टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका के कप्तान मोनांक पटेल डेढ़ दशक पहले गुजरात के अंडर-19 क्रिकेटर के तौर पर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में उतरे थे तो उनके साथ एक और दुबला-पतला तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह था, जिसका बॉलिंग एक्शन अजीब था। अक्षर पटेल भी उनके साथी थे। जूनियर क्रिकेट के दिनों में मोनांक ने भारत के लिए नीली जर्सी पहनने का सपना देखा था। उनका यह सपना पूरा नहीं हुआ और वह अमेरिका में रेस्तरां खोलने चले गए। इसके बाद मोनांक ने कभी यह नहीं सोचा होगा कि वह अपने देश में वर्ल्ड कप खेलेंगे और बुमराह और अक्षर उनके खिलाफ खड़े होंगे।

मोनंक ने पुराने दिनों को याद करते हुए पीटीआई से कहा, ‘हां, अक्षर पटेल और जसप्रीत बुमराह के साथ खेलने की मेरी बहुत अच्छी यादें हैं। मैंने गुजरात अंडर-19 का अपना पहला साल जसप्रीत के साथ खेला था और उससे पहले मैंने अक्षर के साथ अंडर-16 खेला था। हम (बुमराह और मैं) दो साल, दो सीजन तक साथ थे। गुजरात की टीम के लिए बहुत सारे मैच खेले।’

बुमराह तब भी बाकी सबसे बेहतर थे

मोनांक बताते हैं कि बुमराह तब भी बाकी सबसे बेहतर थे। उन्होंने कहा, ‘हमने रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल दोनों तरह की क्रिकेट खेली और वह सच में बहुत खास पल थे। यह मेरे क्रिकेट करियर की शुरुआती स्टेज थी और उस समय भी, जिस तरह से जसप्रीत प्रदर्शन कर रहा था हमें पता था कि उसमें वह एक्स-फैक्टर है और वह पक्का कुछ बहुत बड़ा करेगा।’

रेस्तरां शुरू करने के बाद भी मोनंक क्रिकेट से दूर नहीं हुए

मोनंक के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट की राह आसान नहीं थी। 2013 में जब उन्होंने हमेशा के लिए अमेरिका में बसने का फैसला किया तो उन्होंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोचा था। उन्हें 2010 में ही ग्रीन कार्ड मिल गया था। मोनंक ने रेस्तरां का बिजनेस शुरू किया, लेकिन क्रिकेट से दूर नहीं हुए।

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मोनांक का अमेरिका बसने का फैसला

मोनांक ने बताया, ‘मेरे पास 2010 से ग्रीन कार्ड था और मैंने 2013 के बाद तय किया कि मैं अमेरिका जाना चाहता हूं। मेरा परिवार पहले से ही वहां बसने का प्लान बना रहा था। मैंने वहां करीब एक महीने रहने की कोशिश की और फिर भारत वापस आ गया और रणजी ट्रॉफी में गुजरात के लिए खेलने का खुद को एक आखिरी मौका दिया। जब मुझे वह मौका नहीं मिला, तो मैंने अमेरिका वापस जाने और हमेशा के लिए वहीं बसने का फैसला किया। जब मैं अमेरिका आया, तो मेरा विजन और गोल सिर्फ क्रिकेट खेलना नहीं था। मैं अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहता था।’

अमेरिका में क्रिकेटर बनने का सफर

अमेरिका में क्रिकेट टॉप-10 खेलों में भी शामिल नहीं है। मोनांक के लिए पेशेवर क्रिकेटर बनने का सफर जोखिमों से भरा था क्योंकि इस खेल की कमर्शियल सफलता को लेकर अनिश्चितता थी। उन्होंने कहा, ‘2018 में यह आसान नहीं था। सिर्फ क्रिकेट खेलकर आर्थिक रूप से गुजारा करना हमारे लिए आसान नहीं था। इसलिए, जब हम 2018 या 2019 में खेलते थे तो पूरे साल हमारा शेड्यूल बिजी नहीं रहता था। बाद में, जैसे ही हमने अच्छा खेलना शुरू किया और 2020 में हमें वनडे का दर्जा मिला तो सबकुछ आर्थिक रूप से और मौकों के हिसाब से भी बेहतर हो गया। पहले दो-तीन साल एक खिलाड़ी के तौर पर थोड़े मुश्किल थे, लेकिन हमने इसे बहुत अच्छे से मैनेज किया।’

मोनांक को मिला परिवार से सपोर्ट

मोनांक कहते हैं कि यह सब उनके परिवार के सपोर्ट के बिना नहीं हो पाता, जिसने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने दिया। उन्होंने कहा, ‘सारा क्रेडिट मेरे परिवार को जाता है। उनके सपोर्ट के बिना, अमेरिका में गुजारा करना बहुत मुश्किल है। हमें 2020 में वनडे का दर्जा मिला, जो मौके हमें मिले, उनसे हमें प्लेयर्स के तौर पर मदद मिली और फाइनेंशियली भी फायदा हुआ। सब कुछ बस बेहतर होता गया।” अमेरिका अपने अभियान की शुरुआत भारत के खिलाफ 7 फरवरी को करेगा। पूरी खबर पढ़ें

पीटीआई इनपुट से खबर