भारत के नाम कुल 32 मेडल, नौ में से आठ गोल्ड अकेले हॉकी में; इस बार टूट सकता है लंदन का रिकॉर्ड

टोक्यो ओलंपिक की पदक तालिका में भारत अभी 65वें नंबर पर है। उसने अब तक एक रजत और दो कांस्य पदक जीते हैं। रवि दहिया अपने इवेंट के फाइनल में पहुंच गए हैं। इस कारण भारत का एक और पदक पक्का हो गया है।

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नीरज चोपड़ा जैवलिन थ्रो के फाइनल में पहुंच गए हैं। बॉक्सर लवलिना ने कांस्य पदक जीता है। पहलवान रवि दहिया ने भी एक पदक पक्का कर लिया है।

टोक्यो ओलंपिक में भारत ने अब तक 4 पदक पक्के कर लिए हैं। इसके अलावा पुरुष और महिला हॉकी में भी कांस्य पदक जीतने की उम्मीदें  अभी जिंदा हैं। पहलवान दीपक पूनिया और महिला रेसलर अंशु मलिक भी कांस्य पदक जीत सकते हैं।

दरअसल, दीपक पूनिया 86 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। अब अगर वह सेमीफाइनल में हार भी जाते हैं तब भी उन्हें ब्रॉन्ज मेडल जीतने का एक और मौका मिलेगा। उन्हें उन्हें रेपचेज के नियमों के तहत पहुंचने वाले रेसलर से भिड़ना होगा।

अंशु मलिक पहले दौर में हार गईं, लेकिन रेपचेज के तहत उन्हें कांस्य पदक जीतने का मौका मिल गया है। ओलंपिक में भारत के लिए कुश्ती में रेपेचेज हमेशा से ही बहुत भाग्यशाली रहा है। ओलंपिक में अब तक भारत को तीन कांस्य पदक रेपचेज के जरिए ही मिले हैं।

नीरज चोपड़ा का भाला भी इतिहास रच सकता है। वह जैवलिन थ्रो के फाइनल में पहुंच गए हैं और पदक से कुछ ही कदम दूर हैं। पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फौगाट और गोल्फर अदिति अशोक की भी कोशिश होगी कि वे पोडियम पर राष्ट्र धुन सुनें। यदि ऐसा हुआ तो भारत टोक्यो में इतिहास रचेगा। वह ओलंपिक में पहली बार दहाई के आंकड़े को पार करेगा।

टोक्यो ओलंपिक की पदक तालिका में भारत अभी 65वें नंबर पर है। उसने अब तक एक रजत और दो कांस्य पदक जीते हैं। रवि दहिया अपने इवेंट के फाइनल में पहुंच गए हैं। इस कारण भारत का एक और पदक पक्का हो गया है।

ओलंपिक में भारत के नाम अब कुल 32 पदक हो गए हैं। भारत ने टोक्यो ओलंपिक से पहले तक कुल 28 पदक जीते। इस ओलंपिक में वह 3 पदक जीत चुका है, जबकि एक पक्का हो चुका है। इस तरह उसके खाते में 32 पदक हो चुके हैं।

इनमें नौ गोल्ड मेडल हैं। उसने सात बार सिल्वर मेडल और 12 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। भारत की पुरुष हॉकी टीम ने सबसे ज्यादा आठ स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। निजी स्पर्धा में अब तक सिर्फ एक भारतीय यानी अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मेडल जीता है।

अभिनव बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में यह उपलब्धि हासिल की थी। देश वासियों को इस बार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा, पहलवान बजरंग पुनिया, रवि दहिया और विनेश फौगाट से गोल्ड मेडल की उम्मीदें हैं।

भारत के लिहाज से सबसे बेहतरीन ओलंपिक अभियान की बात करें तो वह साल 2012 का लंदन ओलंपिक था। लंदन ओलंपिक में भारत ने कुल 6 पदक जीते थे। टोक्यो में भारत के अभी 4 पदक पक्के हुए हैं। ऐसे में भारत लंदन के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है।

लंदन ओलंपिक में भारत ने दो रजत और 4 कांस्य पदक जीते थे। उससे पहले 2008 बीजिंग ओलंपिक में भारत ने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते थे। रियो ओलंपिक (साल 2016) में भारत दो ही पदक जीत पाया था।

रियो ओलंपिक में दुनिया की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक पीवी सिंधु ने रजत और पहलवान साक्षी मलिक ने कांस्य पदक जीता था। भारत ने 1952 हेलसिंकी और 1900 पेरिस ओलंपिक में दो-दो पदक अपने नाम किए थे।

भारत ने अब तक 24 ओलंपिक में हिस्सा लिया है। इसमें से छह ओलंपिक में वह एक भी पदक नहीं जीत पाया है। भारत 1920, 1924, 1976, 1984, 1988 और 1992 में आयोजित ओलंपिक खेलों में एक भी पदक नहीं जीत पाया था।

मॉडर्न ओलंपिक खेल 1896 से आयोजित हो रहे हैं। उसके बाद से दुनिया ने अमेरिका, सोवियत संघ, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे देशों को महाशक्ति के तौर पर देखा।

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