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यशस्वी जायसवाल कभी गोलगप्पे बेचकर बुझाते थे पेट की आग, अब खटखटा रहे टीम इंडिया का दरवाजा

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के चयनकर्ताओं की विजय हजारे ट्रॉफी के मैचों पर खास निगाह है। ऐसे में वे यशस्वी जायसवाल के प्रदर्शन से जरूर आकर्षित हुए होंगे।

यशस्वी जायसवाल ने जड़ा दोहरा शतक (फोटो सोर्स-twitter)

मुंबई के आजाद मैदान पर कभी पानी पूरी बेचकर पेट की आग बुझाने वाले यशस्वी जायसवाल ने अब अपने शानदार प्रदर्शन से टीम इंडिया में चुने जाने के लिए अपना दावा ठोका है। बुधवार को उन्होंने अलूर स्थित कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के मैदान पर इतिहास रचा। 17 साल के यशस्वी वनडे क्रिकेट (लिस्ट ए) में दोहरा शतक जड़ने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए। उन्होंने टूर्नामेंट के इतिहास में किसी एक मैच में सबसे ज्यादा छक्के मारने का भी रिकॉर्ड अपने नाम किया। यशस्वी को इस टूर्नामेंट में मुंबई की ओर से उन्हें 10 में से 5 मैच में खेलने का मौका मिला। इसमें उन्होंने तीन शतकीय पारियां खेलीं। बता दें कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के चयनकर्ताओं की विजय हजारे ट्रॉफी के मैचों पर खास निगाह है। ऐसे में यशस्वी के प्रदर्शन से वे जरूर आकर्षित हुए होंगे।

आज भले ही यशस्वी का यश चारों ओर फैल रहा है, लेकिन उनकी यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही है। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले यशस्वी को अपना सपना सच करने के लिए महज 11 साल की उम्र में घर छोड़ना पड़ा था। वे मुंबई पहुंच गए। वहां उन्हें किसी तरह मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में एडमिशन मिल गया। बाद में क्लब ने उन्हें रहने की भी व्यवस्था कर दी। लेकिन पिताजी के भेजे पैसे से उनका खर्च चलना मुश्किल था। ऐसे में यशस्वी ने पानी पूरी बेचकर अपने पेट की आग बुझाई। यशस्वी की मेहनत रंग लाई और वे लगातार अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित करते रहे। पिछले साल उनका चयन श्रीलंका दौरे पर गई अंडर-19 टीम के लिए भी हुआ था। उनके जल्द टीम इंडिया के लिए भी खेलते नजर आने की उम्मीद की जा रही है।

विजय हजारे ट्रॉफी में यशस्वी का प्रदर्शन
विजय हजारे ट्रॉफी का पहले और दूसरा मैच बारिश के कारण रद्द हो गया था। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने तीसरे मैच में 3 चौके की मदद से 62 गेंद पर 44 रन बनाए। चौथे मैच में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। पांचवां मैच भी गीली आउटफील्ड के कारण रद्द कर दिया गया था। छठे मैच में भी वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बन पाए। सातवें मैच में उन्हें ओपनिंग का मौका मिला। उन्होंने 6 चौके और 5 छक्के की मदद से 123 गेंद पर 113 रन की पारी खेली। आठवें मैच में वे 22 रन ही बना पाए। नौवें मैच में उन्होंने 14 चौके और 3 छक्के की मदद से 132 गेंद पर 122 रन ठोक दिए। अब टूर्नामेंट में अपने आखिरी मैच में उन्होंने कमाल ही कर दिया और महज 154 गेंद पर 203 रन का स्कोर खड़ा कर दिया। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 17 चौके और 12 छक्के लगाए।

यश फैलाने मे अर्जुन का भी योगदान
यशस्वी की कीर्ति फैलाने में सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर का भी बहुत बड़ा हाथ है। दोनों की मुलाकात बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में हुई थी। दोनों एक ही कमरे में रहते थे। यशस्वी सचिन के बहुत बड़े फैन हैं। जब सचिन का बेटा ही उनका दोस्त बन गया तो उनका मास्टर ब्लास्टर से मिलने का सपना भी पूरा हो गया। अर्जुन ने पिछले साल यशस्वी को अपने पिता से मिलाया। सचिन ने उन्हें अपना बल्ला भी दिया था।

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