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U19 वर्ल्ड कप: रोज 50 KM का सफर, कोरोना का हमला भी ना तोड़ पाया 17 साल के रशीद का हौसला, जुझारू पारी से भारत को फाइनल में पहुंचाया

रशीद के पिता शेख बालीशा की नौकरी चली गई, शहर-शहर भटकना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने बेटे का सपना पूरा किया। रशीद भी एक समझदार बेटे हैं। अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान जब रशीद को कोरोना हुआ तब उन्हें लगा कि उनका सपना टूट गया है। हालांकि, वह ऐसे समय टीम के खेवनहार बने, जब देश को उनकी सबसे ज्यादा जरुरत थी।

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आईसीसी अंडर-19 मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया के टोबियास स्नेल की गेंद पर शॉट लगाते भारत के शेख रशीद। (सोर्स-आईसीसी)

अंडर-19 वर्ल्ड कप (ICC U19 World Cup) के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 96 रन की जीत हासिल करने के बाद भरतीय कप्तान यश ढुल के शतक और उप कप्तान शेख रशीद की जुझारू पारी की हर जगह तारीफ हो रही है। रशीद यह सम्मान पाने के हकदार भी हैं। यह 17 साल के रशीद ही हैं, जिन्होंने क्रिकेट को करियर बनाने के लिए रोजाना 50 किमी का सफर किया। उन पर कोरोना का भी हमला हुआ, लेकिन कोई भी परेशानी उनका हौसला तोड़ नहीं पाई।

भारतीय टीम ने 3 फरवरी 2022 को अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई। वह लगातार चौथी बार फाइनल में पहुंचा। भारत की इस जीत में जहां यश ढुल का अहम योगदान रहा। वहीं, शेख रशीद (Shaik Rasheed) ने भी अहम भूमिका निभाई। यश ढुल ने 10 चौके और एक छक्के की मदद से 110 गेंद में 110 रन बनाए। रशीद 8 चौके और एक छक्के की मदद से 108 गेंद में 94 रन बनाकर पवेलियन लौटे।

शेख रशीद यश ढुल (Yash Dhull) के साथ ऐसे समय कंधे से कंधे मिलाकर पारी को आगे बढ़ाते रहे, जब भारत ने अपने शुरुआती दो विकेट 37 रन पर ही खो दिए थे। ढुल और रशीद ने तीसरे विकेट के लिए 204 रन की साझेदारी की और टीम को 50 ओवर में 5 विकेट पर 290 रन के स्कोर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

रशीद को आज इस मुकाम तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही। क्रिकेट अकादमी जहां शेख रशीद ट्रेनिंग करते थे, वह गुंटूर में उनके घर से लगभग 50 किलोमीटर दूर मंगलगिरी में थी। लेकिन रशीद शायद ही कभी अभ्यास से चूके हों, क्योंकि उनके पिता शेख बालीशा अपने स्कूटर पर रोजाना उन्हें उतनी दूर ले जाते थे।

बारिश हो या धूप, गर्मी हो या धूलभरी आंधी, बालीशा और उनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता था। बता दें कि ग्रीष्मकाल में गुंटूर में भीषण गर्मी पड़ती है। बालीशा की नौकरी चल गई। उन्हें शहर-शहर भटकना पड़ा, लेकिन अपने बेटे के दिल में क्रिकेट के सपने को जलाए रखा।

बालीशा हैदराबाद में बैंकों के लिए एक रिकवरी एजेंट के तौर पर काम करते थे। बालीशा ने पुराने दिनों को याद करते हुए इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘उसी दौरान मेरे एक दोस्त ने रशीद को अकादमी (प्रसाद क्रिकेट अकादमी) में एक मैच के दौरान बल्लेबाजी करते देखा। उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि वह प्रतिभाशाली है। तुम्हें उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। दुर्भाग्य से, हम उसे किराया देने के अलावा उसकी ट्रेनिंग और स्टडीज को सपोर्ट करने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे, इसलिए 2012 में, मैं गुंटूर लौट गया।’

बालीशा ने बताया, ‘गुंटूर में स्थानीय क्रिकेट अकादमी की फीस बहुत ज्यादा थीं।’ हालांकि, उन्होंने इसका हल निकाला। वह रशीद को अपने घर से 6 किलोमीटर दूर एक क्रिकेट मैदान में ले जाने लगे। वहां उसे थ्रो-डाउन करने लगे। कुछ महीने बाद, उन्हें एसीए की आवासीय क्रिकेट अकादमी के बारे में पता चला और रशीद को ट्रायल के लिए ले गए।

रशीद यद्यपि युवा थे, लेकिन वह समझ गए थे कि उनके पिता अपने क्रिकेटिंग सपने को सच करने के लिए किस हद तक गए। बालीशा ने बताया, ‘रशीद ने मुझे कभी किसी फिल्म या पार्क में ला जाने या खिलौने अथवा गैजेट लाने के लिए नहीं कहा। वह हमेशा क्रिकेट में ही रहता था। मैंने भी उसे देने के लिए वह सब कुछ किया, जो मैं कर सकता था।’

रशीद ने भी अपनी तकनीक और संयम से अकादमी के कोच जे कृष्णा राव का दिल जीत लिया। कोच रवा कहते हैं, ‘वह 7 या 8 साल का रहा होगा और हमारे अंडर -16 गेंदबाजों का काफी आराम से सामना कर रहा था। वह इतना कंपोज्ड लग रहा था। मुझे पता था कि उसमें प्रतिभा है।’

जब तक उनके पिता की एक स्थानीय ऑटोमोबाइल फर्म में नौकरी थी, तब तक सब ठीक रहा। दरअसल, रोजाना 50 किमी का सफर करने के कारण बालीशा काम पर देर से पहुंचने लगे। इस बीच, कोच ने एक समाधान पेश किया। जे कृष्णा राव विकेटकीपर केएस भरत के भी कोच हैं। राव ने बताया, ‘उनके पिता थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन मैं उन्हें रशीद को अकादमी में रहने देने के लिए मनाने में कामयाब रहा।’

दो साल बाद, रशीद को आंध्र अंडर -14 टीम के लिए चुना गया। फिर 2018-19 सीजन में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में, उन्होंने 168.50 के औसत से 674 रन बनाए। उसमें तीन शतक भी शामिल थे। सपनों की दौड़ चलती रही। वीनू मांकड़ ट्रॉफी (2020-21) में, वह 6 मैच में 376 रन बनाकर दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने।

पिछले साल दिसंबर में अंडर-19 एशिया कप के लिए चुने गए, उन्होंने सेमीफाइनल में बांग्लादेश के खिलाफ 103 गेंदों में नाबाद 90 रन बनाए। राव ने बताया, ‘अंडर-19 विश्व कप के लिए मंच अच्छी तरह से तैयार था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले गेम के बाद वह कोरोना पॉजिटिव हो गया।’

राव ने बताया, ‘उसने मुझे फोन किया और टूट गया। उसे तेज बुखार था और शरीर में तेज दर्द था। उसने करीब 2 बजे मुझे फोन किया और रोने लगा। कहने लगा, सर, मुझे लगता है कि मेरा वर्ल्ड कप खत्म हो गया है। हो सकता है कि मैं नॉकआउट तक उबर न पाऊं।’

हालांकि, कृष्णा राव ने उनके डर को दूर कर दिया। राव ने बताया, ‘30 मिनट तक क्रिकेट के बारे में बात करने के बाद मुझे उसमें नई ऊर्जा का अहसास हुआ। हमने उन चीजों के बारे में बात की जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं। मैंने उसे प्रोटोकॉल का पालन, ठीक होने पर ध्यान केंद्रित और और नकारात्मकता को दरकिनार करने का निर्देश दिया।’

भाग्य ने भी रशीद का साथ दिया। वह बांग्लादेश के खिलाफ क्वार्टर फाइनल से पहले ठीक हो गए। बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने 26 रन की पारी खेली। यह पारी बड़ी नहीं थी, लेकिन बड़ी बात यह थी कि वह वापस मैदान पर थे। यही मायने रखता था। कहना गलत नहीं होगा कि उसी आत्मविश्वास ने उन्हें आज देश का हीरो बना दिया।

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