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सुशील कुमार के लिए की थी नेताओं ने सिफारिशें : भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष

भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि यदि कोटा हासिल कर लेने के बाद भी किसी पहलवान को कानूनी दांवपेंच में उलझाकर ओलंपिक में हिस्सा लेने से रोक दिया जाएगा तो इससे देश में कुश्ती की हत्या हो जाएगी।

गोण्डा | Updated: May 29, 2016 12:17 PM
वर्ष 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक और चार साल बाद लंदन खेलों में रजत पदक जीतने वाले सुशील कुमार।

भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि यदि कोटा हासिल कर लेने के बाद भी किसी पहलवान को कानूनी दांवपेंच में उलझाकर ओलंपिक में हिस्सा लेने से रोक दिया जाएगा तो इससे देश में कुश्ती की हत्या हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कोशिश भारतीय कुश्ती को विश्व मंच पर सम्मान दिलाने की है। परंपरा के विपरीत कार्य करके वे इसे गर्त में नहीं ले जाएंगे। सिंह ने कहा कि सुशील कुमार के नाम पर विचार करने के लिए उनके पास कई उच्च स्तरीय सिफारिशें भी आईं पर उन्होंने खेलों में राजनीतिक दखलंदाजी को अस्वीकार कर दिया।

कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद व कुश्ती महांसघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने शनिवार को जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर बिश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर एक बातचीत में कहा कि ओलंपिक में कुश्ती के न्यूनतम 48 किग्रा से लेकर अधिकतम 120 किग्रा के कुल नौ भार वर्ग होते थे। पर अब इसमें संशोधन करते हुए केवल सात भार वर्ग रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से सुशील कुमार एक प्रतिभावान पहलवान है और कुश्ती में देश का नाम रोशन करने में उसकी अहम भूमिका रही है। पर मौजूदा समय में नरसिंह यादव एक प्रतिभावान और योग्य खिलाड़ी हैं। उनका चयन पूरी निष्पक्षता और पारदशिर्ता के साथ किया गया है। इस स्थिति में सुशील कुमार को रियो भेजना नरसिंह यादव के साथ अन्याय होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है और महासंघ अदालत के निर्णय का सम्मान करेगा।

सिंह ने कहा कि नरसिंह यादव ने सितंबर 2015 में लास वेगास में हुई विश्व चैंपियनशिप में फ्रीस्टाइल के 74 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर रियो ओलंपिक का कोटा हासिल किया था। उस समय किन्हीं कारणों से सुशील कुमार ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था। अब वे स्वास्थ्य कारणों से प्रो कुश्ती लीग में शिरकत नहीं कर पाने का हवाला देते हुए ट्रायल की मांग कर रहे हैं। पर ऐसा करना भारतीय कुश्ती महासंघ की परंपरा के प्रतिकूल होगा। अगर कोटा हासिल करने के बाद भी किसी खिलाड़ी को ओलंपिक में हिस्सा लेने से रोका जाने लगा तो फिर देश में कुश्ती की हत्या हो जाएगी और कोई भी खिलाड़ी कोटा हासिल करने के लिए जान की बाजी नहीं लगाएगा।

उन्होंने कहा कि लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद सुशील कुमार ने अब तक बिना ट्रायल के 2014 के कामनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेकर स्वर्ण और इटली में रजत पदक जीता है। जबकि नरसिंह की बात करें तो उसने ओलंपिक प्रो कुश्ती लीग के दौरान विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले 74 किग्रा भार वर्ग में कुल 117 देशों के पहलवानों से प्रतिस्पर्धा करके कांस्य पदक के साथ कोटा हासिल किया। वे रियो ओलंपिक में इस भार वर्ग में खेलने वाले करीब 20 देशों में से सात देशों के उन खिलाड़ियों को परास्त करके आगे बढ़ा है, जिनसे उसका मुकाबला होना है। इसके साथ ही वह पदक के साथ कोटा प्राप्त करने वाला कुश्ती के इतिहास में देश का पहला पहलवान बन गया है।

बृजभूषण ने कहा कि सुशील कुमार अगर वास्तव में अनफिट थे तो उन्हें प्रो कुश्ती लीग के दौरान महासंघ को इस आशय की लिखित सूचना देनी चाहिए थी पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि नरसिंह इस भार वर्ग में बेहतर प्रतिभागी है क्योंकि वह 2006 से इस भार वर्ग में पूरे दबदबे के साथ खेल रहा है, जबकि सुशील जनवरी 2014 तक 66 किग्रा भार वर्ग में खेल रहे थे। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले नरसिंह यादव ने 2010 कामनवेल्थ खेलों में 74 किग्रा भार वर्ग में ही स्वर्ण पदक जीता था।

बताते चलें कि रियो के लिए अभ्यास शिविर में अपना नाम नहीं होने के बाद 32 वर्षीय सुशील कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करके नरसिंह यादव और उनके बीच ट्रायल की मांग की थी, जिससे यह तय हो सके कि रियो खेलों में 74 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? अध्यक्ष ने कहा कि अदालत आगामी 30 मई को इस मामले की अग्रिम सुनवाई करेगी पर यह मामला लंबा खिंचा तो इससे खिलाड़ियों की तैयारी पर भी असर पड़ सकता है।

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