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विराट कोहली ने बताया, पिता की मौत का जिंदगी पर पड़ा कैसा असर

पिता की मौत के कुछ घंटे बाद विराट कोहली मैच खेलने मैदान पर गए थे। उनके किसी भी साथी को यह उम्मीद नहीं थी कि विराट खेलने आएंगे।

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ( Express Photo by Kamleshwar Singh)

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली आज खेल की दुनिया में शीर्ष स्थान पर हैं। भारत सहित पूरी दुनिया में उनके लाखों प्रशंसक हैं। सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी के बाद वे तीसरे भारतीय क्रिकेटर बने हैं, जिन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। लेकिन आज हम जिस विराट कोहली को देख रहे हैं, उनके लिए यहां तक पहुंचना काफी मुश्किलों भरा रहा है। दिसंबर 2006 में अपने पिता की मौत के कुछ घंटों बाद उत्तम नगर में रहने वाला एक 18 साल का लड़का बैट लेकर दिल्ली की तरफ से रणजी ट्रॉफी टीम के लिए खेलने आता है। जिन परिस्थतियों का सामना वह लड़का कर रहा होता है, उसे शायद ही कोई अनुभव कर सकता है।

नेशनल ज्योग्राफी चैनल पर जल्द ही ऑन एयर होने वाले टेलिविजन डॉक्यूमेंट्री में कोहली कहते हैं कि मेरे पिता की मौत मेरी आंखों के सामने हुई। उनकी मौत के कुछ देर बाद मैं खेलने गया। अपने पिता की मौत के बारे में विराट कोहली बताते हैं,” उस समय रणजी ट्रॉफी क्रिकेट मैच चल रहा था। मैं दिल्ली टीम की ओर से खेल रहा था। 40 रन बनाकर मैं नाबाद था। अगले दिन मुझे खेलने जाना था। लेकिन सुबह 3 बजे अचानक मेरे पिता की तबीयत बिगड़ गई। पिता जी की तबीयत खराब होने के बाद हमें किसी तरह की सहायता नहीं मिली। हमने पड़ोसियों से मदद लेने की कोशिश की, क्योंकि हमें जानकारी थी कि वे डाक्टर थे। लेकिन यह रात का ऐसा समय था जब किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। जब तक एंबुलेंस और लोग आते, सबकुछ समाप्त हो चुका था।”

कोहली कहते हैं, “मैं अपने पिता की मौत के बाद काफी ज्यादा कंफ्यूज हो गया था। किसी भी तरह के दूसरे काम करने की मेरी इच्छा समाप्त हो गई। मैंने अपना पूरा ध्यान अपने सपनों को जो कि मेरे पिता का भी सपना था, पूरा करने में लगा दिया। आज मैं जो भी हूं उनकी बदौलत ही हूं।” दिल्ली कर्नाटक के खिलाफ खेल रहा था। कोहली 40 रन बना चुके थे। पिता की मौत के बाद उनके अधिकांश साथियों को उम्मीद नहीं थी कि वे मैदान पर आयेंगे। लेकिन कोहली मैदान में पहुंचे और 90 रन बनाकर दिल्ली को फॉलो ऑन से बचा लिया था। आज विराट कोहली क्रिकेट में लंबा सफर तय कर चुके हैं। 2008 में हुए अंडर-19 विश्व कप से लेकर वे खेल के सभी फार्मेट में भारतीय टीम को लीड कर चुके हैं। कई सारे रिकॉर्ड उनके नाम पर है।

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