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खोई साख की तलाश में विंडीज की युवा टीम

बीते चार साल में देखें तो वेस्ट इंडीज के लिए सबसे बुरा दिन 30 सितंबर 2015 रहा, जब वह क्रिकेट इतिहास में पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहा।

Author May 18, 2019 7:19 AM
वेस्टइंडीज के कप्तान जेसन होल्डर। (फोटो सोर्स- पीटीआई)

संदीप भूषण

लगभग डेढ़ दशक तक क्रिकेट पर राज करने वाली वेस्ट इंडीज टीम का अंजाम ऐसा होगा किसी ने सोचा भी नहीं था। 1980 से 1995 तक एक भी टैस्ट मैच नहीं गंवाने वाली टीम विश्व कप के 12वें संस्करण में भी जैसे-तैसे पहुंच पाई है। पहले दो विश्व कप की विजेता टीम ने दसवें नंबर पर रहते हुए इस क्रिकेट महाकुंभ के लिए क्वालीफाई किया है। उसे विश्व कप क्वालीफायर में अफगानिस्तान से हार का सामना करना पड़ा।

दरअसल, जब भी विश्व कप की बात होती है, जेहन में कैरेबियाई टीम का नाम आना लाजिमी है। उसने इस टूर्नामेंट के दो शुरुआती खिताब पर कब्जा जमाया है। 1975 और 1979 के उस दौर को क्रिकेट प्रशंसक आज भी याद कर रोमांचित हो उठते हैं। लेकिन, हाल के दिनों में इस टीम के प्रदर्शन ने सबको निराश किया है। 1983 विश्व में उपविजेता बनीं वेस्ट इंडीज की टीम ने 1996 के बाद से कभी सेमी फाइनल में प्रवेश नहीं किया है। उसने विश्व कप में अब तक कुल 73 मैच खेले हैं जिसमें 40 में जीत और 31 में हार का सामना करना पड़ा है। दो मैच बगैर किसी परिणाम के समाप्त हुए।

क्या कहते हैं आंकड़े

बीते चार साल में देखें तो वेस्ट इंडीज के लिए सबसे बुरा दिन 30 सितंबर 2015 रहा, जब वह क्रिकेट इतिहास में पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रहा। इसके महज दो दिन पहले टीम चयन को लेकर विवाद के बाद कोच फिल सिमंस को निलंबित कर दिया गया था। आंकड़ों के सहारे यह मान सकते हैं कि 1996 के बाद से वेस्ट इंडीज क्रिकेट का सबसे बुरा दौर शुरू हो गया था।

इससे पहले के आंकड़ों को देखें तो मार्च 1976 से मार्च 1995 तक वेस्ट इंडीज ने कुल 71 टैस्ट मैचों में जीत दर्ज की। महज 20 में उसे हार का सामना करना पड़ा था। इस आंकड़े से यह साफ हो जाता है कि उस दौर में इस कैरेबियाई टीम का दबदबा था। इसके बाद 1996 से 2000 तक उसके खाते में महज 14 टैस्ट जीत आई और 78 में उसे हार का सामना करना पड़ा। वहीं एकदिवसीय मैचों में उसे महज 72 मैचों में जीत नसीब हुई और 161 में हार झेलनी पड़ी।
क्या रही वजह

कैरेबियाई टीम के पतन का सबसे बड़ा कारण उसके क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच का मतभेद रहा। 2005 में एक दौर ऐसा भी आया जब उसके सात खिलाड़ियों ने अनुबंध संबंधी कारणों से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टैस्ट मैच में खेलने से मना कर दिया। 2014-15 के आसपास ही अनुबंध संबंधी विवाद के कारण भारत दौरे पर आई वेस्ट इंडीज टीम के खिलाड़ियों ने शृंखला को बीच में छोड़कर ही जाने का फैसला किया था। कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उसके बोर्ड ने सफलता के दिनों में आधारभूत संरचना के विकास पर ध्यान नहीं दिया।

अब क्या है स्थिति
30 मई से शुरू हो रहे क्रिकेट महाकुंभ के लिए दसवीं टीम के रूप में क्वालीफाई करने वाली टीम वेस्ट इंडीज अब पूरी तरह से युवाओं पर निर्भर है। उसके विश्व कप टीम में क्रिस गेल और आंद्रे रसेल ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें विश्व कप का अनुभव है। इन दोनों ही खिलाड़ियों ने आइपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है। रसेल ने इस सत्र में अपनी धुआंधार बल्लेबाजी से कोलकाता नाइटराइडर्स को कई मैचों में जीत दिलाई। साथ ही कार्लोस ब्रेथवेट, एश्ले नर्स, इविन लुईस और जैसन होल्डर भी बीते कुछ समय से बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।

युवाओं पर दारोमदार
वेस्ट इंडीज की पूरी टीम ही बदल गई है। उनके पास युवा खिलाड़ियों का बेहतरीन पूल है। विश्व कप के 12वें संस्करण में कुछ ऐसे भी युवा है जिन पर प्रशंसकों की खास नजर होगी। इनमें शिमरोन हैटमेयर और ओसाने थॉमसन शामिल हैं। इन दो खिलाड़ियों ने अपने लाजवाब प्रदर्शन से विश्व क्रिकेट का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हैटमेयर ने हाल में संपन्न आइपीएल में भी अपनी धुआंधार बल्लेबाजी का नमूना पेश किया। 22 साल का यह बल्लेबाज 16 एकदिवसीय मैच में ही चार शतक और दो अर्धशतक जमा चुका है। वहीं थॉमसन ने अपनी गेंदबाजी से पुराने दिग्गज गेंदबाजों की याद दिला दी। 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के कारण वे खतरनाक गेंदबाज के रूप में उभरे हैं। उनके नाम आठ मैच में 15 विकेट हैं जिसमें एक मौके पर उन्होंने पांच विकेट भी चटकाए हैं।

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