जहां 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की निडर बल्लेबाजी ने उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 का सबसे चर्चित बल्लेबाज बनाया, वहीं 36 साल के भुवनेश्वर कुमार ने इसी निडरता को नई पीढ़ी के कई बल्लेबाजों के खिलाफ हथियार बना लिया। वह IPL 2026 में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे।
भुवनेश्वर कुमार भले ही अब तक वैभव सूर्यवंशी का विकेट नहीं ले पाए हों, लेकिन उनके 28 विकेटों की सूची में प्रियांश आर्या, प्रभसिमरन सिंह, साहिल पारिख, समीर रिजवी, आयुष म्हात्रे और नई पीढ़ी के कई अन्य धुआंधार बल्लेबाज शामिल हैं।
इस चतुर और अनुभवी गेंदबाज ने युवा बल्लेबाजों को याद दिलाया है कि उनका हर गेंद पर हमला करने वाला अंदाज, भले ही दर्शकों को बेहद पसंद आता हो, लेकिन अचूक नहीं है। वह इन आक्रामक युवाओं को क्रिकेट पर पूरी तरह कब्जा नहीं करने दे रहे। हालांकि, टी20 क्रिकेट में गेंदबाजों की प्रासंगिकता बनाए रखने का उन्हें शायद ही कोई श्रेय मिलता हो, लेकिन भुवनेश्वर की कहानी हमेशा से ऐसी ही रही है।
अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर को पहली बार शून्य पर आउट किया था। पाकिस्तान के खिलाफ वनडे पदार्पण में उन्होंने शीर्ष क्रम को तहस-नहस कर दिया था। उनका नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज है। उनके नाम दो पर्पल कैप और तीन IPL खिताब हैं।
गृहनगर तक में बहुत चर्चित नहीं भुवनेश्वर
फिर भी भुवनेश्वर गृह नगर मेरठ के सबसे चर्चित क्रिकेटर तक नहीं है। यह सम्मान प्रवीण कुमार को मिलता है। RCB में भी विराट कोहली और अब रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ियों की स्टार शक्ति उनसे कहीं अधिक है। हालांकि, न तो उन्हें इससे कोई परेशानी है और न ही उन्होंने कभी अपने चारों ओर कोई आभामंडल बनाने की कोशिश की। कम बोलने वाले भुवनेश्वर न सिर्फ सादगी पसंद हैं, बल्कि खुद को भी हमेशा कम करके आंकते दिखाई देते हैं।
एक इंटरव्यू में उनसे उनकी स्विंग गेंदबाजी का राज पूछा गया। सवाल पूछने वाले ने कई संभावनाएं भी सुझाईं, जैसे क्या मेरठ में गेंद बनाने वाली फैक्ट्रियों की भरमार इसकी वजह है? या फिर बचपन में पतंग उड़ाने का शौक, जिसने उनकी कलाइयों को मजबूत और लचीला बनाया?
बातचीत को छोटा करने के लिए या शायद अपनी कला को ज्यादा दार्शनिक रूप देने से बचने के लिए भुवनेश्वर ने दोनों बातों पर हामी भर दी, लेकिन अगर सिर्फ चमचमाती लाल गेंद तक आसान पहुंच और पतंग उड़ाना किसी को स्विंग का सुल्तान बना देता तो भारत ऐसे गेंदबाजों से भरा पड़ा होता। मगर भुवनेश्वर को ‘पतंग उड़ाने वाले बिट्टू’ की छवि से कोई एतराज नहीं था।
मेरठ के ‘कर्मठ क्रिकेटर’ भुवनेश्वर कुमार
हालांकि बाद में उन्होंने यह जरूर बताया कि एक दुबले-पतले 10 साल के बच्चे के रूप में तेज गेंदबाज बनने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की थी। अभ्यास के बाद उनमें खाना खाने तक की ताकत नहीं बचती थी। उनकी मां ने उनकी बड़ी बहन को जिम्मेदारी दे रखी थी कि वह उन्हें खाना खिलाए। वह बिस्तर पर आंखें बंद करके लेट जाते और दिन खत्म मान लेते। थकान इतनी होती कि सोते समय उनके मुंह के किनारे से लार तक बहती रहती। यह सब बातें उन्होंने बिना किसी नाटकीयता के यूं ही बता दीं। मेरठ जैसे औद्योगिक शहर में लोग उन्हें ‘कर्मठ क्रिकेटर’ कहते हैं। मतलब ऐसा खिलाड़ी जो मेहनत और कर्म में विश्वास करता है, प्रचार में नहीं।
सहज और शांत क्रिकेटर हैं भुवनेश्वर कुमार
भुवनेश्वर देखने में बेहद सहज और शांत क्रिकेटर लगते हैं, लेकिन यह उनकी गेंदबाजी की तरह ही भ्रम पैदा करने वाला है। जब वह गेंदबाजी के लिए दौड़ते हैं तो उनकी आंखें पूरी तरह लक्ष्य पर टिकी होती हैं। स्टम्प के पास पहुंचकर जब वह शरीर को मोड़ते हैं और गेंद छोड़ते हैं तो ऐसा लगता है मानो उनकी आंखों के भीतर छोटी-छोटी आग की लपटें जल रही हों। गेंद उनके हाथ में होते ही उनका दिमाग लगातार बल्लेबाज की कमजोरी तलाशने में जुट जाता है। उनका लक्ष्य सिर्फ विकेट लेना होता है। न कोई भद्दा जश्न, न स्लेजिंग और न ही विरोधी को नीचा दिखाने की कोशिश।
जब उन्होंने सचिन तेंदुलकर को आउट किया था तो उनका सिर झुका हुआ था, मानो वह ‘पाजी’ से माफी मांग रहे हों। लॉर्ड्स में जब उन्होंने बेन स्टोक्स का विकेट लेकर अपनी पांचवीं सफलता हासिल की, तब भी उनका जश्न सिर्फ एक हल्की-सी मुट्ठी भींचने तक सीमित था। IPL में भी जब वह किसी युवा सितारे को आउट करते हैं तो उनके चेहरे पर किसी अनुभवी खिलाड़ी की जलन नहीं दिखती। बल्लेबाज को हराने के बाद वह अपनी जीत का जश्न मनाते हैं, बल्लेबाज की हार का नहीं। उनके चेहरे पर उस रणनीतिक गेंदबाज की संतुष्टि दिखाई देती है, जिसने आधुनिक टी20 बल्लेबाजों की कमजोरी पकड़ ली हो।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुर (RCB) के एक वीडियो में जब उनसे वैभव सूर्यवंशी और अन्य युवा बल्लेबाजों की तुलना पुराने दौर के बल्लेबाजों से करने को कहा गया तो उन्होंने एक ऐसा राज साझा किया जो गेंदबाजों के लिए उम्मीद जगाता है। भुवनेश्वर कुमार ने बताया, ‘‘ये नए दौर के टी20 बल्लेबाज निडर हैं। वे यह नहीं सोचते कि परिस्थितियां क्या हैं या मैच की स्थिति क्या है। वे सीधे गेंदबाजों पर हमला करते हैं। यही वजह है कि पुराने दौर के बल्लेबाज ज्यादा परिपक्व थे। वे परिस्थितियों और मैच की मांग को बेहतर समझते थे।’’
जहां कम अनुभवी गेंदबाज बैकलिफ्ट और गोल्फ स्विंग जैसे बल्ले के मूवमेंट से घबरा जाते हैं, वहीं भुवनेश्वर को उसमें मौका नजर आता है। पारंपरिक स्विंग गेंदबाज होने के बावजूद भुवनेश्वर कुमार ने खुद को समय के साथ बदला है। उनकी लाइन और लेंथ इतनी सटीक होती है कि बल्लेबाजों को पैरों का इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ता है। यह कुछ ऐसा है जिसकी आज के टी20 बल्लेबाजों को आदत नहीं है।
गेंद पर अंगूठे की लगभग अदृश्य पकड़ बदलकर वह उसे अपनी मर्जी से नचाते हैं। उन्होंने प्रियांश आर्या को ऐसी गेंद पर आउट किया जो उनकी पहुंच से बाहर थी। अंतिम क्षण में शरीर के झुकाव से मिली अतिरिक्त उछाल के कारण बल्लेबाज गलत शॉट खेल बैठा। प्रभसिमरन सिंह को उन्होंने टेस्ट मैच जैसी लेंथ पर फंसाया। गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर स्विंग हुई और पिच पर पड़ने के बाद और दूर निकल गई। आदतन बल्ला घुमाने वाले प्रभसिमरन सिंह ने किनारा दे दिया। समीर रिजवी लेंथ को पढ़ नहीं पाए और बोल्ड हो गए।
इस सीजन भुवनेश्वर कुमार जादूगर की तरह युवा बल्लेबाजों से खेलते नजर आए। जैसा कि उनका कहना है कि ये बल्लेबाज न तो परिस्थितियों को पढ़ रहे थे, न मैच की स्थिति को और न ही उस गेंदबाज को जिसने कभी सचिन तेंदुलकर को शून्य पर आउट किया था और जो लॉर्ड्स का हीरो रह चुका है।
इस IPL के युवा छक्केबाजों की सफलता के जश्न में डूबे लोगों से एक विनम्र अनुरोध है कि उतने ही सफल, चतुर और अनुभवी गेंदबाज के लिए भी कुछ तालियां बचाकर रखिए। यदि पूरे सीजन आपकी अंगुलियां वैभव सूर्यवंशी के लिए तालियां बजाते-बजाते थक गई हैं तो भुवनेश्वर कुमार के लिए धीमी लेकिन सम्मानपूर्ण तालियों की गूंज जरूर पैदा कीजिए।
‘‘सर अभी दूध नहीं पी रहा हूं मैं’’: वैभव से रवि शास्त्री ने पूछा सवाल, 15 साल के खिलाड़ी का जवाब वायरल
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से पूरे आईपीएल 2026 में सुर्खियां बटोरीं। सीजन खत्म होने के बाद जब उन पर इनामों की वर्षा हुई, उसके बाद उनका एक जवाब जमकर वायरल हुआ। यह जवाब आया था रवि शास्त्री के एक सवाल पर। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
