scorecardresearch

मील का पत्थर साबित होगा महिला फुटबाल टूर्नामेंट

30 अक्तूबर तक होने वाले इस विश्व स्तरीय महिला फुटबाल के आयोजन का जिम्मा तीन राज्यों गोवा, ओड़ीशा व महाराष्ट्र को दिया गया है।

मील का पत्थर साबित होगा महिला फुटबाल टूर्नामेंट
सांकेतिक फोटो।

आत्माराम भाटी

आजादी के 75 साल के सफर में यह दूसरा अवसर होगा जब खेलों के राजा कहे जाने वाले व दुनिया के सबसे पसंदीदा खेल फुटबाल की वैश्विक स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन भारत की धरा पर अंडर-17 महिला फुटबाल विश्व कप के साथ 11 अक्तूबर से होने जा रहा है। इससे पहले साल 2017 में अंडर-17 पुरुष फुटबाल विश्व कप की मेजबानी करने का अवसर फीफा ने भारत को दिया था। इस टूर्नामेंट के शानदार आयोजन का ही पुरस्कार फीफा ने भारत को अंडर-17 महिला विश्व कप के रूप में दिया है।

देश में 30 अक्तूबर तक होने वाले इस विश्व स्तरीय फुटबाल के आयोजन का जिम्मा तीन राज्यों गोवा, ओड़ीशा व महाराष्ट्र को दिया गया है। गोवा के 19 हजार की दर्शक क्षमता वाले पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, ओड़ीशा के भुवनेश्वर में स्थित 15 हजार दर्शक क्षमता वाले कलिंगा स्टेडियम व महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित 55 हजार दर्शक क्षमता वाले डीवाई पाटिल स्टेडियम भारत सहित दुनिया की श्रेष्ठ 16 टीमों के बीच 15 दिन तक चलने वाले इस महाआयोजन के 32 मैचों को व्यवस्थित तरीके से करके फीफा व फुटबाल प्रेमियों को आनंदित करने में कोई कमी नहीं छोड़ने के मजबूत संकल्प के साथ तैयार हैं।

जहां तक इस टूर्नामेंट के इतिहास की बात है तो पहली बार दुनिया में युवा महिलाओं को फुटबाल में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए फीफा ने 2008 में अंडर-17 महिला विश्व कप फुटबाल का पहली बार न्यूजीलैंड में आयोजन कर शुरुआत की थी। उसके बाद हर दूसरे साल इसका आयोजन करने की घोषणा के तहत 2010 में त्रिनिदाद एंड टोबागो, 2012 में अजरबैजान, 2014 में कोस्टारिका, 2016 में जार्डन व 2018 में उरुग्वे मेजबानी कर चुके हैं। भारत इस टूर्नामेंट के सातवें संस्करण की मेजबानी करने वाला सातवां देश है। इसे 2020 में इसका आयोजन करने का अवसर मिला था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे 2022 तक स्थगित कर दिया गया।

इस टूर्नामेंट में दुनिया की 16 टीमें भाग ले रही हैंै, जिन्हें चार समूहों में रखा गया है। समूह एक में मेजबान भारत को फुटबाल के सुपर पावर ब्राजील, 2008 में पहले संस्करण के उपविजेता अमेरिका और पहली बार भाग ले रहे मोरक्को के साथ रखा गया है। वहीं समूह दो में 2008 में तीसरे स्थान पर रहने वाली जर्मनी व 2018 में तीसरे स्थान प्राप्त करने वाली न्यूजीलैंड के साथ नाइजीरिया व चिली की टीमें हैं। समूह तीन में गत विजेता स्पेन व उपविजेता मेक्सिको के साथ कोलंबिया व चीन है और समूह चार में दो चैम्पियन टीमें 2012 की विजेता फ्रांस व 2014 की विजेता और 2010 व 2016 की उपविजेता जापान के साथ पिछले टूर्नामेंट में चौथे स्थान पर रहने वाले कनाडा और तंजानिया को रखा गया है।

इस बार के सातवें संस्करण की ट्राफी के लिए जो प्रमुख टीमें दावेदारी में लग रही हैं, उनमें पूर्व विजेता रह चुकी स्पेन, फ्रांस, जापान के साथ अमेरिका व जर्मनी है। इनमें से ही किसी एक के हाथ में विजेता ट्राफी हो सकती है। लेकिन ब्राजील, कनाडा व न्यूजीलैंड की टीमें उलटफेर कर विस्मित कर सकती है, लेकिन ट्राफी को चूमने से पहले इन सभी टीमों को अपने समूह की तीन टीमों से लीग में, फिर क्वार्टर फाइनल व सेमी फाइनल में जीत के रथ को आगे बढ़ाते हुए फाइनल में पहुंच कर भी विजय पताका फहरानी होगी।

टूर्नामेंट के 24 लीग मैच के बाद 21 व 22 अक्तूबर को गोवा व नवी मुंबई में प्रत्येक समूह की प्रथम दो स्थानों पर रहने वाली टीमों के मध्य क्वार्टर फाइनल होगा। सेमी फाइनल मुकाबले गोवा के जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में 26 अक्तूबर को और खिताब व तीसरे स्थान के लिए मुकाबले 30 अक्तूबर को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में होंगे।

जहां तक मेजबान भारत की बात है तो यह टूर्नामेंट हमारी महिला खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तर की खिलाड़ियों के साथ खेल कर अपने खेल में सुधार करने के अवसर से ज्यादा नहीं है। क्योंकि क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिए भारत समूह की टीमों ब्राजील व अमेरिका को पछाड़ना आसान नहीं रहने वाला है। हमारी टीम के लिए एक मैच जीतना भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा। लेकिन जिस तरह से भारतीय युवा महिलाओं की टीम ने इस साल सैफ अंडर-18 का खिताब अपनी झोली में डाला है।

इस खिताब की प्रेरणा से उत्साहित व काफी समय से अपने कोच थामस डेनेरबी के मार्गदर्शन में मेहनत कर रही खिलाड़ी बड़ा उलटफेर कर सबको आश्चर्यचकित कर दे तो बड़ी बात होगी। भारतीय टीम के कोच थामस ने अपनी और से इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए काफी समय पहले 33 खिलाड़ियों का चयन कर लिया था जिसमें 12 खिलाड़ी सैफ अंडर-18 खिताब जीतने वाली टीम में शामिल थी। इसके अलावा सात खिलाड़ी झारखंड के ऐसे परिवार से आती है जो खेतीबाड़ी, दिहाड़ी मजदूरी करके अपना पेट पाल रहे हैं। ऐसे में इन खिलाड़ियों को पता है कि इस टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन उनके ही नहीं पूरे परिवार का स्तर सुधार सकता है। इसलिए वे जी जान से मैदान में पसीना बहाकर जीत के लिए कोई कसर छोड़ने वाली हैं।

भारतीय युवा महिला टीम का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में कैसा भी रहे, लेकिन इतना निश्चित है कि फीफा का यह आयोजन देश में फुटबाल की ओर बच्चों के साथ युवाओं को भी इस खेल की ओर आकर्षित करेगा। फीफा अध्यक्ष जियानी इनफेंटिनो ने जब इस टूर्नामेंट की मेजबानी भारत से करने को कहा तब उन्होंने कहा था कि दुनिया के 16 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले बेहतरीन युवा महिला खिलाड़ियों की कला को देखने के लिए
भारतीय फुटबाल प्रेमी कितने उत्सुक हैं यह हम सब जानते हैं।

फीफा अध्यक्ष की राय से सहमत भी हुआ जा सकता है। क्योंकि किसी भी देश व समाज में किसी चीज का कोई बड़ा सफल प्रेरणा वाला आयोजन व उपलब्धि नई पीढ़ी को अपनी और आकर्षित करती ही है। इसका उदाहरण क्रिकेट है जिसमें 1983 में विश्व विजेता के खिताब ने देश में इस खेल को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। क्रिकेट ही नहीं आज भारत की महिलाएं क्रिकेट के साथ हाकी, बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी, तीरंदाजी, निशानेबाजी और शतरंज में विश्व स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर देश के छोटे से छोटे शहर की गरीब परिवार की बेटियों के लिए खेल के मैदान में उतरने में प्रेरणा बन रही है।

फीफा भी अब चाहता है कि भारत में फुटबाल से ज्यादा से ज्यादा जुड़ाव लोगों का हो ताकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश से उन्हें प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से आर्थिक फायदा मिल सके। इसमें सच्चाई भी है कि जिस देश की फुटबाल में विश्व रैंकिंग सौ से बाहर हो उस देश की लगभग एक करोड़ आबादी विश्व कप के साथ यूरोपियन लीग के मैच आधी रात तक जगकर देखती हैं तो इस देश में फुटबाल की तरक्की हो तो फीफा को फायदा ही होना है। यही सबसे बड़ा कारण है कि फीफा भारत को छोटे स्तर के आयोजन दे कर फुटबाल का विस्तार कर भविष्य में और बड़े आयोजन देने को आतुर है।

पढें खेल (Khel News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

First published on: 28-09-2022 at 10:21:19 pm
अपडेट