ताज़ा खबर
 

कम उम्र में ‘द्रोणाचार्य सम्मान मिलने से हैरान हैं विजेंदर सिंह के पूर्व कोच कुटप्पा!

भारतीय मुक्केबाजी कोच सी ए कुटप्पा को उनकी कोचिंग काबिलियत के आधार पर इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा जायेगा।

Author September 20, 2018 6:52 PM
भारतीय मुक्केबाजी कोच सी ए कुटप्पा को उनकी कोचिंग काबिलियत के आधार पर इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा जायेगा

भारतीय मुक्केबाजी कोच सी ए कुटप्पा को उनकी कोचिंग काबिलियत के आधार पर इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा जायेगा और वह इस बात से हैरान हैं कि उन्हें महज 39 साल की उम्र में इस सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। भारत के मुक्केबाजी में पहले ओलंपिक पदकधारी विजेंदर सिंह की इस उपलब्धि में कुटप्पा की भूमिका अहम थी। जब विजेंदर से कुटप्पा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘यह जरूर लिखना कि मैंने 2003 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्हें हराया था। ’’ विजेंदर अब पेशेवर सर्किट में खेलते हैं लेकिन एमेच्योर मुक्केबाजी के लिये वह हमेशा आइकन बने रहेंगे। विजेंदर ने कहा, ‘‘लेकिन वह शानदार है, जब भी मुझे उनकी जरूरत होती है तो वह हमेशा तैयार रहते। उन्होंने मेरा बहुत ध्यान रखा। मुझे नहीं लगता कि भारतीय मुक्केबाजी में कोई भी उनकी काबिलियत पर सवाल उठा सकता है।

कुटप्पा ने कहा, ‘‘मैंने एक क्षण के लिये भी नहीं सोचा कि यह सम्मान मुझे महज 39 साल की उम्र में मिल जायेगा। 2009 में वीजू (विजेंदर) ने मुझे कहा था कि कोच सर, आप आवेदन तो भरो, मैं आपका समर्थन करूंगा लेकिन मैंने कहा कि मैं इसके बारे में कैसे सोच सकता हूं। ’’ कुटप्पा ने सिर्फ विजेंदर ही नहीं बल्कि सुरंजय सिंह और शिव थापा जैसे मुक्केबाजों की प्रतिभा को भी निखारा। सुरंजय जब शिखर पर थे, उन्होंने लगातार आठ अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले थे।

वहीं शिव भारत के पहले मुक्केबाज हैं जिन्होंने एशियाई चैम्पियनशिप में लगातार तीन पदक अपने नाम किये जिसमें एक स्वर्ण भी शामिल है और वह अभी तक ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाले सबसे युवा मुक्केबाज हैं।  कुटप्पा ने कहा, ‘‘मैंने 2006 में एनआईएस से कोचिंग डिप्लोमा लिया था और इसके बाद मेरी पोस्टिंग सेना खेल संस्थान (एएसआई) में हुई। बाद में मुझे और अन्य को पटियाला में राष्ट्रीय शिविर में लगा दिया गया। फिर राष्ट्रीय कोच गुरबक्श सिंह संधू की नजरें मुझ पर पड़ीं। ’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App