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वीरेंद्र सहवाग ने शोएब अख्तर को ‘चकर’ बताया, कहा- दो शॉट पड़ने पर बीमर या यॉर्कर से करने लगते थे हमला

वीरेंद्र सहवाग का यह भी मानना है कि ‘चकिंग’ वाली बात शोएब अख्तर खुद भी जानते थे। सहवाग ने कहा कि वर्तमान में मुंबई इंडियंस के गेंदबाजी कोच और न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बांड उनके सामने सबसे कठिन गेंदबाज थे।

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मैच के दौरान वीरेंद्र सहवाग और शोएब अख्तर के बीच रोमांचक जंग देखने को मिलती थी।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ‘चकिंग’ करते थे। सहवाग का यह भी मानना है कि ‘चकिंग’ वाली बात शोएब अख्तर खुद भी जानते थे। होम ऑफ हीरोज स्पोर्ट्स18 के नए एपिसोड में संजय मांजरेकर से बातचीत के दौरान वीरेंद्र सहवाग ने बताया कि शोएब अख्तर के एक्शन के कारण उन्हें खेलना मुश्किल था। यही नहीं, यदि उन्हें लगातार दो शॉट लगा दो तो वह बीमर या यॉर्कर से हमला करने लगते थे।

वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ‘शोएब को पता था कि उनकी कोहनी मुड़ती है और वह चक्का गेंद फेंकते हैं। वरना आईसीसी ने उन्हें प्रतिबंधित ही क्यों किया होता? ब्रेट ली का हाथ सीधा आता था, तो उनकी गेंद को पकड़ पाना आसान होता था, लेकिन शोएब के साथ ऐसा नहीं था। आपको पता ही नहीं चलता था कि उनका हाथ कहां से आ रहा है और गेंद कहां से आएगी।’

सहवाग ने बताया कि वर्तमान में मुंबई इंडियंस के गेंदबाजी कोच और न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बांड उनके सामने सबसे कठिन गेंदबाज थे। सहवाग ने कहा, ‘उनकी (बांड की) गेंदें आपके शरीर पर तेजी से आती थीं, भले ही वह ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी करते रहे हों।’ सहवाग ने यह भी कहा कि ब्रेट ली और शोएब अन्य दो ऐसे गेंदबाज थे, जिनका उन्होंने सामना किया।

सहवाग ने स्वीकार किया, ‘मुझे ब्रेट ली का सामना करने का कभी डर नहीं था, लेकिन शोएब को दो शॉट मार देता था, तो वह बीमर या यॉर्कर से हमला करने लगते थे।’ हालांकि, सहवाग ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान के इस तेज गेंदबाज को अपना दोस्त मानते हैं। सहवाग ने टेस्ट में शोएब अख्तर और पाकिस्तान टीम का सामना किया है। सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ एक शतक, दो दोहरे शतक और एक तिहरा शतक लगाया है। सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ 90 के ज्यादा के औसत से रन बनाए हैं।

सहवाग ने कहा, ‘सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, सौरव गांगुली सभी 150-200 गेंद खेलकर अपने शतक बनाते थे। अगर मैं उसी रफ्तार से शतक बनाता, तो मुझे कोई याद नहीं रखता। मुझे अपनी पहचान बनाने के लिए उनसे तेज रन बनाने थे।’ सहवाग ने यह भी खुलासा किया कि यह मुकाम हासिल करने के लिए उन्होंने तेज रन बनाने से कभी खुद को नहीं रोका।

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