पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने साल 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर से कथित रूप से जब्त की गई बहुमूल्य धार्मिक पुस्तकों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक वस्तुओं की वर्तमान स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस रमेश कुमारी की बेंच ने सेना, केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है।

हाई कोर्ट की बेंच लुधियाना के रहने वाले एक व्यक्ति की तरफ से 2019 में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में एसजीपीसी को यह बताने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे धार्मिक ग्रंथ, पांडुलिपियां और अन्य वस्तुएं कहां हैं, जिन्हें ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान कथित तौर पर जब्त किया गया था और एसजीपीसी को सौंप दिया गया था।

हाई कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को जारी किया नोटिस

ऑपरेशन ब्लू स्टार एक जून से 10 जून 1984 के बीच चलाया गया एक सैन्य अभियान था। यह खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरांवाले और उसके समर्थकों से अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब को मुक्त कराने के किया गया था। नवंबर 2019 में हाई कोर्ट ने केवल एसजीपीसी को ही नोटिस जारी किया था। हालांकि, बाद की सुनवाइयों के दौरान एसजीपीसी ने कहा कि कुछ वस्तुएं लौटा दी गई थीं और कुछ वस्तुएं अभी भी सीबीआई, केंद्र और सेना के पास हैं।

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याचिकाकर्ता सतिंदर सिंह ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर की सिख रेफरेंस लाइब्रेरी, तोशाखाना, सेंट्रल सिख म्यूजियम और गुरु रामदास लाइब्रेरी से कई वस्तुएं जब्त की गई थीं। सिंह ने सात जून 1984 को जब्त की गई पांडुलिपियों, कलाकृतियों और साहित्य की लिस्ट तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि जब्त की गई पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों और अन्य वस्तुओं को लाइब्रेरी, सेंट्रल सिख म्यूजियम और स्वर्ण मंदिर परिसर में स्थित तोशाखाना को लौटा दिया जाए। उसने कहा है कि जनता को दर्शन और रिसर्च के उद्देश्यों के लिए इन चीजों तक पहुंच दी जाए। हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह बताने को कहा है कि क्या ये वस्तुएं उनके पास हैं।

क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार

उग्रवादियों को काबू करने के लिए इंदिरा गांधी ने 1984 में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को मंजूरी दी। सेना ने तीन दिनों तक स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे हथियारबंद उग्रवादियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया और फिर वो हुआ जिसका अंदाजा शायद तत्तकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी नहीं था। पढ़ें पूरी खबर…