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यादें: क्रिकेट में अश्वेतों की आवाज थे वीक्स

वेस्ट इंडीज के ‘थ्री डब्लू’ ने 1950 और 1960 के दशक मे क्रिकेट की दुनिया मे तहलका मचा रखा था। इनमे सर एवर्ट वीक्स सबसे सफल बल्लेबाज थे। वे डॉन ब्रैडमेन के स्तर के बल्लेबाज थे। छोटे कद के थे लेकिन क्रीज पर कदमों का इस्तेमाल बखूबी करते थे। धीमी गेंदों पर कदमों के इस्तेमाल से वे गेंद को सीमारेखा के बाहर पहुंचाते थे। 1948 मे उन्होंने लगातार पांच पारियों मे पांच शतक लगाने का अनोखा रेकार्ड बनाया।

Author Published on: July 9, 2020 4:22 AM
1950 के दशक मे एकदिवसीय और टी-20 नहीं था लेकिन वीक्स उस जमाने मे तेज बल्लेबाजी के पर्याय थे।

मनीष कुमार जोशी
एक समय कैरेबियाई क्रिकेट का पूरी दुनिया पर राज था। क्रिकेट के हर एक क्षेत्र बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी या फिर क्षेत्ररक्षण, उनका कोई मुकाबला नहीं कर सकता था। कैरेबियाई क्रिकेट की इस बादशाहत का आधार ‘थ्री डब्लू’ यानी वाल्काट, वारेल और वीक्स थे। इनमें वीक्स सबसे प्रभावी थे।

1950 के दशक मे एकदिवसीय और टी-20 नहीं था लेकिन वीक्स उस जमाने मे तेज बल्लेबाजी के पर्याय थे। वेस्ट इंडियन क्रिकेट को नई ऊंचाइयां प्रदान करने वाले वीक्स ने पिछले दिनों दुनिया को अलविदा कह दिया। जीवन के अंतिम सालों तक सक्रिय रहने वाले सर एवर्ट वीक्स कैरेबियाई क्रिकेटरों के लिए एक मिसाल रहेंगे।

वेस्ट इंडीज के ‘थ्री डब्लू’ ने 1950 और 1960 के दशक मे क्रिकेट की दुनिया मे तहलका मचा रखा था। इनमे सर एवर्ट वीक्स सबसे सफल बल्लेबाज थे। वे डॉन ब्रैडमेन के स्तर के बल्लेबाज थे। छोटे कद के थे लेकिन क्रीज पर कदमों का इस्तेमाल बखूबी करते थे। धीमी गेंदों पर कदमों के इस्तेमाल से वे गेंद को सीमारेखा के बाहर पहुंचाते थे। 1948 मे उन्होंने लगातार पांच पारियों मे पांच शतक लगाने का अनोखा रेकार्ड बनाया।

वीक्स बेहतरीन बल्लेबाज होने के साथ ही एक कुशल क्षेत्ररक्षक भी थे। वे कवर और स्लीप के बेहतरीन क्षेत्ररक्षक थे। उन्होने क्षेत्ररक्षण पर एक मैन्यूअल तैयार किया जिसका नाम था आसपैक्टस आॅफ फील्ंिडग्स। वे क्रिकेट से असीम प्रेम करते थे। हर स्थिति मे खेलने के लिए तैयार रहने वाले इस खिलाड़ी को 1958 मे जांघ मे गंभीर चोट लगने पर अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा। हालांकि वे घरेलू क्रिकेट 1964 तक खेलते रहे। उन्होने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 12,000 रन बनाए। इसके बाद वो चैरिटी मैचों मे 42 साल की उम्र तक खेलते रहे।

वीक्स बरबाडोस मे खेल अधिकारी भी रहे। 1979 के विश्व कप क्रिकेट मेें कनाडा टीम के कोच रहे। 1994 मे उन्हें आइसीसी ने मैच रैफरी भी बनाया। 2007 तक क्रिकेट में सक्रिय रह वीक्स ने अपने करिअर पर एक किताब भी लिखी।

वीक्स अपने पूरे करिअर में अश्वेत के लिए आवाज बने। एक घटना में इसका जिक्र मिलता है। एक बार वेटरन मैच खेलने के लिए वे जहां गए वहां अश्वेत और श्वेत के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। वीक्स को यह बात मालूम चली और उन्होंने उस मैच में खेलने से मना कर दिया। बाद में आयोजकों के इस कृत्य के लिए मांफी मांगने पर उन्होंने मैदान में उतरना स्वीकार किया।

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