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वीरेंद्र सहवाग से पाकिस्तानी दिग्गज को लगता था डर, खुद की कप्तानी पर करने लगे थे शक

वीरेंद्र सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे और 19 टी20 मुकाबले खेले। इस दौरान टेस्ट में उनका स्ट्राइक रेट टेस्ट में 82.2, वनडे में 104.3 और टी20 में 145.4 का रहा।

वीरेंद्र सहवाग, इंजमाम उल हक, शाहिद अफरीदी। (सोर्स -सोशल मीडिया)

टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग से दुनिया के कई गेंदबाजों को डर लगता था। सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट, 251 वनडे और 19 टी20 मुकाबले खेले। इस दौरान टेस्ट में उनका स्ट्राइक रेट टेस्ट में 82.2, वनडे में 104.3 और टी20 में 145.4 का रहा। उनकी तूफानी बल्लेबाजी से विपक्षी टीम के गेंदबाज ही नहीं बल्कि कप्तानों को भी डर लगता था। पाकिस्तान के दिग्गज कप्तान इंजमाम उल हक ने एक बार कहा था कि उनसे हमें डर लगता था। इतना ही नहीं उनके खिलाफ अपनी कप्तानी पर भी शक होने लगता था। इंजमाम का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया वायरल हो रहा है।

सहवाग के बारे में एक टीवी चैनल पर इंजमाम ने कहा था, ‘‘उसके खिलाफ कप्तानी करना इतना मुश्किल था कि टेस्ट के पहले दिन पहले घंटे में पांच फील्डर बाउंड्री पर लगाना पड़ता था। मुझे अपनी कप्तानी पर भी खुद भी शक होने लगता था कि ये मैं क्या कर रहा हूं। सही कर रहा हूं या गलत कर रहा हू्ं। आते ही वो फील्डर नहीं देखता था। मिड ऑन पीछे रखता था तो वहां मारता था और मिडविकेट पीछे करता था तो उसके ऊपर से मार देता था। उसके रहते स्कोर रोकना और उसके फील्डिंग सेट करना बहुत मुश्किल था। मैं तो ये कहता था कि न उसकी अपनी इज्जत है और न ये किसी की इज्जत करता है।’’

इंजमाम ने आगे कहा, ‘‘सहवाग बहुत खतरनाक खिलाड़ी था। वह मैदान पर टिकने के बाद 200-300 रन बनाता था। ऐसे खिलाड़ी को रोकना बहुत मुश्किल था।’’ सहवाग ने बेंगलुरु टेस्ट में इंजमाम को कहा था कि लॉन्ग ऑन को आगे बुला लो जरुरत नहीं है मैं छक्का मार दूंगा और उन्होंने छक्का मार दिया था। इस पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने कहा था, ‘‘जो खिलाड़ी हवा में शॉट लगाते हैं मैं उनसे खुश होता था, क्योंकि उन्हें आउट करने का मौका ज्यादा होता था। लेकिन सहवाग से इस मामले में डर लगता था। वह नीचे ही खेलता तो सही रहता। वह बहुत ही खतरनाक खिलाड़ी था।’’

सौरव गांगुली ने उसी शो में सहवाग के बारे में कहा था, ‘‘मैंने सुनील गावस्कर को सामने से खेलते नहीं था। मेरी नजर में वीरेंद्र सहवाग से बेहतर ओपनर कोई नहीं है। आगे आने वाले कई सालों में भी उसके जैसा कोई नहीं होगा। वह किसी की नहीं सुनता था। खुद के अनुसार काम करता था। उसे बोलना पड़ता था कि थोड़ रोक ले। किसी कप्तान ने ओपनर को पावरप्ले में रोकने के लिए नहीं कहता होगा। सुनता वो सबकी था करता अपने ही मन का था।’’

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