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क्रिकेट में स्लेजिंग: जब बल्लेबाज ने पिच पर ही बैट दिखा दी धमकी और विकेटकीपर ने झुक कर कहा- लो, करके दिखाओ

क्रिकेट में स्लेजिंग के कई मौके ऐसे आए जब खिलाड़ियों को जीत के लिए आपा खोते देखा गया। साल 1986 में भी कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला वाकया देखने को मिला था, जो शायद ही कभी दोबारा हो।

चेन्नई में 1986 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए टेस्ट मैच में कंगारू विकेटकीपर टिम जोहरर झुककर चेतन शर्मा को दिखाते हुए। (फोटो सोर्सः यूट्यूब)

क्रिकेट का इतिहास भी एक से एक मौकों का गवाह रहा है। इस खेल ने कभी विश्व विजेता बनाए, तो किसी को इसमें मुंह की खानी पड़ी। कई ऐसे भी मौके आए जब खिलाड़ियों ने जीत के लिए स्लेजिंग का सहारा लिया। जीत के लिए उन्हें आपा खोते देखा गया। कुछ ऐसा ही एक वाकया साल 1986 में देखने को मिला था, जो शायद ही कभी दोबारा हो। स्लेजिंग के दौरान बल्लेबाज ने मैदान में विकेटकीपर को उसके पुट्ठे में बल्ला घुसाने की धमकी दी, जिसके जवाब में विकेटकीपर ने झुक कर कहा था, लो कर के दिखाओ।

खिलाड़ी और खेल प्रेमियों को हैरान करने वाला यह वाकया तमिलनाडु के चेन्नई का है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच खेले जा रहे थे। स्लेजिंग का यह मामला दूसरे टेस्ट मैच का है। आखिरी मौके पर मैच तगड़ी तरह फंसा था। कंगारुओं को विकेट चाहिए थे।

घटना से जुड़े वीडियो के मुताबिक, पिच पर भारतीय टीम की ओर से चेतन शर्मा बल्लेबाजी कर रहे थे। गेंदबाज की पहली गेंद पर वह जोरदार चौका जड़ते हैं। दूसरी गेंद पर उनसे गेंद मिस हो जाती है, तो कंगारू विकेटकीपर टिम जोहरर उन्हें स्टंप आउट कर अंपायर से आउट देने की अपील करते हैं। वह नॉटआउट होते हैं। अंपायर के यह फैसला देते ही, चेतन टिम के पास पहुंचते हैं। पहले तो वह उन्हें अंगुली दिखाकर धमकाते हैं और फिर बल्ला दिखाकर उनके पुट्ठे में घुसाने की बात कहते हैं। टिम इस पर झल्लाकर झुक जाते हैं और कहते हैं कि लो कर के दिखाओ।

भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी मनिंदर शर्मा इस घटना के बारे में बताते हैं कि तब मैच बुरी तरह फंसा था। कंगारू किसी भी हालत में भारतीयों को रन नहीं देना चाहते थे। अगर वे लगातार विकेट लेते रहते, तो मैच जीत जाते।

क्या होती है स्लेजिंगः जब मैच के दौरान खिलाड़ी खुद को या टीम को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरे खिलाड़ियों पर ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करते हैं, तो उसे स्लेजिंग माना जाता है।

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