ओलंपिक कमेटी ने नहीं बांटे कंडोम तो खिलाड़ियों ने अपनाया यह हथकंडा, चर्चा में आई 30 साल पुरानी जापान की यह दुकान

ओलंपिक कमेटी ने 1 लाख 60 हजार कंडोम बांटने की योजना बनाई थी। लेकिन इसको लेकर विवाद हो गया और लोग कहने लगे की जब कोरोना में सोशल डिस्टेंसिंग पर फोकस करना है, तो कंडोम का वितरण क्यों?

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कोरोना के चलते इस बार ओलंपिक खेलों में खिलाड़ियों को कंडोम नहीं बांटे गए हैं।

ओलंपिक खेलों में सेक्सयुअल एक्टिविटी के चलते हर बार लाखों की संख्या में खिलाड़ियों को कंडोम बांटे जाते हैं। लेकिन कोरोना के चलते इस बार ऐसा नहीं किया गया। हालांकि ओलंपिक कमेटी ने 1 लाख 60 हजार कंडोम बांटने की योजना बनाई थी। लेकिन इसको लेकर विवाद हो गया और लोग कहने लगे की जब कोरोना में सोशल डिस्टेंसिंग पर फोकस करना है, तो कंडोम का वितरण क्यों?

इस विवाद के बाद कमेटी ने इसे खेल खत्म होने तक होल्ड कर दिया है। ऐसे में खिलाड़ियों के पास कंडोम नहीं हैं और इसे पाने के लिए वे ओलंपिक खेल गांव से 20 किलोमीटर दूर बनी एक 30 साल पुरानी दुकान पर जा रहे हैं। 1993 में खोली गई यह दुकान सिर्फ कंडोम बेचती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दुकान पर खिलाड़ियों की भीड़ देखने को मिल रह है। इस दुकान में 24 घंटे सिर्फ कंडोम मिलता है।

इस दुकान को खोलने की वजह जापान में एचआईवी एड्स और अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकना है। यह दुकान अब ओलंपिक खिलाड़ियों के काम आ रही है और सुर्खियों में है। इसके अलावा ओलंपिक कमेटी ने इस बार खिलाड़ियों को कार्डबोर्ड से बने बेड दिये हैं। इन बिस्तरों को एंटी सेक्स बेड भी कहा जा रहा है।

कहा जा रहा है कि ऐसा खिलाड़ियों को सेक्सयुअल एक्टिविटी से दूर रखने के लिए किया गया है। इस बिस्तर को ऐसे डिजाइन किया गया है कि ये सिर्फ 1 शख्स का भार उठा पाएगा। अगर दो लोग इसपर चढ़े तो ये टूट जाएगा। साथ ही ये किसी तरह के झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा।

बता दें एथलीटों को कंडोम देने की पंरपरा की शुरुआत 1988 में हुए ओलंपिक से की गई थी। उस समय एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के नजरिए से यह कदम उठाया गया था।

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