‘अमीरों का खेल’ कहकर गोल्फ को नजरअंदाज करने की धारणा पर महिला गोल्फ एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष कविता सिंह ने सवाल खड़े किये हैं। महिला इंडियन ओपन 2026 के आयोजन की मंगलवार 29 सितंबर को घोषणा की गई। इस दौरान जब सरकारी मदद को लेकर सवाल पूछा गया तो कविता सिंह ने साफ कहा, “सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिलती।”
कविता सिंह ने कहा, ‘‘हम ही लोग खुद जोर लगाते हैं कि लीग के दौरे के दौरान खिलाड़ियों को टिकट और अन्य चीजों में छूट मिल सके। इसके लिए हमें खुद एयरलाइंस से बात करनी पड़ती है। सरकार का सहयोग सिर्फ तभी दिखता है जब खिलाड़ी एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल या ओलंपिक में खेलने जा रहे हों।’’ कविता सिंह ने कहा कि लीग की बात करें तो कोई सहयोग नहीं मिलता, जबकि हकीकत यह है कि खिलाड़ी लीग और राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलकर ही बड़ा बनता है। उसके बाद ही ओलंपिक खेलों जैसे स्तर तक पहुंच पाता है।
कविता सिंह ने बताया, ‘‘गोल्फ बस अमीरों का खेल है, यह सिर्फ एक कहावत बना दी गई है। एक टूर्नामेंट के दौरान मैं खेल मंत्रालय के लोगों से मिली। अपने खिलाड़ियों के लिए सहायता मांगी। वहां से मुझे जवाब मिला- गोल्फ अमीरों का खेल है, आप लोग खुद प्रबंध कर सकते हैं।’’ कविता ने याद दिलाया कि उन्होंने यह बात तब कही थी जब महिला टीम पहली बार ओलंपिक में शामिल होने गई थी और गोल्फ पहली बार ओलंपिक में आया था।
कविता सिंह ने कहा कि वह हमेशा से महिलाओं के लिए मदद को तत्पर रही हैं। कविता ने कहा, ‘‘मैंने उनसे (खेल मंत्रालय के लोगों से) गोल्फ के इक्विपमेंट के लिए बोला, लेकिन सिर्फ निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर, खिलाड़ियों को अच्छी किट तक नहीं देते। देते भी हैं तो साइज की नहीं रहती। अगर साइज की मिल भी गई तो वह फट जाती है।’’
कविता सिंह ने कहा कि यह सब करना खेल मंत्रालय का दायित्व है। यह उनका काम है न कि मेरा। कविता सिंह ने कहा, ‘‘विदेश में खिलाड़ी गोल्फ खेलते हैं, नाम होता है। अपने यहां जमीन की कोई कमी नहीं है। गांव में, शहर में गोल्फ के बारे में सोचें, पिच के बारे में सोचें। खिलाड़ियों की व्यवस्था हम लोग करते हैं, लेकिन सरकार का भी दायित्व है कि वह भी गोल्फरों के बारे में सोचे। अन्य विकासशील देशों में सरकार हर स्तर पर सहयोग करती है, चाहे वह लीग हो या बड़ा टूर्नामेंट।’’
कविता सिंह ने जमीनी हकीकत को लेकर कहा, ‘‘कभी गाड़ी नहीं होती, कभी पानी नहीं मिलता। जो लोग पवेलियन में बैठकर खेल देखते हैं, वे आराम से रहते हैं और यहां खिलाड़ियों को पानी तक नहीं मिल पाता। दिग्गज गोल्फर चंपिका सयाल ने भी सरकार के विजन पर सवाल उठाए।
चंपिका सयाल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह बराबरी के मौके की बात है, जो हमारे पास नहीं है। हमारे खेलों में बहुत सुधार हुए हैं, लेकिन गोल्फ एक बहुत ही खास खेल है। इसके लिए एक बहुत ही ध्यान केंद्रित करने वाले विजन की जरूरत है। फिलहाल इस खेल के लिए सरकार के पास कोई विजन ही नहीं है। उन्हें लगता है कि सब अपने आप हो जाएगा- करने दो जो कर सकते हैं वे करेंगे।’’
चंपिका सयाल ने कहा कि सरकार ग्रासरूट लेवल की बात तो बहुत करती है, लेकिन जब तक आप जमीनीस्तर के लोगों और छोटे बच्चों को बराबरी का मौका ही नहीं देंगे तो आपने इस खेल को भारत के युवाओं से दूर कर दिया है। खेल मंत्रालय को अपनी धारणा बदलनी होगी और इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराना होगा, जिसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे ज्यादा जरूरी है और वही गायब है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा देश बहुत बड़ा है, यहां बहुत अवसर हैं। यह करियर के तौर पर खिलाड़ियों के लिए और गोल्फ क्लबों में नौकरियों के रूप में मौके दे सकता है। यह एक स्किल गेम है, इसलिए स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय और खेल मंत्रालय को मिलकर अगले पांच साल में इस पर काम करना होगा। यह बहुत-बहुत महत्वपूर्ण है।’’
‘तीन पूर्व चैंपियन करेंगी वापसी’
विमेंस इंडियन ओपन 2026 का आयोजन 22 से 25 अक्टूबर तक गुरुग्राम के डीएलएफ गोल्फ एंड कंट्री क्लब में होगा। इस बार टूर्नामेंट में 5 लाख अमेरिकी डॉलर की इनामी राशि होगी। पिछले चार साल की तीन चैंपियन इस बार वापसी कर रही हैं। इमें गत चैंपियन सिंगापुर की शैनन टैन, 2024 की विजेता इंग्लैंड की लिज यंग और 2022 की विजेता जर्मनी की ओलिविया कावन शामिल हैं।
