बच्‍चे की खातिर र‍िंंग से दूर हुई थी, पर पति ने संभाला बेटा और मुक्‍के बरसा कर गोल्ड ले आई क‍व‍िता

मुक्केबाजी कविता को विरासत में अपने पिता भूप सिंह से मिली जो कि सेना में मुक्केबाजी का खेल खेलते थे।

Author नई दिल्ली | Updated: August 14, 2017 1:08 PM
कविता ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता जगदीश सिंह से मुक्केबाजी के गुण सीखे हैं।

कहते हैं कि एक कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है लेकिन क्या आप कभी सोच सकते हैं कि एक औरत की कामयाबी के पीछे एक मर्द का हाथ भी सकता है, जो हर कदम पर उसका साथ देता है। जहाँ हमारे देश में महिला सशक्तिकरण एक मुद्दा बना हुआ है वहीं कई ऐसे पुरुष भी हैं जो अपनी बेटी, बहन और पत्नी को सशक्त करने के लिए उनका हर कदम पर साथ देते हैं। एक डेढ़ साल के बच्चे की मां जिसने दो साल पहले मुक्केबाजी करना छोड़ दिया था लेकिन इन सालों में उसका जज़्बा कभी कम नहीं हुआ और आज उसने देश का नाम रोशन कर दिया है।

हम बात कर रहे हैं मुक्केबाज कविता चहल की। कविता चहल ने अपने बच्चे के लिए मुक्केबाजी से दूरी बना ली थी लेकिन उनके पती सुधीर कुमार ने उन्हें हिम्मत दी। अब फिर से मुक्केबाजी की शुरुआत करने के बाद कविता ने अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए अमेरिका के लॉस एंजलिस में चल रहे विश्व पुलिस खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। यहां मुक्केबाजी की फाइनल प्रतियोगिता में कविता ने लंदन मेट्रो पुलिस फॉर्स की हॉरगन को 3-0 से हराकर स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमाया। कविता अपनी कामयाबी के पीछे अपने पति का हाथ बताती हैं। उनका कहना है कि जब मैं हरियाणा पुलिस में अपनी दारोगा की नौकरी करके मुक्केबाजी की प्रैक्टिस के लिए जाती थी तो मेरे पति हमारे बच्चे का ध्यान रखते थे। उनके होते हुए मुझे कभी भी कोई परेशानी नहीं हुई है।

मुक्केबाजी कविता को विरासत में अपने पिता भूप सिंह से मिली जो कि सेना में मुक्केबाजी का खेल खेलते थे। कविता ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता जगदीश सिंह से मुक्केबाजी के गुण सीखे हैं। कविता जब 18 वर्ष की थीं, तब से ही वे मुक्केबाजी कर रही हैं। कविता ने 2007 में राष्ट्रीय मुक्केबाज प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। राष्ट्रीय स्तर पर अब तक कविता 28 स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कविता ने दो स्वर्ण, दो रजत और 7 कांस्य पदक जीते हैं। कविता के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा खेल का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार अर्जुना अवॉर्ड भी दिया जा चुका है।

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