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कलंकः संकट में घिरीं महिला खिलाड़ी

विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चार सौ मीटर की स्पर्धा में हिमा दास को स्वर्ण पदक मिलने की ऐतिहासिक उपलब्धि के एक पखवाड़े बाद ही खबर आई कि एक महिला एथलीट की शिकायत के बाद उनके कोच पर गुवाहाटी पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोप में कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

Author August 23, 2018 7:10 AM
2014 में एक महिला जिमनास्ट ने एफआइआर में जो आरोप लगाया उससे तो यही जाहिर होता है कि प्रशिक्षण शिविरों में महिला खिलाड़ियों के प्रति किस तरह का बेहूदा नजरिया रखा जाता है।

विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की चार सौ मीटर की स्पर्धा में हिमा दास को स्वर्ण पदक मिलने की ऐतिहासिक उपलब्धि के एक पखवाड़े बाद ही खबर आई कि एक महिला एथलीट की शिकायत के बाद उनके कोच पर गुवाहाटी पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोप में कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस घटना ने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा का सवाल फिर खड़ा कर दिया है। हरियाणा की एक वॉलीबॉल खिलाड़ी की शिकायत तो और भी दहलाने वाली है। इस नाबालिग खिलाड़ी ने आरोप लगाया है कि वह दो साल से अपने कोच की बेहूदी हरकतें झेल रही है।

पिछले दिनों ही ‘साई’ यानी भारतीय खेल प्राधिकरण ने तीन क्षेत्रीय केंद्रों में महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिलने पर एक कोच को बर्खास्त कर दिया और दूसरे के खिलाफ जांच बैठा दी गई। एक कर्मचारी को जबरन रिटायर कर दिया गया है। तीन शिकायतें अलग-अलग मिजाज की थीं लेकिन उनका मतलब महिला खिलाड़ियों के लिए एक ही मानसिक विकार वाले अधिकार संपन्न अधिकारी या कोच की लोलुपता को बर्दाश्त करो नहीं तो करिअर तबाह। ‘साई’ के तमिलनाडु केंद्र की 15 एथलीटों ने मुख्यालय को शिकायत की कि कोच ने उन्हें कथित तौर पर धमकी दी है कि अगर उन्होंने उसकी यौन संतुष्टि नहीं की तो वह उनका करिअर चौपट कर देगा। आंतरिक स्तर पर शिकायत की जांच के बाद कोच की छुट्टी कर दी गई। इस प्रक्रिया में तीन महीने लग गए। गुजरात केंद्र की एक जूनियर खिलाड़ी की इसी तरह की शिकायत पर ‘साई’ जांच करा रहा है। बंगलूर केंद्र में तो एक महिला कोच ही अकाउटेंट की अश्लील टिप्पणियों का निशाना बनी। गुजरात केंद्र के आरोपी कोच के मामले में जांच हो रही है। बंगलूर केंद्र के कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।

‘साई’ की महानिदेशक नीलम कपूर ने माना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों की त्वरित जांच होनी चाहिए और समूची प्रशिक्षण प्रणाली को दुरुस्त किया जाना चाहिए। ‘साई’ के देशभर के केंद्रों में करीब सात हजार लड़कियां विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण पा रही हैं। जाहिर है कि शुरुआती स्तर पर ही अगर उन्हें इस तरह की बाधाओं का सामना करन पड़े तो उनमें आगे बढ़ने का उत्साह कैसे बचेगा? हाल फिलहाल की घटनाएं कोई पहली बार नहीं हुई है। 2016 में तीरंदाजी कोच के खिलाफ अपनी प्रशिक्षु का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद भी यह सवाल उठा था कि क्या निचले स्तर पर लड़कियों का किसी खेल में प्रशिक्षण लेना सुरक्षित रह गया है। कोच के खिलाफ शिकायत की हिम्मत एक खिलाड़ी ने ही दिखाई और वह भी तब जब उसकी व कोच की फोन पर हुई बातचीत वायरल हो गई।

2014 में एक महिला जिमनास्ट ने एफआइआर में जो आरोप लगाया उससे तो यही जाहिर होता है कि प्रशिक्षण शिविरों में महिला खिलाड़ियों के प्रति किस तरह का बेहूदा नजरिया रखा जाता है। दो सितंबर 2014 की जिस घटना की महिला जिमनास्ट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, उसके कई पहलू थे। राष्ट्रीय स्तर की महिला जिमनास्ट ने आरोप लगाया कि दो प्रशिक्षकों ने उसके अंतरंग वस्त्रों पर अश्लील टिप्पणी की और अभद्र इशारे किए। घटना के दस दिन बाद संघ के पदाधिकारियों ने उसे होटल में बुला कर मामले को रफा-दफा करने के लिए मनाने की कोशिश की। इसके बाद खिलाड़ी पुलिस के पास गई तो शुरुआती आनाकानी के बाद बड़े अधिकारियों के दबाव में उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई। लेकिन हुआ कुछ नहीं। विश्व विख्यात मुक्केबाज मेरी कॉम भी मानती हैं कि महिला खिलाड़ियों को शुरू में अक्सर मुश्किल और अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। और कुछ नहीं तो लड़की होने के नाते उन्हें हीनभावना से जीने को मजबूर किया जाता है। उन पर वजह-बेवजह किसी भी तरह का लांछन लगाना आम बात है।

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