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युवराज सिंह का 2007 टी20 वर्ल्ड कप से पहले टूटा था सपना, फिर भी पूर्व ऑलराउंडर ने निभाया था खुद से किया वादा

उस वर्ल्ड कप में युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में सिर्फ 12 गेंद में अर्धशतक पूरा किया था, जो आज भी एक रिकॉर्ड है। अपनी पारी के दौरान उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में 6 छक्के लगाए थे।

Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: June 10, 2021 4:40 PM
युवराज सिंह ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 12 गेंद में पचासा ठोकने की उपलब्धि हासिल की थी।

युवराज सिंह ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया था। हालांकि, टूर्नामेंट से पहले युवराज सिंह का सपना टूट गया था। इसके बावजूद उन्होंने देश और टीम के लिए खुद से किया वादा निभाया था। 22 यार्न्स पोडकास्ट पर बातचीत के दौरान युवराज सिंह का वर्षों पुराना यह दर्द छलक आया।

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने 2007 में पहली बार टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप आयोजित किया था। बाएं हाथ के बल्लेबाज युवराज सिंह ने बताया, जब इस वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का चयन होना था तब मुझे पूरी उम्मीद थी कि टीम इंडिया की कमान मुझे सौंपी जाएगी, क्योंकि सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने खुद को चयनित किए जाने से अलग कर लिया था।

युवराज सिंह उस समय चुनी गई टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़ियों में से एक थे। उन्हें वनडे में डेब्यू किए हुए करीब 7 साल हो चुके थे। हालांकि, चयनकर्ताओं ने महेंद्र सिंह धोनी की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा दिखाया। उस समय धोनी को इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखे हुए तीन साल ही हुए थे।

धोनी ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से मिले इस मौके का पूरा लाभ उठाया। उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार टीम इंडिया की अगुआई करने की जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने भारत को विश्व चैंपियन बनाकर न सिर्फ दुनिया को हैरान कर दिया, बल्कि फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

युवराज सिंह ने कहा, ‘हालांकि, मुझे कप्तानी नहीं मिली। इसके बावजूद मैंने एक टीम मैन की भूमिका निभाई।’ उन्होंने कहा, ‘हां, यह स्वभाविक है कि जो भी टीम का कप्तान बने आपको उसे समर्थन देना होता है। फिर चाहे वह राहुल द्रविड़ हों, सौरव गांगुली हों या फिर भविष्य में कोई भी हो। आखिरकार आप एक टीम मैन रहना चाहते हो। मैं भी ऐसा ही थी।’

युवराज ने बताया, ‘तो उस साल भारत पहले ही 50 ओवर वर्ल्ड कप में बुरी तरह हारकर बाहर हुआ था। सही है ना? मेरा मतलब है तब भारतीय टीम में काफी खलबली मची थी। इसके बाद भारत का दो महीने लंबा इंग्लैंड का दौरा था। फिर साउथ अफ्रीका और आयरलैंड का भी एक महीने का दौरा था। टी20 वर्ल्ड कप भी एक महीने लंबा शेड्यूल था। ऐसे में 4 महीने घर से बाहर का दौरा था।’

39 साल के पूर्व हरफनमौला ने कहा, ‘तब सीनियर खिलाड़ियों ने सोचा की उन्हें क्रिकेट से थोड़ा ब्रेक चाहिए। तब कोई भी टी20 वर्ल्ड कप को गंभीरता से नहीं ले रहा था। ऐसे में मैं उम्मीद कर रहा था कि टी20 वर्ल्ड कप में मुझे भारत की कप्तानी मिलेगी। हालांकि, जब घोषणा हुई तो धोनी कप्तान थे।’

उस वर्ल्ड कप में युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच में सिर्फ 12 गेंद में अर्धशतक पूरा किया था, जो आज भी एक रिकॉर्ड है। अपनी पारी के दौरान उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में 6 छक्के लगाए थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में 70 रन ठोकक टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया था।

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