रांची में हुए फेडरेशन कप में भारतीय धावकों ने रिकॉर्ड की झड़ी लगाई। 100 मीटर स्प्रिंट में गुरिंदरवीर सिंह ने जहां 10.09 सेकंड के साथ नेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए इतिहास रचा था। वहीं 400 मीटर रेस में विशाल टीके ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और दिग्गज मिल्खा सिंह को पीछे छोड़ दिया। विशाल आज ट्रैक एंड फील्ड में अपनी दौड़ के साथ सुर्खियां बटोर रहे हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वह ठीक से चल नहीं पाते थे। वह जिस स्टेडियम में इलाज के लिए जाते थे, वहीं से उनकी चैंपियन बनने की कहानी शुरू हुई।

विशाल के पिता थेन्नारसु ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि 13 साल पहले उनका बेटा ठीक से चल नहीं पाता था। उनके दोनों घुटने आपस में टकराते थे। जब वह तमिलनाडु के जोलारेट शहर में विशाल को स्टेडियम लेकर गए तो उन्होंने उनको धावक बनाने की नहीं सोची थी। राज्य के लिए फुटबॉल खेल चुके विशाल के पिता एक डेरी किसान भी हैं। उनके पिता ने बताया कि कैसे दर्द से विशाल गुजरते थे।

घंटों में मिट्टी में पैर जाम करके खड़ा रखा जाता था…

थेन्नारसु ने बताया कि वह विशाल को स्टेडियम में पैर सही करने के लिए ले जाते थे। घंटों तक उनके बेटे के दोनों पैर लॉन्ग जंप पिट (मिट्टी में) जाम किए जाते थे और वह खड़े रहते थे। इस प्रक्रिया के बाद प्रतिदिन स्टेडियम में बैठकर विशाल धावकों के प्रदर्शन को देखते थे। एक दिन उन्होंने ट्रैक पर उतरकर खुद दौड़ने का मन बना लिया। वहां से शुरू हो गई उनकी धावक बनने की कहानी।

46 साल बाद टूटा मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड

शनिवार को रांची में विशाल टीके ने 22 साल की उम्र में इतिहास रचा था। उन्होंने 400 मीटर रेस को 44.98 सेकंड में पूरा करके नेशनल रिकॉर्ड बनाया था। वह 45 सेकंड से कम में 400 मीटर रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय धावक बने थे। 46 साल बाद दिग्गज मिल्खा सिंह के 45.6 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए विशाल ने अपना नाम हर किसी की जुबान पर अमर कर दिया।

विशाल के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद उनके पिता ने कहा,”जब विशाल ने फिनिश लाइन को पार किया तो मेरे पास अपने जज्बातों को बयां करने के लिए शब्द नहीं थे। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। मुझे बचपन से उसकी तैयारी को देखते हुए एहसास था कि उसके अंदर जीत के लिए भूख है और एक दिन वह कुछ बड़ा करेगा।”

कम उम्र में छोड़ना पड़ा था घर…

विशाल के करियर का शुरुआती समय आसान नहीं था। उन्हें कम उम्र में ही अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए घर छोड़ना पड़ा था। वह स्पोर्ट्स हॉस्टल में गए थे और शुरुआत में 100 मीटर व 200 मीटर रेस में हिस्सा लेते थे। विशाल ने बताया,”स्टेडियम कम उम्र में ही मेरे घर जैसा बन गया था। मैं अपने माता-पिता को बहुत याद करता था और मुझे नहीं पता था कि आगे कैसे बढ़ पाउंगा।”

विशाल ने आगे बताया,“लेकिन मैंने खुद से कहा था कि अगर दिग्गज या ग्रेट बनना है तो कुछ बलिदान करने पड़ेंगे। मैंने 400 मीटर में दौड़ने की कभी नहीं सोची थी। मेरे कोच श्रीनिवासन ने कहा कि मैं 400 मीटर में ज्यादा बेहतर कर पाऊंगा।”

शरीर की दिक्कत बनी वरदान…

विशाल के कोच श्रीनिवासन ने बताया,“मैंने उनके (विशाल टीके के) शरीर के अजीब स्ट्रक्चर को देखा। वह लंबे थे और उनकी स्पीड बेहतरीन थी। उनकी ताकत 100 मीटर स्प्रिंट नहीं थी बल्कि उनकी लंबाई उनको 400 मीटर रेस में मदद कर सकती थी। मुझे विश्वास हो गया कि वह 400 मीटर में अच्छा करेंगे। हालांकि, उन्हें समझाने में और तैयार करने में मुझे वक्त लगा।”

इसके बाद 2024 में विशाल ने 46.77 सेकंड के साथ सीजन बेस्ट प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें नेशनल कैम्प के लिए कॉल आ गया। वहां उन्हें मिले विदेशी कोच ऑस्ट्रेलिया के जेसन डॉसन। इसके बाद विशाल के प्रदर्शन में और निखार आया। 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 45.57 में पहली बार 46 सेकंड से कम में 400 मीटर रेस पूरी की।

वह मात्र 0.02 सेकंड से नंबर 1 बनने से रह गए। फिर इंटर स्टेट चैंपियनशिप में उन्होंने नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा और 45.12 सेकंड में रेस पूरी की। अब रांची में फेडरेशन कप में 44.98 सेकंड के साथ उन्होंने इतिहास रच दिया।

इस तरह एक पिता का सपना पूरा हुआ जो अपने बेटे को स्टेडियम सिर्फ इसलिए ले जाता था कि उनका बेटा चल सके। मगर किसे पता था कि जो चलने में दिक्कतों का सामना करता था, एक दिन ट्रैक का सितारा बन जाएगा। जब यह रिकॉर्ड बना तो थेन्नारसु अपने जज्बातों को रोक नहीं पाए और ट्रैक पर दौड़ते हुए पहुंचे और बेटे को गले लगा लिया।

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