मानव तस्करी के शक से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कुछ लोग खुद को भारतीय पहलवान बताकर हंगरी जाने के लिए वीजा हासिल करने की साजिश रच रहे थे। इसके लिए उन्होंने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (Wrestling Federation of India) के नाम से जारी कथित सिफारिशी पत्र भी दूतावास में जमा कराया।
जांच में यह दस्तावेज फर्जी निकला, जिसके बाद पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं और संभावित मानव तस्करी की आशंका जताई जा रही है। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने साफ किया है कि जमा किए गए दस्तावेज नकली थे। दूतावास ने गुरुवार 12 मार्च 2026 को WFI से सत्यापन मांगा। दूतावास को जो वीजा आवेदन मिले थे, उसके समर्थन में एक सिफारिशी पत्र भी लगा था।
यह सिफारिशी पत्र कथित तौर पर भारतीय कुश्ती महासंघ ने 04 मार्च को जारी किया था। यह पत्र बुडापेस्ट में 15 से 22 मार्च तक होने वाले इंटरनेशनल रेसलिंग ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए था।
WFI ने पकड़ी फर्जी सिफारिश
डब्ल्यूएफआई (WFI) ने तुरंत जवाब दिया और कहा कि पत्र नकली था और इसे फेडरेशन ने जारी नहीं किया था। डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने दूतावास को भेजे जवाब में कहा, ‘इसका संदर्भ 12 मार्च के आपके ई-मेल से है जिसमें दस्तावेज के असली होने के बारे में सफाई मांगी गई थी… साथ में दिया गया पत्र नकली है और इसे रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने जारी नहीं किया है।’
महासंघ ने दस्तावेज में कुछ कमियां भी बताईं, जिसमें एक पुराने पदाधिकारी के नाम का गलत तरीके से इस्तेमाल होना भी शामिल है। संजय सिंह ने कहा, ‘यह भी साफ किया जाता है कि मिस्टर वीएन प्रसूद अब WFI के महासचिव के पद पर नहीं हैं और अभी WFI के उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं। मिस्टर प्रसूद से मामले की पुष्टि हो गई है। उन्होंने ऐसा कोई भी पत्र जारी करने से साफ इनकार किया है।’
दूतावास को दिए गए फर्जी पत्र के मुताबिक, 11 पहलवानों और एक मैनेजर को बुडापेस्ट जाने के लिए वीजा देने की सलाह दी गई थी, जिसमें एक स्थानीय जगह पर ट्रेनिंग और कॉम्पिटिशन प्रोग्राम का हवाला दिया गया था। दस्तावेज में एक संदर्भ नंबर भी था और कहा जा रहा है कि दूतावास से एथलीटों को वीजा देने की मांग की गई थी।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि दस्तावेज में इस्तेमाल किए गए लेटरहेड में गलत जानकारियां थीं, जिसमें पुराना पता भी शामिल था। दूसरी अन्य गड़बड़ियां भी थीं। जवाब में फेडरेशन ने दूतावास से फर्जी दस्तावेज के आधार पर किसी भी वीजा आवेदन को प्रोसेस न करने की अपील की और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
डब्ल्यूएफआई ने कहा, ‘इसे देखते हुए यह मांग की जाती है कि इस पत्र के आधार पर कोई वीजा प्रोसेस शुरू न किया जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सही कानूनी कार्रवाई की जाए।’ फेडरेशन ने यह भी साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए आधिकारिक इंडियन एंट्री सिर्फ महासंघ के जरिये ही भेजी जाती हैं।
जुलाई 2026 में होना है टूर्नामेंट
फेडरेशन ने बताया कि बुडापेस्ट में भारतीय पहलवानों का अगला बड़ा इवेंट- रैंकिंग सीरीज ‘Polyak Imre, Varga Nanos & Kozma Istvan Memorial’ टूर्नामेंट जुलाई 2026 में होना है। डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष संजय सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘यह घटना शायद मानव तस्करी से जुड़ी हो सकती है, जिसमें कुछ लोग कथित तौर पर नकली फेडरेशन दस्तावेज का इस्तेमाल करके खिलाड़ी बनकर विदेश जाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे इस मामले की और जांच करेंगे।’
ये खबरें भी पढ़ सकती हैं
‘शुरू से ही चुनौतियां पसंद’,भारत के टी20 वर्ल्ड कप जीतने में अहम भूमिका निभाने पर बोले जसप्रीत बुमराह
‘एडम गिलक्रिस्ट जैसा खतरनाक’, संजू सैमसन ने मैथ्यू हेडन को याद दिलाई ऑस्ट्रेलियाई ओपनर की 149 वाली पारी
