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‘चार दिन की चांदनी होती है टेस्ट क्रिकेट नहीं’; वीरेंद्र सहवाग का ICC पर कटाक्ष, कहा- बिन पानी मर जाएगी मछली

आईसीसी टेस्ट क्रिकेट को चार दिन का करने का प्रस्ताव ला रहा है। उस प्रस्ताव पर इस साल मार्च में क्रिकेट समिति की बैठक में चर्चा होगी। हालांकि, आईसीसी के इस प्रस्ताव का विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री, रिकी पोंटिंग और इयान बॉथम जैसे मौजूदा और पूर्व शीर्ष खिलाड़ियों ने आलोचना की है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 13, 2020 4:39 PM

भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट मैच को पांच की जगह चार दिन का करने के प्रस्ताव पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से ‘मछली को अगर जल से निकाला जाए तो वह मर जाएगी’ उसी तरह टेस्ट में नयापन लाने का मतलब यह नहीं कि उसकी आत्मा से छेड़छाड़ की जाए।’

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पुरस्कार समारोह में सहवाग ने ‘एमएके पटौदी स्मारक व्याख्यान’ में हिंदी मुहावरों का जमकर इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि खेल के सबसे लंबे प्रारूप में नयापन लाना दिन-रात्रि टेस्ट मैच तक सीमित रखना चाहिए। सहवाग ने कहा, ‘चार दिन की चांदनी होती है, टेस्ट मैच नहीं…जल की मछली जल में अच्छी है, बाहर निकालों तो मर जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट को चंदा मामा के पास ले जा सकते हैं। हम दिन-रात्रि टेस्ट खेल रहे हैं, लोग शायद आफिस के बाद मैच देखने के लिए आएं। नयापन आना चाहिए लेकिन पांच दिन में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।’

बता दें कि आईसीसी टेस्ट क्रिकेट को चार दिन का करने का प्रस्ताव ला रहा है। उस प्रस्ताव पर इस साल मार्च में क्रिकेट समिति की बैठक में चर्चा होगी। हालांकि, आईसीसी के इस प्रस्ताव का विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री, रिकी पोंटिंग और इयान बॉथम जैसे मौजूदा और पूर्व शीर्ष खिलाड़ियों ने आलोचना की है। सहवाग ने पांच दिवसीय टेस्ट को रोमांस का तरीका करार देते हुए कहा कि इंतजार करना इस फॉर्मेट की खूबसूरती है।

टेस्ट मैच एक रोमांस : उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा बदलाव को स्वीकार किया है लेकिन पांच दिवसीय टेस्ट मैच एक रोमांस है। जहां गेंदबाज बल्लेबाज को आउट करने के लिए योजना बनाता है, बल्लेबाज हर गेंद को कैसे मारूं यह सोचता है और स्लिप में खड़ा क्षेत्ररक्षक गेंद का ऐसे इंतजार करता है जैसे प्यार में खड़ा लड़का सामने से हां का इंतजार करता है, सारा दिन इंतजार करता है कि कब गेंद उसके हाथ में आएगी और कब वह लपकेगा।’ हालांकि, इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने यह जरूर कहा कि टेस्ट क्रिकेट में थोड़ा नयापन जरूर आना चाहिए।

खराब होने पर ही बदलें डायपर और टेस्ट क्रिकेट : उन्होंने कहा, ‘जर्सी के पीछे अंक लिखने का प्रयोग अपनी जगह ठीक है, लेकिन डायपर और टेस्ट क्रिकेट तभी बदलने चाहिए जब वे खराब हों। मुझे नहीं लगता कि टेस्ट क्रिकेट खराब है, इसलिए ज्यादा बदलाव की आवश्यकता नहीं है। मैं कहूंगा कि टेस्ट क्रिकेट 143 साल पुराना हट्टा-कट्टा आदमी है। वह आज की भारतीय टीम की तरह फिट है। उसमें एक आत्मा है और इस आत्मा की उम्र किसी भी कीमत पर छोटी नहीं होनी चाहिए। वैसे चार दिन की चांदनी होती है टेस्ट मैच नहीं।’

उन्होंने कहा कि इस फॉर्मेट में लगातार नतीजे निकले हैं और ड्रॉ मैचों को देखते हुए प्रारूप में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट में पिछले 10-15 साल में ड्रॉ मैचों की संख्या काफी कम रही है। पिछले पांच साल में 31 टेस्ट ड्रा हुए, जबकि 223 खेले गये हैं। यह केवल 13 प्रतिशत है, यह हमारे जीडीपी से अधिक है। पिछले 10 साल में केवल 83 मैच ड्रॉ हुए है जबकि 433 मैच खेले गये है। ड्रा मैचों की संख्या 19 प्रतिशत है।’

कम मिलेंगे पैसे : उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा चार दिन के टेस्ट का एक और नुकसान है जो सीधे हम जैसे कमेंटेटर से जुड़ा है। उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘अगर मैच चार दिन का हो गया तो हमें भी पांच की जगह चार दिन के पैसे मिलेंगे। अभी अगर नतीजा तीन दिन में भी निकल आता है तो भी हमें पांच दिन के पैसे मिलते हैं।’

सहवाग ने इस मौके पर वहां बैठी मंसूर अली खान पटौदी साहब की पत्नी शर्मिला टैगोर की ओर देखते हुए कहा, ‘शर्मिलाजी यहां बैठी हुई हैं। उन पर फिल्माया गया एक पुराना गाना है जो टेस्ट क्रिकेट भी शायद हम से कह रहा है, ‘वादा करो तुम नहीं छोड़ोगो, तुम मेरा साथ, जहां तुम हो वहां मैं भी हूं……..।’ इस मौके पर सहवाग ने पटौदी साहब के साथ अपनी यादों और मुलाकातों को साझा किया।

उन्होंने कहा, ‘मेरा उनसे करीबी रिश्ता है। मैं उनसे पहली बार 2005-06 में मिला था, मैंने उनसे पूछा कि आपने मुझे खेलते हुए देखा है, मैं अपने खेल में कैसे सुधार कर सकता हूं। उन्होंने मुझे सिर्फ एक बात कही, ‘जब आप बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो आप गेंद से दूर होते हैं। यदि आप पास रहेंगे, तो आप आउट नहीं होंगे।’ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16,000 से ज्यादा रन बनाने वाले इस आक्रामक बल्लेबाज ने कहा, ‘मैंने कभी किसी की सलाह नहीं मानी है, यहां दादा (सौरव गांगुली) भी बैठे हैं, लेकिन मैंने उनकी सलाह मानी जिसका असर यह हुआ कि मैंने टेस्ट क्रिकेट में काफी रन बनाए। इसका श्रेय उन्हें जाता है।’

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