। हालांकि अदालत ने कहा कि पकड़े जाने के बाद रकम वापस करने से उनका आपराधिक दायित्व खत्म नहीं हो जाता।

कुलकर्णी के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुलकर्णी की उम्र 65 साल है और वह उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनकी 90 साल की मां और पत्नी भी उन पर निर्भर हैं। उनके खिलाफ कोई दूसरा आपराधिक मामला नहीं है और वह अब तक हर सुनवाई में मौजूद रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बैंक की रकम भी वापस कर दी है।

हालांकि अदालत ने कुलकर्णी को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने बैंक को मुकदमे के खर्च और हुए नुकसान की भरपाई के लिए 50 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया।

₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR: SC ने अंतरिम रोक से किया इनकार

2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI कमेटी समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।