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मम्मी-पापा का इंटरव्यू देख रोने लगे थे युजवेंद्र चहल, एंकर को सुनाई थी पहला विकेट लेने की कहानी

चहल ने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में अपना पहला वनडे मैच खेला था। उसी दौरे पर 18 जून को हरारे में ही जिम्बाब्वे के खिलाफ पहला टी20 मैच भी खेला था।

युजवेंद्र चहल ने पहला अंडर-14 मैच हरियाणा के लिए साल 2000 में खेला था। (सोर्स – youtube)

युजवेंद्र चहल भारत के लिए 54 वनडे और 45 टी20 मैचों में खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने वनडे में 92 और टी20 में 59 विकेट चटकाए हैं। चहल ने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में अपना पहला वनडे मैच खेला था। उसी दौरे पर 18 जून को हरारे में ही जिम्बाब्वे के खिलाफ पहला टी20 मैच भी खेला था। चहल ने एक इंटरव्यू में अपने पहले विकेट की कहानी सुनाई थी। इस दौरान बताया था कि किस तरह उन्हें पहली सफलता मिली थी।

चहल ने रीना डीसूजा के शो पर कहा था, ‘‘जब मैं जिम्बाब्वे गया तो मेरा पहला मैच था। मैं 9 ओवर कर चुका था, लेकिन विकेट नहीं मिला था। मुझे लगा था कि आज विकेट नहीं मिलेगा। 10वें ओवर के लिए आया तो तीसरी गेंद पर विकेट मिला। मेरे बेस्ट फ्रेंड केएल राहुल ने कैच पकड़ा। मैंने पहला अंडर-14 मैच हरियाणा के लिए साल 2000 में खेला था। उसके 15-16 साल बाद मुझे सफलता मिली। मैं सोचता था कि इंडिया के लिए खेलूंगा। जब पहली बार जर्सी पहनी थी तो रोमांचक मैच था। मेरे लिए काफी अच्छा मैच गया था। मैंने कम रन दिए थे। माही भाई (महेंद्र सिंह धोनी) ने कहा था कि अच्छी गेंदबाजी की।’’

चहल ने आगे कहा था, ‘‘मैं हमेशा मैच के बाद मम्मी-पापा से बात करता हूं। उस दिन भी मैंने कॉल किया तो मम्मी ने कहा कि मैं मंदिर के सामने बैठी थी। तुम्हारे 9 ओवर हो चुके थे। आखिरी ओवर था। मुझे तो लगा था कि आज विकेट नहीं मिलेगा। उस दौरान मैं एक ऐसे ही यूट्यूब देख रहा था तो मम्मी-पापा की तस्वीर सामने देखी। वह यूट्यूब पर दोनों का पहला इंटरव्यू था। इस बारे में मुझे पता नहीं था। मैंने देखा कि एक सवाल के दौरान दोनों इमोशनल हो गए थे। मैंने वीडियो रोक दिया। भावुक हो गया था।’’


चहल ने अपने मम्मी-पापा के स्ट्रगल के बारे बताया, ‘‘हमारा एक कमरा था, उसमें दादू रहते थे। उसके बाद उसमें पिताजी आ गए। चाचाजी ब्रिगेडियर हैं तो वो पोस्टिंग में ही रहते थे। हमारा एक कमरा होता था जिसमें मैं, पापा, मम्मी और दोनों दीदी रहते थे। पिताजी वकील थे। उस समय घर चल जाता था। वो देखते थे कि अगर मुझे कुछ जरुरत है तो वो खुद के लिए कुछ नहीं करते थे। अभी भी खुद के लिए पहले नहीं लेते हैं। अगर मुझे कुछ उन्हें देना रहता है तो जाकर दे देता हूं, क्योंकि वो खुद से कभी नहीं खरीदने वाले हैं।’’

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