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विंबलडन : घसियाली सतह पर फिर छिड़ेगी तजुर्बेकारों में जंग

विलियम्स सात बार की चैंपियन हैं। 2015 व 2016 में उन्होंने लगातार यह खिताब जीता है। इस बार उनके अलावा पैट्रा केवित्वोवा, मुगुरेजा, केरोलिया प्लीस्कोवा और सिमोना हालेप भी दावेदारों में शामिल हैं।

टेनिस को ‘पॉवर गेम’ माना जाता है।

मनीष कुमार जोशी

टेनिस की दुनिया के दूसरे ग्रैंडस्लैम से बिलकुल अलग विंबलडन की अपनी एक अलग पहचान है। यह सबसे पुराने टूर्नामेंटों में से एक है। इस खेल के अन्य ग्रैंडस्लैम कठोर सतह पर खेले जाते हैं चाहे वह आस्ट्रेलिया ओपन हो अमेरिकी ओपन या फ्रेंच ओपन। वहीं विंबलडन ग्रास कोर्ट पर खेला जाता है। इसलिए यहां जो जीतता है वह जीतता ही चला जाता है और जो हारता है उसके हारने का सिलसिला भी जल्द नहीं थमता।

टेनिस ही नहीं दूसरे खेलों के प्रशंसकों को भी विंबलडन का बेसब्री से इंतजार रहता है। भारतीय क्रिकेट सितारे भी इससे अछूते नहीं हैं। बात चाहे सचिन तेंदुलकर की हो, सुनील गावस्कर की या रवि शास्त्री की, सभी को इसका मजा लेते हुए देखा जा सकता है। इसकी प्रतिष्ठा को देखते हुए पुरस्कार राशि में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उम्रदराज होने के बावजूद रोजर फेडरर प्रमुख दावेदार बने हुए हैं। सट्टा बाजार में भी नोवाक जोकोविच के बाद फेडरर पर ही दांव लगाया जा रहा है। जोकोविच को भी कम नहीं आंका जा सकता। वे भी खिताब के प्रबल दावेदारों में हैं। उनके लिए सबसे अहम पक्ष है कि वे पिछले साल के चैंपियन हैं। उन्होंने गत वर्ष फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन को सीधे सेटो में 6-2, 6-2, 7-3 से पराजित किया था। वे चार बार के विंबलडन चैंपियन हैं।

उन्होंने 2011, 2014, 2015 और 2018 में इस खिताब को जीता है और इस इस बार भी वे तगड़े दावेदार हैं। राफेल नडाल भी दावेदारों में शामिल हैं। विंबलडन नया चैंपियन बहुत कम बार ही देता है। इस ग्रास कोर्ट पर चैंपियन का दोहराव होता आया है। इसलिए इस बार भी नए विजेता की संभावना कम ही है। फिर भी पैट्रो, एंडरसन और ज्वेरेव जैसे युवा खिलाड़ी भी अपना जलवा दिखा सकते हैं। महिला वर्ग में सेरेना विलियम्स अभी भी पसंदीदा दावेदार बनी हुई हैं। सट्टा बाजार में सबसे ज्यादा दांव विलियम्स पर ही लग रहा है। गत साल वे उपविजेता रही थीं। फाइनल में जर्मनी की युवा खिलाड़ी करबर ने सेरेना को सीधे सेटों में 6-3, 6-3 से पराजित कर दिया था।

विलियम्स सात बार की चैंपियन हैं। 2015 व 2016 में उन्होंने लगातार यह खिताब जीता है। इस बार उनके अलावा पैट्रा केवित्वोवा, मुगुरेजा, केरोलिया प्लीस्कोवा और सिमोना हालेप भी दावेदारों में शामिल हैं। सेरेना ने ताकत की बजाय धैर्य और संयम का खेल दिखाया तो वे एक बार फिर चैंपियन बन सकती हैं। यदि वो युवा करबर जैसी खिलाड़ियों के सामने हथियार न डाल कर दिमाग से खेलेंगी तो एक बार फिर विंबलडन का ताज पहनेंगी।

दुनिया की प्रतिष्ठित टेनिस प्रतियोगिता में सबसे ऊपर स्थान पाने वाली विंबलडन ने इस बार भी पुराने खिलाड़ियों पर ही दांव लगाए हैं। हालांकि यह भी तय है कि युवा खिलाड़ी अपने खेल से चौंकाने की कोशिश में जुटे होंगे। ग्रास कोर्ट पर खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट की एक खासियत और होती है। यहां गेंद रुक कर आती हैं इसलिए यहां तेजी काम नहीं करती। गेंद को देखकर ही शॉट का निर्णय करना पड़ता है। ऐसे में जोश से ज्यादा अनुभव अहम होगा।

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