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कपिल, श्रीनाथ के रहते अजहरुद्दीन ने सचिन तेंदुलकर से कराया था आखिरी ओवर, 5 रन नहीं बना पाई थी दक्षिण अफ्रीका

आखिरी ओवर में दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 6 रन बनाने थे। उसके 2 विकेट गिरने बाकी थे। तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने करीब 5 मिनट तक चर्चा करने के बाद सचिन तेंदुलकर को आखिरी ओवर फेंकने के लिए दिया और भारत ने वह मैच 2 रन से जीत लिया।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: November 25, 2020 5:40 PM
India vs South Africa 2003 Hero Cupसचिन तेंदुलकर की जादुई गेंदबाजी के दम पर भारत ने दक्षिण अफ्रीका को सेमीफाइनल में हराकर वेस्टइंडीज से फाइनल खेला था। (फाइल फोटो)

सचिन तेंदुलकर ने अपने बल्ले से अनगिनत बार टीम इंडिया के लिए मैच विनिंग पारी खेली है। हालांकि, यह कम लोगों को पता होगा कि वह अपनी गेंदबाजी के दम पर भी भारत को जिता चुके हैं। टेस्ट क्रिकेट के शुरुआती 3 मैचों में शतक लगाने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज मोहम्मद अजहरुद्दीन ने स्पोर्टस्टार से बातचीत में 1993 में हीरो कप से जुड़ीं कुछ यादें शेयर की थीं।

इसमें उन्होंने बताया था कि 24 नवंबर 1993 को सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आखिरी ओवर फेंकने के लिए सचिन तेंदुलकर को क्यों जिम्मेदारी सौंपी थी। वह भी तब जब दक्षिण अफ्रीका को आखिरी ओवर में सिर्फ 6 रन बनाने थे और उसके 2 विकेट गिरना शेष थे।अजहर ने बताया, ‘हम जानते थे कि उस लेवल के मैच में किसी भी गेंदबाज के ओवर में 6 रन आसानी से बन सकते हैं। इसलिए हमने अलग रणनीति अपनाने की सोची। सचिन तेंदुलकर से गेंदबाजी कराने का विचार अपने आप आया था। अचानक लिया गया फैसला।’

अजहर ने बताया, ‘आखिरी ओवर फेंकने से पहले मैं, वरिष्ठ खिलाड़ी कपिल देव और सचिन तेंदुलकर चर्चा कर रहे थे। इतने में 12वें खिलाड़ी वेंकटपति राजू ड्रेसिंग रूम से पानी की बोतलें लेकर दौड़ते हुए हमारे पास आए। निश्चित रूप से वह टीम प्रबंधन का संदेश हम तक पहुंचाना चाहते थे। टीम मैनेजर अजित वाडेकर थे। अन्य लोगों की तरह वह भी चाहते थे कि आखिरी ओवर कपिल देव फेंके और यही संदेश राजू हम तक पहुंचाने आए थे।’

2003 में ऑउटलुक को दिए साक्षात्कार में अजित वाडेकर ने कहा था, ‘कपिल थोड़ा सा सोच रहे थे। वह गेंदबाजी करने में संकोच कर रहे थे। इतने में सचिन ने गेंद को लपक लिया।’ अजहर ने बताया, ‘आखिरी महत्वपूर्ण ओवर फेंकने से पहले हमने करीब पांच मिनट लिए। इसके लिए अंपायर्स को भी धन्यवाद देना चाहता हूं।’

उस मैच में सलिल अंकोला भी खेल रहे थे। उन्होंने 6 ओवर में 21 रन दिए थे। उनके ओवर भी बाकी थे। सलिल अंकोला ने क्रिकेटकंट्री को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं डीप स्क्वायर लेग पर फील्डिंग कर रहा था। मुझे अच्छे से नहीं पता कि तीनों के बीच क्या बातें चल रही थीं, लेकिन देखने से लग रहा था कि टेंडल्या (सचिन तेंदुलकर) आखिरी ओवर फेंकने के लिए उत्सुक था। विकेट पर बहुत ज्यादा ड्यू था और टेंडल्या ऐसे में खतरनाक साबित हो सकता था, क्योंकि वह हर तरह की गेंदें फेंक लेता था।’

हुआ भी यही। सचिन ने आखिरी ओवर फेंका। उनकी पहली गेंद पर ब्रायन मैकमिलन ने दो रन लेने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर पर खड़े फेनी डिविलियर्स दूसरा रन लेने के चक्कर में रन आउट हो गए। उनकी जगह एलन डोनाल्ड क्रीज पर आए। वह सचिन की अगली तीन गेंदों में एक भी रन नहीं बना पाए।

हालांकि, चौथी गेंद पर वह एक रन लेकर मैकमिलन को स्ट्राइक देने में सफल रहे। आखिरी गेंद पर मैकमिन को 4 रन बनाने थे, लेकिन वह सिर्फ एक रन ही ले पाए और भारत ने 2 रन से वह मैच जीत लिया और फाइनल में प्रवेश किया। भारत ने फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर हीरो कप अपने नाम किया था।

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