टोक्यो पैरालंपिक से आई भारत के लिए बुरी खबर, ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा तंवर चोट के चलते रेपचेज राउंड से हुईं बाहर

भारत के लिए टोक्यो पैरालंपिक से एक बुरी खबर सामने आई है कि भारत की पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा तंवर ने महिलाओं की K44-49kg प्रतियोगिता के रेपचेज राउंड से अपना नाम वापस ले लिया है। उनके पैर और हाथ में फ्रैक्चर की भी आशंका जताई जा रही है।

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भारत की ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा तंवर ने चोट के चलते टोक्यो पैरालंपिक के रेपचेज राउंड से अपना नाम वापस ले लिया है (Source: Twitter)

भारत के लिए गुरुवार को टोक्यो पैरालंपिक से एक बुरी खबर सामने आई है। भारत की पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी अरुणा तंवर ने महिलाओं की K44-49kg प्रतियोगिता के रेपचेज राउंड से अपना नाम वापस ले लिया है। इससे पहले आज सुबह क्वार्टरफाइनल में अरुणा को पेरू की लियोनोर एस्पिनोज़ा कैरान्ज़ा से 84-21 से मात दी थी।

इस हार के बावजूद वे पदक की दौड़ में थीं और उन्हें रेपचेज राउंड से गुजरना था। लेकिन बाएं हाथ और दाएं पैर में चोट के चलते उन्हें रेपचेज राउंड से अपना नाम वापस लेना पड़ा है। ये चोट उन्हें पैरालंपिक के शुरुआती दौर के मैचों के दौरान लगी थीं।

चोट के बावजूद वे क्वार्टरफाइनल में उतरी थीं। लेकिन अब उनकी सूजन बढ़ गई है और हेयरलाइन फ्रैक्चर की आशंका भी जताई जा रही है। इस बात की जानकारी दी है रियो पैरालंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट दीपा मलिक ने।

मलिक ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि,’बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारी टाइग्रेस अरुणा तंवर अपने बाउट के दौरान चोटिल हो गई है। हेयरलाइन फ्रैंक्चर की आशंका है। उन्होंने अपना पहला मैच अच्छे अंतर से जीता था। लेकिन दूसरे मैच में एनर्जी नहीं थी चोट के कारण। सूजन बढ़ गई है और उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन की जरूरत है।’

गौरतलब है कि रेपचेज में अरुणा का मुकाबला अजरबैजान की 10वीं वरीयता प्राप्त रोयाला फाटिलियेवा (Royala Fataliyeva) के साथ होना था। अरुणा के डेलिगेशन ने भी उनके चोटिल होने और स्कैन के लिए ले जाने की सूचना दी है। डेलिगेशन ने भी उनके हाथ और पैर में फ्रैक्चर की आशंका जताई है।

अरुणा से जुड़ी अन्य जानकारी

हरियाणा के भिवानी की 21 वर्षीय अरुणा तंवर का जन्म प्रत्येक हाथ में केवल तीन अंगुलियों के साथ हुआ था और उनकी बाहें पूरी तरह से विकसित नहीं हुई थीं। उन्होंने आठ साल की उम्र में ताइक्वांडो सीख लिया और 2017 तक सक्षम प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्हें पैरा-ताइक्वांडो में स्विच करने के लिए मजबूर होना पड़ा था अपनी जन्मजात दिक्कतों के कारण।

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