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VIDEO: …जब ऑस्‍ट्रेलि‍याई क्र‍िकेटर पर भड़के सुनील गावस्‍कर ने खींच ल‍िया था चेतन चौहान का हाथ और बीच मैच में छोड़ने लगे मैदान

मेलबॉर्न टेस्ट में डेनिस लिली की लो गेंद सुनील गावस्कर के बैट पर लगने के बाद पैड पर लगी। गेंदबाज ने अपील की तो अंपायर रेक्स वाइटहेट ने भी गावस्कर को आउट दे दिया।

पवेलियन की ओर लौटने के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने गावस्कर को कुछ अपशब्द कह डाले, जिससे लिटिल मास्टर गुस्सा गए।

क्रिकेट में अगर स्लेजिंग की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया इस मामले में हमेशा ही आगे दिखा है। यूं तो स्लेजिंग कंगारुओं के खेल का अहम हिस्सा रही है लेकिन 1980-81 की सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने इस कदर स्लेजिंग कर दी कि इससे गुस्साए लिटिल मास्टर टेस्ट मैच ही खत्म करने को कहने लगे। अगर ऐसा हो जाता तो भारत इस मैच को हार जाता लेकिन समय रहते मामला शांत कर लिया गया।

दरअसल ये वाकया मेलबॉर्न टेस्ट का है। डेनिस लिली की लो गेंद सुनील गावस्कर के बैट पर लगने के बाद पैड पर लगी। गेंदबाज ने अपील की तो अंपायर रेक्स वाइटहेट ने भी गावस्कर को आउट दे दिया। लेकिन अंपायर के उंगली उठाने से पहले ही पवेलियन की ओर रुख करने के लिए मशहूर गावस्कर उस वक्त ये कहने लगे कि वह नॉट आउट हैं। इतने में डेनिस लिली गावस्कर के पास आए और उनके पैड को छूकर बताने लगे कि आप आउट हैं। इससे निराश कप्तान गावस्कर जब पवेलियन की ओर लौटने लगे तो एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने गावस्कर को कुछ अपशब्द कह डाले। बस फिर क्या था। लिटिल मास्टर इतना गुस्सा गए कि नॉन स्ट्राइक एंड पर खड़े चेतन चौहान को पुश करते हुए पवेलियन लौटने को कहने लगे। चेतन चौहान को भी मजबूरन मैदान छोड़कर वापस लौटना पड़ा। ये घटना देखकर सारे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैरान रह गए। लेकिन भारतीय टीम के ग्रुप मैनेजर मैनेजर एसएके दुर्रानी ने मौका रहते चौहान को मैदान से बाहर आने से रोक दिया।

हालांकि 2014 में एक टीवी शो के दौरान संजय मांजरेकर और कपिल देव के सामने गावस्कर ने ये बात स्वीकारी थी कि उन्हें इस फैसले पर आज भी अफसोस है। उन्होंने इस दौरान कहा कि, ‘कप्तान होने के नाते मेरा फैसला बिल्कुल गलत था। मैं चाहे आउट था या नहीं मगर मुझे इस तरह का व्यवहार बिल्कुल नहीं करना चाहिए था।’

10 जुलाई 1949 को जन्में सुनील गावस्कर ने 125 टेस्ट मैचों में 16 बार नाबाद रहते हुए 34 शतक और 45 अर्धशतक की मदद से 10122 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने नाबाद 236 रन की भी पारी खेली थी। वहीं बात अगर वनडे की करें तो इस खिलाड़ी ने 108 मैचों में 62.26 की स्ट्राइक के साथ 3092 रन बनाए। गावस्कर को 1975 में अर्जुन पुरस्कार, 1980 में विस्डन और उसी वर्ष पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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