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‘भारत के लिए खेलने के सपने से अभी बहुत दूर’, U19 वर्ल्ड कप के हीरो यशस्वी जायसवाल ने कहा- हर बार दिखानी होगी बल्ले की धार

यशस्वी मानते हैं कि उनका संघर्ष दुनिया से नहीं, बल्कि खुद से है। वे कहते हैं, ‘मैं अब खुद को जानने लगा हूं। मैं खुद को साधारण रखता हूं। रोजाना सुबह 5 बजे उठता हूं। मेरे कोच ने मुझे सिखाया है कि मैं खुद से बात करूं। मैं वैसा ही करता हूं। खुद को रोज समझता हूं। खुद को खुद से ही प्रेरित करता हूं।’

यशस्वी जायसवाल ने आईसीसी अंडर19 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 105 रन की पारी खेली थी।

यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) यह वह नाम है जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। भारत आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप के फाइनल में भले ही बांग्लादेश के हाथों हार गया हो, लेकिन टूर्नामेंट में अपने बल्ले से धाक जमाने वाले यशस्वी की प्रतिभा का हर कोई कायल हो गया है। उन्हें टीम इंडिया यानी भारत की सीनियर टीम में शामिल होने का अगला दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, यशस्वी अपनी सफलता पर कतई इतरा नहीं रहे हैं। उन्हें अच्छे से पता है कि टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए सिर्फ एक टूर्नमेंट में रन बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि हर बार अपने बल्ले की धार दिखानी होगी। यशस्वी का अब अगला फोकस रणजी ट्रॉफी और अंडर-23 टूर्नमेंट पर है।

अंडर 19 वर्ल्ड कप के बाद घर लौटे यशस्वी ने हमारे सहयोगी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस को दिए साक्षात्कार में यह बात कही। उन्हें देश के लिए वर्ल्ड कप नहीं जीत पाने का अफसोस है, लेकिन इस बाएं हाथ के बल्लेबाज को यह भी पता है कि दुनिया यहीं खत्म नहीं हो जाती। अभी लंबा सफर बाकी है। उसके लिए खुद को हमेशा तैयार रखना होगा। यशस्वी अंडर 19 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची में शीर्ष पर रहे। वे 400 रन बनाने वाले इकलौते बल्लेबाज रहे। उन्होंने मैन ऑफ द वर्ल्ड कप की ट्रॉफी से सम्मानित भी किया गया। हालांकि, उनकी यह ट्रॉफी मुंबई पहुंचते-पहुंचते दो टुकड़ों में तब्दील हो गई।

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इसके बावजूद यशस्वी इस यादगार ट्रॉफी के टूटने से दुखी नहीं हैं। उनके कोच ज्वाला सिंह ने बताया, वह रन बनाने को लेकर हमेशा चिंतित रहता है। ट्रॉफियों को संभालकर रखने में उसे ज्यादा रुचि नहीं है। यशस्वी ने वर्ल्ड कप की 6 पारियों में (59, 29*, 57*, 62, 105* और 88) कुल 400 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने 5 बार 50+ रन की पारियां खेलीं। वे तीन विकेट भी झटकने में सफल रहे। यशस्वी जायसवाल की कामयाबी इसलिए भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं, क्योंकि वे छोटी से उम्र में कड़े संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचे हैं।

क्रिकेट में सफल होने से पहले यशस्वी  के सामाजिक-आर्थिक हालात बेहत चुनौतीपूर्ण थे। उन्हें छोटी से उम्र में अपना घर छोड़ना पड़ा। टेंट में रहे, पेट की आग बुझाने के लिए पानी पूरी बेचनी पड़ी। यशस्वी मानते हैं कि उनका संघर्ष दुनिया से नहीं, बल्कि खुद से है। वे कहते हैं, ‘मैं अब खुद को जानने लगा हूं। मैं खुद को साधारण रखता हूं। रोजाना सुबह 5 बजे उठता हूं। मेरे कोच ने मुझे सिखाया है कि मैं खुद से बात करूं। मैं वैसा ही करता हूं। खुद को रोज समझता हूं। खुद को खुद से ही प्रेरित करता हूं।’

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