तेलंगाना के एक उपभोक्ता आयोग ने एक जूता कंपनी को एक ग्राहक को 20999 रुपये देने का आदेश दिया है। ग्राहक ने शिकायत की थी कि जूते खरीदने के करीब दो महीने के भीतर ही उनमें परत निकलने और खराब होने की समस्या शुरू हो गई थी। ग्राहक का कहना है कि उसने जूतों का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया था।

कंपनी ने जूतों की वारंटी देने से इनकार करते हुए इसे ‘सामान्य टूट-फूट’ बताया था। लेकिन आयोग ने कहा कि कंपनी इस दावे के समर्थन में कोई तकनीकी जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।

रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष चिटनेनी लता कुमार और सदस्य डी माधवी लता व कात्यायनी खंडाविल्ली इस मामले की सुनवाई कर रही थीं। शिकायत 45 साल के एक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी। उसने अक्टूबर 2025 में 12999 रुपये के जूते खरीदे थे।

20 अगस्त के आदेश में आयोग ने कहा कि केवल किसी खराबी को ‘सामान्य टूट-फूट’ बता देना वारंटी का दावा खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। खासकर तब, जब खरीदने के कुछ ही समय बाद समस्या सामने आई हो और ग्राहक ने खराबी की तस्वीरें भी उपलब्ध कराई हों। आयोग ने कहा कि कंपनी को अपने दावे के समर्थन में तकनीकी सबूत देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

वारंटी का दावा खारिज

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अक्टूबर 2025 में कंपनी से 12999 रुपये में जूते खरीदे थे। उसके मुताबिक, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई वारंटी पॉलिसी के अनुसार 14 दिन से ज्यादा और तीन महीने से कम पुराने उत्पाद पर वारंटी का दावा किया जा सकता है। इसके लिए खराबी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होनी चाहिए और जूतों का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया होना जरूरी है।

व्यक्ति ने दावा किया कि जूते खरीदने के दो महीने के भीतर ही उनमें साफ तौर पर खराबी दिखने लगी। उसका कहना था कि उसने जूतों का सही और सावधानी से इस्तेमाल किया था। इसलिए यह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट का मामला था।

इसके बाद उसने कंपनी से वारंटी के तहत जूते बदलने या उनकी समस्या दूर करने की मांग की। लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए उसका दावा खारिज कर दिया कि जूतों में ‘सामान्य टूट-फूट’ हुई है।

शिकायतकर्ता ने कंपनी से कई बार अपनी समस्या पर ध्यान देने की अपील की। लेकिन उसकी मांग पर विचार नहीं किया गया। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। उसने कंपनी पर लापरवाही, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाया।

‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ का दोषी पाया

आयोग ने कहा कि नोटिस भेजे जाने के बावजूद कंपनी ने इस शिकायत का जवाब नहीं दिया और मामले का विरोध नहीं किया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और इसके विपरीत कोई सबूत सामने न आने के आधार पर आयोग ने माना कि वारंटी का दावा पर्याप्त और स्पष्ट वजह बताए बिना खारिज किया गया।

आयोग ने कहा, ”हमारी राय में जूता कंपनी ने शिकायतकर्ता को उचित सेवा देने में कमी की है और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) भी किया है।”

शिकायतकर्ता ने जूते बदलने या 12999 रुपये वापस करने की मांग की थी। आयोग ने कहा कि जूते खरीदने के कुछ ही समय बाद उनमें खराबी आ गई थी और कंपनी ने वारंटी के दावे पर भी सही तरीके से कार्रवाई नहीं की। ऐसे में इस समय दोबारा वारंटी जांच कराने से ग्राहक को प्रभावी राहत नहीं मिलेगी। इसलिए आयोग ने जूतों की कीमत वापस करने का फैसला किया।

आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 12999 रुपये वापस करने का आदेश दिया। रकम मिलने के बाद ग्राहक जूते कंपनी को वापस करने होंगे। इसके अलावा कंपनी को मानसिक परेशानी और हुई असुविधा के लिए 5000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया।

आयोग ने कंपनी को मुकदमे के खर्च के तौर पर 3000 रुपये भी देने को कहा। यह पूरी रकम 45 दिनों के भीतर शिकायकर्ता को देनी होगी।

क्या है इस फैसले का मतलब?

इस फैसले से साफ होता है कि किसी वारंटी दावे को सिर्फ यह कहकर खारिज नहीं किया जा सकता कि जूते में हुई खराबी ‘सामान्य टूट-फूट’ के कारण है। खासकर तब, जब खरीदारी के कुछ ही समय बाद खराबी सामने आई हो। कंपनी को अपने दावे के समर्थन में तकनीकी जांच या अन्य ठोस सबूत देना जरूरी है।

अगर किसी ग्राहक को ऐसी समस्या आती है तो वह अपने राज्य की Consumer Helpline से मदद ले सकता है। तेलंगाना के लिए हेल्पलाइन नंबर 0771-2582902 बताया गया है। इसके अलावा National Consumer Helpline के 1915 नंबर पर भी शिकायत की जा सकती है।