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कभी शॉर्ट्स पहनने पर मिलते थे ताने, अब मुस्लिम लड़कियों के लिए प्रेरणा बनीं वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन; बोले पिता मोहम्मद जमील

साई के पूर्व कोच इमानी चिरंजीवी ने 2014 से निकहत को ट्रेनिंग दी है। वह कहते हैं, ‘उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी इच्छा शक्ति और एक समझदार मुक्केबाज बनने की क्षमता है।’

Nikhat Zareen wins her first World Championship medal
निकहत जरीन ने 19 मई 2022 को 52 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप उनका यह पहला पदक है। (सोर्स- ट्विटर/बीएफआई)

पूर्व फुटबॉलर और क्रिकेटर मोहम्मद जमील चाहते थे कि उनकी चार बेटियों में से कोई एक खिलाड़ी बने। यही सोचकर मूल रूप से निजामाबाद के रहने वाले जमील ने अपनी तीसरी बेटी निकहत जरीन के लिए एथलेटिक्स चुना। युवा निकहत दोनों स्प्रिंट स्पर्धाओं में स्टेट चैंपियन बनीं, लेकिन एक चाचा की सलाह पर बॉक्सिंग रिंग में उतरीं। निकहत ने वहां भी झंडे गाड़े और महज 14 साल की उम्र में वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैंपियन का ताज पहना। हालांकि, कंधे की चोट के कारण 2017 उनका बर्बाद हो गया। अब 5 साल बाद दर्द और निराशा से दूर निकहत विश्व चैंपियन हैं। निकहत ने तुर्की में विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में महिलाओं की 52 किग्रा फ्लाईवेट स्पर्धा के फाइनल में थाईलैंड की जितपोंग जुतामास पर 5-0 से जीत हासिल की।

बेटी के वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद भावुक मोहम्मद जमील ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना एक ऐसी चीज है जो मुस्लिम लड़कियों के साथ-साथ देश की हर लड़की को जीवन में बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरणा का काम करेगी। एक बच्चे (चाहे वह लड़का हो या लड़की) को अपना रास्ता खुद बनाना पड़ता है और निकहत ने अपना रास्ता खुद बनाया है।’

चाचा समसमुद्दीन के बेटों एतेशामुद्दीन और इतिशामुद्दनी के मुक्केबाज होने के कारण निकहत को परिवार के बाहर प्रेरणा की तलाश नहीं करनी पड़ी। उनके पिता ने बेटी को एक ऐसे खेल में प्रवेश करने से हतोत्साहित नहीं किया, जिसमें 2000 के दशक के अंत के बाद से निजामाबाद या हैदराबाद में किसी महिला मुक्केबाज को प्रतिस्पर्धा करते नहीं देखा गया था।

मुक्केबाजी में लड़कियों को शॉर्ट्स और शर्ट पहनने की आवश्यकता होती है। जमील परिवार के लिए यह आसान नहीं था। जमील कहते हैं, ‘मैं अपनी बेटी की पढ़ाई और खेल के लिए निजामाबाद शिफ्ट हुआ। उससे पहले 15 साल तक सऊदी अरब में एक सेल्स असिस्टेंट के रूप में काम करता था। निकहत की दो बड़ी बहनें डॉक्टर हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे निकहत के साथ-साथ उसकी छोटी बहन, जो बैडमिंटन खेलती है, की ट्रेनिंग पर भी समय देना पड़ता था। जब निकहत ने हमें बॉक्सर बनने की इच्छा जताई तब हमारे मन में कोई झिझक नहीं थी। लेकिन कभी-कभी, रिश्तेदार या दोस्त ताना मारा करते थे।’

जमील ने कहा, ‘रिश्तेदार हमसे कहते थे कि एक लड़की को ऐसा खेल नहीं खेलना चाहिए जिसमें उसे शॉर्ट्स पहनने पड़े। लेकिन हमने तय कर लिया था कि निकहत जो चाहेगी, हम उसका समर्थन करेंगे। उसके बाद, दो और मुस्लिम लड़कियां राष्ट्रीय मुक्केबाजी शिविर में शामिल हुईं। अब मैं उसे बताऊंगा कि कैसे वह दूसरों के लिए प्रेरणा बनी।’

जमील परिवार निकहत की वापसी की तैयारी कर रहा है। जमील ने कहा, ‘पिछले 2-3 साल से उसने अपनी पसंदीदा बिरयानी और निहारी को मिस किया है। एक बार जब वह ट्रेनिंग कैंप से फ्री होती है तो फिर से व्यस्त होने से पहले उसके पास परिवार के साथ समय बिताने के लिए सिर्फ 1-2 दिन ही होते हैं।’

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के पूर्व कोच इमानी चिरंजीवी ने 2014 से निकहत को ट्रेनिंग दी है। उन्होंने कहा, ‘निकहत जरीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी इच्छा शक्ति और एक समझदार मुक्केबाज बनने की क्षमता है, जो खेल को अच्छी तरह से समझता है। मुक्का मारने या मुक्के को चकमा देने जैसी चीजें स्वाभाविक रूप से उसके पास हैं। मुकाबलों के दौरान भी उसका दिमाग हमेशा सोचने की स्थिति में रहता है। ये चीजें उसे करियर में आगे बढ़ने में मदद करती हैं।’

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